हरियाणा में बढ़ सकती लोगों की मुसीबतें, 05 सितंबर को डॉक्टर करेंगे हड़ताल, ओपीडी रहेगी बंद
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हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जसबीर परमार ने घोषणा की कि प्रदेश भर के 2500 डॉक्टर मांग पूरी न किए जाने के विरोध में पांच सितंबर को हड़ताल करेंगे। मरीजों की जरूरतों को देखते हुए सिर्फ आपातकालीन सेवाओं को बहाल रखा जाएगा। इसके बाद भी यदि सरकार की आंखें नहीं खुलती तो वह नौ सितंबर को फिर हड़ताल करेंगे।
इस दौरान प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर ओपीडी में न तो मरीज देखेंगे व न ही पोस्टमार्टम करेंगे। यदि फिर भी सरकार डॉक्टरों के हितों पर ध्यान नहीं देगी तो वह बैठक कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की घोषणा करेंगे। डॉ. जसबीर परमार ने बताया कि प्रदेश में पहले ही डॉक्टरों की कमी है और सरकार काम कर रहे डॉक्टरों की भी अनदेखी कर रही है।
सीएम के आश्वासन के एक माह बाद भी एसीएस हेल्थ के पास उनकी मांगों की फाइल अटकी है और कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इसके विरोध में गत शुक्रवार प्रदेश भर के 2500 डॉक्टरों ने सुबह आठ बजे से दस बजे तक दो घंटे के लिए पेन डाउन हड़ताल की थी। इस हड़ताल के बाद जब सरकार की आंखें नहीं खुली तो उन्होंने रविवार को निर्णय लिया है कि पांच सितंबर को एक दिवसीय हड़ताल होगी।
डॉक्टरों को मजबूरी में मास कैजुअल लीव पर जाने के अलावा अनिश्चितकालीन हड़ताल भी जाना पड़ सकता है। डॉ. परमार ने हैरानी जताते हुए बताया कि सीएम से मंजूरी मिलने के बाद भी डॉक्टरों की मांगों को नहीं माना जा रहा है, इससे बड़ी अव्यवस्था और क्या होगी। इसके चलते प्रदेश के डॉक्टर स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में 3250 की मंजूर सीटों पर महज 2500 डॉक्टर कार्य कर रहे हैं, जबकि जनसंख्या के हिसाब से प्रदेश में जरूरत पांच से छह हजार डॉक्टरों की है।
डॉक्टरों की मांग
- विशेषज्ञों को अतिरिक्त अलाउंस व इंक्रीमेंट
- दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड की तर्ज पर चार एसीपी। इसमें मांग 4, 9, 13 व 20 साल पर एसीपी का लाभ दिए जाने की है, जोकि अभी पांच, 10 व 15 साल पर मिल रही है।
फार्मासिस्ट 4 सितंबर को नारनौंद में करेंगे रोष मार्च
हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का संकट गहरा गया है। फार्मासिस्ट वर्ग की लंबी हड़ताल के कारण यह अव्यवस्था हुई है। फार्मासिस्ट प्रदेश में बेमियादी हड़ताल पर चल रहे हैं। 46 सौ ग्रेड पे पाने के लिए उन्होंने हड़ताल शुरू की है। हड़ताल खत्म कराने के लिए अभी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई पहल नहीं हुई है।
ग्रेड पे 42 सौ से बढ़ाकर 46 सौ करने की फाइल सीएम व स्वास्थ्य मंत्री के पास से होकर वित्त विभाग में पहुंच चुकी है। लेकिन, वित्त विभाग से मंजूरी नहीं मिल पा रही। जिसके चलते फार्मासिस्ट हड़ताल पर हैं। अब हड़ताली फार्मासिस्ट ने वित्त मंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र नारनौंद में शक्ति प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
चार सितंबर को पूरे प्रदेश के फार्मासिस्ट नारनौंद में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। एसोसिएशन गवर्नमेंट फार्मासिस्ट ऑफ हरियाणा के राज्य प्रधान विनोद दलाल ने कहा कि हड़ताली कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है। आंदोलन आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। अस्पतालों से मरीज बिना दवाई के लौट रहे हैं, बावजूद इसके फार्मासिस्ट की बात सुनने और उनकी फाइल क्लीयर करवाने के लिए सरकार का कोई प्रतिनिधि अभी तक आगे नहीं आया है।
इसे देखते हुए नारनौंद में रोष प्रदर्शन का फैसला किया है। अगर फिर भी सरकार नहीं चेती तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जिसकी रणनीति की घोषणा जल्दी करेंगे। दलाल ने बताया कि सोमवार को फार्मासिस्ट ने सभी जिलों में सरकार को सदबुद्धि देने और अन्याय के खिलाफ फार्मासिस्ट की आवाज सुनने के लिए हवन कर धरने की शुरुआत की। उनकी हड़ताल को दिल्ली और जम्मू कश्मीर के फार्मासिस्ट संगठनों ने भी समर्थन के लिए पत्र लिखा है। हरियाणा के अनेक कर्मचारी संगठन भी उनके समर्थन में आ चुके हैं।