कोविड का दुष्प्रभाव: तेजी से बढ़े तलाक और घरेलू हिंसा के मामले, 60 प्रतिशत पीड़िताओं को गुजारा भत्ते का इंतजार
पीयू समाजशास्त्र विभाग के प्रो. विनोद कुमार चौधरी का कहना है कि घर गृहस्थी टूटने का मुख्य कारण आर्थिक तंगी है। मौजूदा स्थिति में ये कारण कभी भी हावी हो सकता है। मूलभूत आवश्यकताएं तेजी से महंगी हो रही हैं।
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कोरोना काल में महामारी के चलते लोग अपनों से दूर हो रहे थे, वहीं दूसरी ओर वैवाहिक विवाद और घरेलू हिंसा के मामले भी तेजी से बढ़ रहे थे। इसकी पुष्टि चंडीगढ़ जिला अदालत में बड़ी संख्या में आई शिकायतों से की जा सकती है। महामारी के दौर में जिला अदालत में पारिवारिक विवादों और घरेलू हिंसा के लगभग 885 मामले सामने आए हैं। कोरोना काल के बाद कोर्ट खुलने पर सुनवाई शुरू हुई है जिनमें लगभग 15 से 20 प्रतिशत मामलों में निराकरण मिल चुका है। इन मामलों में ज्यादातर में पत्नी ने गुजारा भत्ते का आवेदन किया है लेकिन स्थिति यह है कि भत्ता लेने के लिए उसे महीनों से कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं जिन मामलों में भत्ता मिलना शुरू भी हुआ है उसमें भी कोई न कोई कानूनी बाधा सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार करीब 60 प्रतिशत महिलाओं को गुजारा भत्ते का इंतजार है।
केस-1
सेक्टर-25 निवासी सुनीता (परिवर्तित नाम) के पति राकेश (परिवर्तित नाम) एक निजी कंपनी में काम करते थे। कोरोना काल में आर्थिक तंगी के चलते दोनों के बीच लड़ाई-झगड़े बढ़ने लगे। मामला फैमिली कोर्ट तक पहुंच गया। सुनीता ने गुजारा भत्ता की मांग की। भत्ता मिलना शुरू हो चुका है लेकिन उसे यह भत्ता नियमित नहीं मिल पा रहा है।
केस-2
धनास निवासी सरला (परिवर्तित नाम) की शादी कोविड से कुछ महीने पहले हुई थी। पहली लहर के शुरुआती दौर में कुछ महीनों तक स्थिति ठीक रही लेकिन फिर आर्थिक तंगी के कारण दोनों में मनमुटाव शुरू होने लगा। स्थिति तलाक तक पहुंच गई है। मामला गुजारा भत्ता के लिए विचाराधीन है।
तेजी से बढ़ रहे तलाक के मामले
जिला अदालत की महिला अधिवक्ता गीतांजली ने बताया कि कोविड के बाद से तलाक के मामलों में काफी तेजी आई है। अगर चार से पांच साल पीछे की स्थिति पर गौर किया जाए तो ये संख्या आधे से भी कम थी। गीतांजली का कहना है कि तलाक के बढ़ते मामलों के पीछे की मुख्य वजह आर्थिक तंगी और तनाव का बढ़ता स्तर है। गीतांजली ने बताया कि तलाक के मामलों में वे सबसे पहले दंपति को सुलह कर एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की सलाह देती हैं लेकिन ऐसे मामले बहुत कम ही होते हैं जिसमें सुलह समझौता हो पाए।इन कारणों से बिखर रहे पति-पत्नी के रिश्ते
पीयू समाजशास्त्र विभाग के प्रो. विनोद कुमार चौधरी का कहना है कि घर गृहस्थी टूटने का मुख्य कारण आर्थिक तंगी है। मौजूदा स्थिति में ये कारण कभी भी हावी हो सकता है। मूलभूत आवश्यकताएं तेजी से महंगी हो रही हैं। वेतन सीमित है जबकि जरूरतें बढ़ती जा रही हैं। ईएमआई और लोन की आदत भी बढ़ रही है। पैसे कम होने पर तनाव बढ़ रहा है। बढ़ता तनाव तलाक के मामलों में इजाफा कर रहा है। इससे नए रिश्ते बनाने की चाह भी बढ़ रही है। ये चाह चीर स्थायी होने की बजाय क्षणिक हो रहे हैं। यही कारण है कि लीव इन रिलेशन का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। इस स्थिति में वे कभी भी अपना पार्टनर बदल सकते हैं वहीं सामाजिक और आर्थिक दबाव से भी बच रहे हैं। महिलाएं बराबरी का दावा करने के लिए घर और बाहर के अतिरिक्त दबाव में फंस रही हैं। पारंपरिक पारिवारिक बनावट तेजी से समाप्त हो रहा है। ये सारी वजहें रिश्तों को स्थायीपन नहीं दे पा रही हैं। इस कारण विलंब विवाह के मामले भी बढ़ रहे हैं।रिश्तों को संजोने के लिए ऐसा करें
- परिवार के साथ बैठे होने पर इंटरनेट के माध्यमों का प्रयोग कम से कम करें
- आपसी संवाद को लगातार मजबूत करें
- एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें
- बच्चों को अतिरिक्त समय दें
- लोन और कर्ज चुकाने के लिए आपसी बातचीत की मदद से रास्ता निकालें
- खर्चों पर काबू करें, भौतिक सुख सुविधाओं की बजाय रिश्तों के साथ जीवन जीएं
- कम खर्चे वाले प्राकृतिक जगहों की आउटिंग को प्रधानता दें
गुजारा भत्ता रुकवाने के लिए चलते हैं खूब दांवपेंच
फैमिली कोर्ट के वकीलों के अनुसार गुजारा भत्ता वाले मामलों में सामान्य तौर पर दूसरा पक्ष यह प्रयास करता है कि कोई न कोई कानूनी दाव पेंच लगवाकर उसे रुकवाया जाए। ऐसी स्थिति में अगर भत्ते का भुगतान शुरू भी हो जताए तो वे नियमित नहीं रह पाता, जिसके कारण पीड़िता को परेशानी झेलनी पड़ती है। हालांकि गलत दस्तावेज पेश कर भत्ता रुकवाने की पुष्टि होने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है।युवा पीढ़ी को एक-दूसरे की सोच और भावनाओं के सम्मान की भावना को अपनी आदत में शामिल करना होगा। संयुक्त परिवार का विलय ऐसे मामलों को और हवा देने का काम कर रहा है। ऐसे मामलों में सुलह समझौते के लिए ही मेडिएशन सेंटर का संचालन किया जा रहा है। -नवदीप कौर, संयुक्त सचिव, जिला बार एसोसिएशन चंडीगढ़