सीधा संवाद: चंडीगढ़ में विशेषज्ञ बोले-जब खुद अफसर और नेता सरकारी अस्पतालों में इलाज कराएंगे, तभी बढ़ेगा लोगों का भरोसा
दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन चंडीगढ़ की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किया गया। इसमें अधिकारियों और विशेषज्ञों में सीधा संवाद हुआ। शहर के अस्पतालों पर बढ़ते दबाव का मुद्दा भी उठा। मौके पर वित्त सचिव और डीसी समेत कई अफसरों ने अपने सुझाव दिए। कहा गया कि दूसरे राज्यों की मरीजों की वजह से चंडीगढ़ के अस्पताल दबाव में हैं।
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स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे पर मंगलवार को होटल माउंट व्यू में दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन प्रशासन के अधिकारियों, विशेषज्ञों और लोगों के बीच सीधा संवाद हुआ। प्रशासन के अधिकारियों ने अपनी पीठ थपथपाई, तो विशेषज्ञों ने उन्हें कई ऐसे मुद्दों के बारे में बताया, जिसमें प्रशासन पिछड़ रहा है। विशेषज्ञों ने कहा कि सरकारी अस्पतालों पर भरोसा तभी बढ़ेगा, जब आईएएस अफसर, नेता और शहर के नामी लोग वहां इलाज कराएंगे। ग्रुप चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा कि चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का आधार बहुत मजबूत है, क्योंकि यहां कई अस्पताल व स्वास्थ्य संस्थाएं हैं, लेकिन यही मजबूती शहर की कमजोरी बन गई है।
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पड़ोसी राज्यों के लोग इन्हीं सुविधाओं से आकर्षित होकर चंडीगढ़ में इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में भी बेहतर अस्पताल बनाने होंगे, ताकि सारा बोझ चंडीगढ़ के अस्पतालों पर न पड़े। कोविड के दौरान शहर के अस्पतालों में चंडीगढ़ से ज्यादा पड़ोसी राज्यों के मरीज भर्ती थे। चर्चा में शामिल एक सदस्य ने कहा कि कोई व्यक्ति बीमार होता है, तो पूरा परिवार इलाज पर होने वाले खर्चे को लेकर चिंतित हो जाता है।
अस्पतालों के बर्ताव से लोगों के मन में काफी डर बैठ गया है। लोगों के अंदर ये आत्मविश्वास पैदा करना होगा कि अगर उन्हें कुछ होता है, तो सरकारी अस्पताल उनके बेहतर इलाज के लिए तैयार हैं। पीजीआई के पूर्व निदेशक केके तलवार ने कहा कि चंडीगढ़ अंग प्रत्यारोपण के मामले में पिछड़ रहा है। उन्होंने भविष्य के हेल्थ टूरिज्म पर प्रशासन को कई सुझाव दिए। बता दें कि इन सभी सुझावों के आधार पर प्रशासन एक विजन डॉक्यूमेंट बनाएगा और फिर उसे लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
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लिंग अनुपात पर डॉ. अमिताभ कुंडू ने उठाया सवाल
सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की साक्षरता दर 86.77 प्रतिशत है। ये पढ़े-लिखे लोगों का शहर है। इसके बावजूद शहर लिंग अनुपात के मामले में काफी पिछड़ रहा है। इस मुद्दे पर विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली में विशिष्ट फेलो डॉ. अमिताभ कुंडू ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है। सीएचडी ग्रुप के संस्थापक और सीईओ डॉ. एडमंड फर्नांडीस ने एक कहानी के माध्यम से अधिकारियों को समझाया कि पॉलिसी बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर साल करीब 865 एमडी पास होकर निकलते हैं, लेकिन वे कहां जाते हैं। उनकी पढ़ाई व ज्ञान का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग वॉलंटियर के तौर पर सरकार की मदद करना चाहते हैं। प्रशासन को आवेदन पत्र जारी करना चाहिए, ताकि उन्हें पता तो लगे कि कितने लोग मदद को तैयार हैं।
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वित्त सचिव बोले-तो क्या पीपीपी मोड पर बना सकते हैं अस्पताल?
स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे पर चर्चा के दौरान वित्त सचिव डॉ. विजय नामदेव राव जड़े ने कहा कि शहर में जमीन बहुत महंगी है। ऐसे में क्या पीपीपी मोड पर अस्पताल बनाना चाहिए। इसके अलावा मरीजों के साथ आने वाले लोगों के लिए भी पीपीपी मोड पर ही व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। हालांकि डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने कहा कि डिस्पेंसरियों को मजबूत करना होगा। नए अस्पताल बनाने के बजाय डिस्पेंसरियों में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को एडवांस ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, ताकि ज्यादातर मरीजों का वहीं इलाज हो सके।