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नहरों में पानी न छोड़ने पर भड़के, हाईवे जाम

Mon, 25 Aug 2014 01:01 AM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो, कैथ्ाल
अमर उजाला/ ब्यूरो, कैथ्ाल Updated Mon, 25 Aug 2014 01:01 AM IST
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Do not leave water in the canals raging people, highway jam
कलायत। पहले ही बरसात कम होने के कारण पानी के संकट से जूझ रहे किसानों ने प्रशासन द्वारा माइनरों में पानी न देने देने के विरोध में रविवार को कलायत के कैंची चौक पर जाम लगा दिया।
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इस कारण हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा तथा लोगों और वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने किसी तरह से किसानों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया।
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खंड चौक पर प्रदर्शन करने वाले जोरा, लीला, बलिंद्र, छज्जू राम चौशाला, सुनील खरक पांडवा, मनोज कुमार सहित अन्य ने कहा कि सुदकैन और कपिल मुनि माइनर में पानी दिया ही नहीं जा रहा है। इस कारण उनके खेत सूख गए हैं। सुनील का कहना था कि इन माइनरों पर पड़ने वाले गांव बालू, चौशाला, जुलानीखेड़ा, रामगढ़, खरक पांडवा, बडसीकरी, कलायत गांवों के किसान बर्बाद होने की कगार पर हैं। एक ओर तो बरसात नहीं हो रही, दूसरी ओर सीजन में नहरों में पानी को रोका जा रहा है। खड़ी धान की फसल बर्बाद हो रही है। किसानों ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर मंत्री सुरजेवाला को दोषी ठहराया। किसानों ने आरोप लगाया कि मंत्री के इशारे पर कलायत क्षेत्र का नहरी पानी कैथल क्षेत्र की नहर ही नहीं, बल्कि गुहणा ड्रेन तक छोड़ा जा रहा है।
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सुरेश, जोरा और महेंद्र का कहना था कि समस्या को लेकर वे गत शाम एससी से मिले थे। रायसूट के नाम पर उन लोगों से 40 से लेकर 50 हजार रुपये तक जमा करवा लिए गए, उसके बावजूद उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए एक ओर तो सरकार द्वारा बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं, दूसरी ओर उन्हें बर्बाद करने का षड़यंत्र रचा जा रहा है।
अभियंता के आश्वासन के बाद माने किसान
जाम के कारण सड़क पर दोनों और वाहनों की कतारें लग गई। जाम की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सुभाष के नेतृत्व में पुलिस मौके पर पहुंच गई व प्रदर्शनकारियों को समझा कर जाम खुलवाने की कोशिश की पर प्रदर्शनकारी सिंचाई विभाग के एससी के मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। कार्यकारी अभियंता केके भुक्कल मौके पर पहुंचे तथा प्रदर्शन करने वालों को पानी के प्रति आश्वस्त किया, जिसके पश्चात जाम खोल गया।

इन गांवों में परेशानी
काकौत हैड से निकलने वाली सुदकैन माइनर तारखा कोठी तक जाती है। इस माइनर पर हलका के गांव पिलनी से लेकर बडसीकरी तक आते हैं, जिनमें मुख्य रूप से किठाना, बालू, बडसीकरी, जुलानीखेड़ा तथा चौशाला का कुछ रकबा शामिल है। कपिल मुनि माइनर पर चौशाला, रामगढ़, खरक तथा कलायत का रकबा पड़ता है।


पानी की है भारी कमी : जेई
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता केके भुक्कल का कहना है कि बरसात न होने के कारण पीछे से पानी की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि यमुना का पानी बंद हो चुका है। पानी रोटेशन के हिसाब से दिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि बरसात न हुई तो उनको रोटेशन के हिसाब से ही माइनरों में पानी छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि 16 दिनों का रोटेशन बनता है, जिसके हिसाब से पानी दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों की मांग को विभाग के आला अधिकारियों तक पहुंचा दिया है तथा जो भी आदेश होंगे, उसके हिसाब से पानी किसानों का उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
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