कोरोना का झटका: बजट पर चंडीगढ़ प्रशासन ने चलाई कैंची, कई प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना महामारी का असर चंडीगढ़ के विकास कार्यों पर भी पड़ा है। लगभग सभी विकास कार्य ठप हो गए हैं। कुछ चल रहे हैं, लेकिन गति बहुत धीमी है। कई प्रोजेक्ट केंद्र की ओर से ग्रांट नहीं मिलने की वजह से लटके हैं तो कुछ स्थानीय बजट में कटौती की वजह से। लगभग हर प्रोजेक्ट की निर्माण अवधि बढ़ चुकी है। जो साल के आखिरी में तैयार होने थे, वे प्रोजेक्ट अब नए साल में तैयार होंगे। एक नजर डालते हैं शहर के उन विकास कार्यों पर जो शहर के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं और वे कब तक तैयार हो सकेंगे।
इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने का प्रस्ताव टला
कोरोना वायरस से बजट में आई कमी की वजह से प्रशासन ने 40 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया है। सीटीयू के प्रस्ताव के तहत शहर में डीजल से चलने वाली बसों को हटाकर केवल इलेक्ट्रिक बसों को चलाना था। इस प्रस्ताव के पहले फेज में 40 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जानी थीं। वित्तीय संकट को देखते हुए प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया गया है। इसकी पुष्टि ट्रांसपोर्ट विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने की है। प्रस्ताव के तहत प्रशासन ने 10 साल के लिए ये बसें चलाने का करार करना है। इसके लिए एक चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित करना होगा।
बस क्यू शेल्टर बनाने का काम आगे बढ़ा
कोरोना वायरस की वजह से बस क्यू शेल्टर की टेंडर प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। बस शेल्टर के लिए पांचवीं बार मार्च के आखिर में टेंडर लगाना था, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन से इसे नहीं लगाया जा सका। करीब 4 माह बाद 8 अगस्त को इसका टेंडर लगाया गया है। अगर मार्च में टेंडर लगता और कंपनियां सामने आतीं तो अब तक चयनित कंपनी को काम भी अलॉट हो गया होता। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के आने के बाद नए सिरे से बस शेल्टर को बनाने की तैयारी की गई थी। कुल 497 में से 294 बस क्यू शेल्टर नए बनने हैं, जबकि 203 बस क्यू शेल्टर रेनोवेट होने हैं।
यह भी देखें- हमारे चैनल को सब्सक्राइब भी करें-
25000 था लक्ष्य.. सिर्फ 3500 स्मार्ट बिजली मीटर ही लगे
चंडीगढ़ बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू कर दिया है। पहले फेज में सेक्टर-31 और 47 में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अब तक इन सेक्टरों के रिहायशी इलाकों में 3500 स्मार्ट बिजली मीटर लगा दिए गए हैं, जबकि जून 2020 तक 25 हजार मीटर लगाने का लक्ष्य था।
कोरोना वायरस की वजह से इस काम में देरी हुई है। स्मार्ट मीटर के लगने के बाद बिजली चोरी, रीडिंग लेना, मीटर से छेड़छाड़ जैसी शिकायतें दूर हो जाएंगी। स्मार्ट मीटर की खासियत यह है कि इसे छेड़ना उपभोक्ता को महंगा पड़ेगा। किसी ने इनमें गड़बड़ करने की कोशिश की तो कंपनी के कंट्रोल रूम में पता चल जाएगा। शहर के करीब 2.20 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने की योजना है।
पीयू के हॉस्टल का निर्माण तीन महीने के लिए रुका रहा
पंजाब यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल नंबर 11 का निर्माण साल 2019 में शुरू हुआ था। दिसंबर 2019 तक ही पूरा होना था लेकिन अब तक नहीं हो पाया। दो मंजिला प्रोजेक्ट 20 करोड़ रुपये में तैयार होना था। पांच करोड़ की राशि मिल चुकी है लेकिन कोरोना की वजह से बाकी राशि लटक गई है। इससे कार्य में देरी हुई है। अब तक 50 फीसदी ही काम पूरा हो पाया। इस हॉस्टल के बनने से 200 छात्राओं को रहने की व्यवस्था होती। अब यह कार्य दिसंबर 2020 तक पूरा किए जाने का दावा किया जा रहा है।
शोध के लिए 50 करोड़ मिले, कोरोना की वजह से लटके
पीयू ने रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए पिछले साल नवंबर में 125 रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार किए थे। इस रिसर्च के जरिये पीयू को एक अलग पहचान मिलनी थी। इसकी तैयारी के लिए शिक्षक व स्टूडेंट काफी दिनों से मेहनत कर रहे थे। पीयू ने सभी प्रोजेक्ट बनाकर शिक्षा मंत्रालय व फंडिंग एजेंसियों को भेजे थे। सरकार से 50 करोड़ की मंजूरी भी मिल गई। यह रकम इसी साल जनवरी में मिलनी थी लेकिन कोरोना की वजह से नहीं मिल पाई। हालांकि, इंक्यूबेसन सेंटर बनाने के लिए पांच करोड़ मिले थे। इसका भी काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।
कोरोना न होता तो अब तक बन चुका होता ऑडिटोरियम
चंडीगढ़ का सबसे बड़ा ऑडिटोरियम भी पीयू के साउथ कैंपस में बन रहा है लेकिन कोरोना के कारण इस प्रोजेक्ट की रफ्तार भी थमी हुई है। लगभग 90 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे आडिटोरियम में एक साथ तीन हजार से ज्यादा लोग बैठ सकेंगे। इसका निर्माण कार्य तीन साल से चल रहा है। कंपनियां भी बीच में बदलीं। पीयू के मुताबिक कोरोना की वजह से तीन महीने तक काम बंद रहा। यदि कोरोना नहीं आता तो अब तक आडिटोरियम बनकर तैयार हो चुका होता। अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो गया है। फिटिंग व फीनिसिंग का काम बाकी है।
गांवों के विकास कार्य में खर्च होने थे 125 करोड़, सब ठप
कोरोना ने नगर निगम की हालत खराब कर दी है। निगम में शामिल 13 गांवों के विकास कार्यों के लिए 125 करोड़ की योजना बनाई थी। इसके तहत वहां पर सड़क निर्माण, सीवर की पाइप लाइन, पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन, बिजली के पोल लगाए जाने थे। कोरोना के बाद प्रशासन ने निगम को दिए जाने वाले बजट से ही 30 प्रतिशत की कटौती कर दी। ऐसे में गांव के विकास कार्यों का होना फिलहाल टल गया है।
पीजीआई के सभी ड्रीम प्रोजेक्ट की रफ्तार थमी
मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर
कोरोना की वजह से पीजीआई के सभी ड्रीम प्रोजेक्ट तय समय से छह महीने आगे खिसक गए हैं। पीजीआई के मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर का निर्माण कोविड 19 की वजह से कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ा लेकिन जुलाई में अब इसका निर्माण कार्य दोबारा से शुरू कर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 475 करोड़ खर्च होना है। यह काम साल 2023 तक पूरा होना था लेकिन कोरोना की वजह से अब यह काम 2023 के बाद पूरा होगा।
न्यूरो साइंस सेंटर का काम शुरू
300 बेड वाला न्यूरो साइंस सेंटर 10 लाख की आबादी की जरूरतों को पूरा करेगा। इसमें न्यूरोसर्जरी और न्यूरोलॉजी के मरीजों लिए अलग ओटी, आईसीयू और वार्डों की सुविधा होगी। इसका कार्य तो शुरू हो गया था लेकिन मार्च में सभी औपचारिकता पूरी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी लानी थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से यह कार्य पांच महीने देरी से शुरू हो रहा है। इसे साल 2022 तक तैयार करना था लेकिन अब इसमें भी देरी होगी।
ओपीडी में भीड़ कंट्रोल की सुविधा भी अधर में
पीजीआई की ओपीडी में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए वहां क्यू मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करना था। इस पर मंत्रालय की ओर से तो मंजूरी मिल चुकी थी लेकिन कुछ तकनीकी खामी आड़े आ रही थी। इस पर लगातार बातचीत चल रही थी लेकिन कोरोना की वजह से अब इस दिशा में कोई मीटिंग नहीं हो रही है। हालांकि, कोरोना के बाद से ओपीडी बंद चल रही है। इसके लिए करीब 20 करोड़ का बजट तैयार हुआ था।
पीजीआई के विस्तार पर ब्रेक
सारंगपुर में पीजीआई के विस्तार पर भी कोरोना का असर देखने को मिल रहा है। काफी मुश्किलों के बाद पीजीआई को सारंगपुर में जमीन मिली थी। उसकी रजिस्ट्री भी हो गई थी। उसके बाद पहले फेज का प्लान बनाकर आगे की कार्रवाई की जानी थी लेकिन अब फिलहाल पर इस पर रोक लग गई है।
मजदूरों के जाने से चार महीने तक बंद रहा फुटबाल स्टेडियम का काम
यूटी का खेल विभाग इंटरनेशनल स्तर का फुटबाल स्टेडियम तैयार कर रहा है। साल 2017 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इसका काफी हिस्सा तैयार हो चुका है लेकिन कोरोना की वजह से मजदूर अपने घर चले गए थे। इससे चार महीने तक काम ठप रहा। कुछ दिन पहले घास बनाने का काम शुरू हुआ है। इसके बनने के बाद चंडीगढ़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान मिलेगी। देश भर के बड़े क्लब यहां पर खेलने के लिए आएंगे। यहां पर बास्केटबॉल, साइक्लिंग, बैडमिंटन ट्रेनिंग और खेलने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
कोरोना की वजह से स्टेडियम का कार्य रुक गया था, लेकिन अब इसे दोबारा से शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि इंजीनियरिंग विभाग जल्द ही इसे पूरा कर खेल विभाग को सौंप देगा। -तेजदीप सिंह सैनी, निदेशक खेल विभाग चंडीगढ़
इंटरनेशनल लेवल के फुटबॉल स्टेडियम के तैयार होने का इंतजार कर रहा हूं। पिछले साल तक इसे बन जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक नहीं बन पाया। सिटी के फुटबाल खिलाड़ी इस स्टेडियम के जल्द से जल्द बनने का सपना देख रहे हैं। -विशाल शर्मा, ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडिलस्ट फुटबॉल टीम के सदस्य
कोविड के कारण हर जगह विकास कार्य प्रभावित हुआ है। पीजीआई भी इससे अछूता नहीं रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी मजदूरों की उपलब्धता के स्तर पर हुई, लेकिन इसे धीरे-धीरे दूर कर काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। कुछ निर्माण स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन करते हुए काम शुरू करवा दिया गया है। -डॉ. जगतराम, पीजीआई डायरेक्टर
पीजीआई की योजनाओं को अगर दरकिनार कर अगर इस समय कोविड से जुड़े प्रोजेक्ट पर ही गौर किया जाए कई तो वस्तुस्थिति साफ नजर आ रही है। कोरोना से बचाव संबंधित योजनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में पुरानी योजनाओं में तो विलंब होना तय ही है। विकास और बचाव के नाम पर सिर्फ झूठे दावे किए जा रहे हैं। -सुभाष चावला, पूर्व मेयर व ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य
शहर का कोई विकास कार्य नहीं रुकेगा। प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य कर रहे हैं। कोरोना के कारण कुछ बजट कम हुआ है। इससे कुछ अन्य विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। क्योंकि लोगों का स्वास्थ्य हमारे लिए प्राथमिकता है। -राजबाला मलिक, मेयर
निगम को ताला लगा देना चाहिए। जबसे भाजपा सत्ता में आई है, तब से ही फंड का रोना रोया गया है। आखिर अपने रेवेन्यू क्यों नहीं बढ़ा पा रहा है निगम। राजनीति से हटकर शहर के विकास की बात की होती तो यह नौबत नहीं आती। -देवेंद्र सिंह बबला, नेता प्रतिपक्ष
कोरोना की वजह से पानी, पार्किंग या अन्य माध्यमों से आने वाला रेवेन्यू काफी कम हुआ है। चूंकि प्रशासन से मिलने वाले बजट में भी कटौती हुई है, इसलिए थोड़ी समस्या होना स्वाभाविक है। फिर भी प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य कर रहे हैं। -केके यादव, निगम कमिश्नर
ऑडिटोरियम का निर्माण लगभग पूरा है। हॉस्टल का निर्माण चल रहा है, लेकिन केंद्र सरकार से पूरा बजट नहीं मिल पाया। इससे देरी हुई। साथ ही कोरोना के कारण भी बीच में निर्माण बाधित हुआ था। कोशिश है कि जल्द से जल्द निर्माण कर दिए जाए। -आरके राय, एक्सईएन, पीयू
पीयू में निर्माण अगर समय पर शुरू हों और समय पर ही पूरे हो जाएं तो करोड़ों रुपये पीयू बचा सकती है। क्योंकि जैसे ही निर्माण पूरे होने की तिथि आगे बढ़ती है, उसी के साथ लागत भी बढ़ जाती है। निर्माण सामग्री महंगी दिखाई जाती है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। - प्रो. मोहम्मद खालिद, पूर्व सीनेटर पीयू
कोरोना की वजह से इंजीनियरिंग विभाग के बड़े प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। जो भी पड़ा है, उससे लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। सभी प्रोजेक्ट्स पर काम चलता रहा। -सीबी ओझा, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर चंडीगढ़ प्रशासन
कोरोना की वजह से प्रशासन को वित्तीय घाटा हुआ है, बावजूद इसके प्रशासन की तरफ से कई ऐसे टेंडर लगाए जा रहे हैं, जोअभी बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। विभागों के बजट में कटौती की गई है, लेकिन फिजूलखर्ची को देखकर ऐसा लग नहीं रहा है। प्रशासन का वर्तमान में कोई भी प्रोजेक्ट नहीं चल रहा है। -आरके गर्ग, आरटीआई एक्टिविस्ट
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.