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चंडीगढ़ में 615 सूखे पेड़ बने जान के 'दुश्मन', कटाई के लिए मंजूरी का इंतजार

Thu, 07 Sep 2017 09:16 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 07 Sep 2017 09:16 AM IST
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Dried-up trees, branches posing danger to people
Chandigarh Trees - फोटो : अमर उजाला
यूटी प्रशासन की लापरवाही के चलते शहर में सूखे वृक्षों ने मौत के 615 ठिकाने बना लिए हैं। शहर में प्रवेश करते हुए ट्रिब्यून चौक तक 29 ऐसे पेड़ हैं, जो जानलेवा हैं। ट्रिब्यून चौक तक आने के लिए 29 बार जान दांव पर लगती है। खास बात यह है कि प्रशासन ने ही इन 615 सूखे और मृत वृक्षों की पहचान की है, जबकि अभी तक इन्हें काटने के लिए कुछ नहीं किया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को सौंपे गए जवाब में भी इनकी मंजूरी संबंधित अथॉरिटी के पास लंबित दिखाई है।
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मामला काजल नाम की एक मासूम लड़की से जुड़ा है, जो सड़क से गुजरते हुए एक ऐसे ही सूखे वृक्ष का शिकार हो गई थी। टहनी गिरने से उसकी टांग में गंभीर चोट आई और बाद में उसे काटना पड़ा। काजल फिर भी किस्मत वाली थी कि केवल टहनी गिरी क्योंकि शहर में ऐसे पूरे 615 वृक्ष मौजूद हैं, जो गिरने पर कई लोगों की जान ले सकते हैं। काजल ने जब मुआवजे के लिए हाईकोर्ट में दस्तक दी तो हाईकोर्ट ने याचिका का दायरा बढ़ाया और प्रशासन से इस बारे में जवाब मांगा। जब प्रशासन की ओर से जवाब दाखिल किया गया तो आंकड़े हैरान करने वाले थे।
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प्रशासन की ओर से सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, फुटपाथ आदि स्थान पर ऐसे खतरनाक सूखे मृत वृक्ष मौजूद हैं। प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में सौंपे गए इस हलफनामे में शहर की सड़कों पर मौजूद गड्ढों और सड़क किनारे बने खुेल मेनहोल पर भी प्रशासन ने जवाब दिया। इस जवाब को रिकार्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर गड्ढों और खुले मेन होल पर विस्तृत जानकारी तलब कर ली है।
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वीआईपी भवनों पर भी लापरवाही 

Dried-up trees, branches posing danger to people
Chandigarh Trees - फोटो : अमर उजाला
नौनिहाल खतरे के साए में
प्रशासन की ओर से सौंपे गए आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला कि शहर के 36 स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों पर 170 ऐसे ही सूखे वृक्षों के कभी भी गिर जाने का खतरा है। बच्चे मैदान में खेलने के दौरान हमेशा ही इन वृक्षों की परिधि में आ जाते हैं और किसी भी अनहोनी घटना के चलते किसी परिवार का चिराग बुझने का खतरा बना हुआ है। वहीं, कॉलेजों में भी हालात कुछ बेहतर नहीं है। शहर के 7 शिक्षण संस्थानों में 25 ऐसे सूखे वृक्ष मौजूद हैं, जो कभी भी मौत बनकर गिर सकते हैं। शहर का फुटपाथ भी इन वृक्षों के कारण पैदा होने वाले खतरे से बचा नहीं है। सेक्टर 1, 2, 3, 4, 5, 9, 10, 15, 16 व 17 के मार्ग पर 88 ऐसे सूखे वृक्ष मौजूद हैं।

वीआईपी भवनों पर भी लापरवाही 
ऐसा नहीं है कि केवल आम लोगों के इस्तेमाल की जगह पर ही ऐसे सूखे वृक्षों का खतरा है। अकेले पंजाब राज भवन में ही 10 सूखे वृक्ष मौजूद हैं और इसके वीआईपी गेस्ट हाउस में 2 हैं। ऐसे में आम आदमियों पर ही नहीं बल्कि हाई-प्रोफाइल लोगों पर भी खतरे की तलवार लटकी रहती है।

टूरिस्ट प्लेस भी खतरे के बाहर नहीं
शहर में पर्यटन का केंद्र रहने वाले स्थानों पर भी प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं दिया गया, जिसका नतीजा यह है कि सुखना लेक, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, आर्ट गैलरी म्यूजियम, लेजर वैली आदि स्थानों पर सूखे वृक्ष अभी तक मौजूद हैं, जबकि यह पहले ही पता है कि यह वृक्ष जानलेवा हो सकते हैं।

मंजूरी की प्रक्रिया आसान बनाने का किया दावा

Dried-up trees, branches posing danger to people
Chandigarh Trees - फोटो : File Photo
मंजूरी की प्रक्रिया आसान बनाने का किया दावा
यूटी प्रशासन की ओर से सौंपे गए हलफनामे में कहा गया कि वे सूखे वृक्षों को काटने की मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाना चाहते हैं। इसलिए इंजीनियरिंग विभाग, एमसी के एसडीओ और वन विभाग के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसरों को अधिकार दिया गया है। वे यदि किसी वृक्ष को ऐसा मानते हैं कि वह जानलेवा हो सकता है तो उस स्थिति में चीफ इंजीनियर, मुख्य वन संरक्षक या एमसी कमिश्नर जिसके अधिकार क्षेत्र में वह जमीन होगी, उसको उस वृक्ष को काटने का काम दिया जाएगा।

हालांकि, इसके लिए तीनों में से किन्हीं दो अधिकारियों की सहमति जरूरी होगी। साथ ही यह लिखकर भी देना होगा कि यह वृक्ष मानव जीवन के लिए हानिकारक है, इसलिए इसे काटना जरूरी है। हरे वृक्ष को काटने की मंजूरी का जिम्मा अभी भी प्रशासक के सलाहकार के पास होगा। 

नीति का अच्छा पहलू
प्रशासन की ओर से जो नीति बनाई गई है, उसका सबसे अच्छा पहलू यह है कि वृक्ष सूखा भी हो तो भी उसे काटने के बाद उसकी एवज में 5 पौधे लगाने होंगे। इनमें से एक को तुरंत पेड़ काटते ही उगाना होगा। यह पौधा कौन सा हो, इसके लिए भी नीति में प्रावधान किया गया है। अदालत की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट है कि जिस प्रजाति का वृक्ष काटा जाएगा, उस स्थान पर उसी प्रजाति का पौधा तत्काल लगाया जाएगा।
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