{"_id":"582ca3194f1c1b57368ffc2e","slug":"dig-cheema-transfer-in-order-to-challenge-the-cat","type":"story","status":"publish","title_hn":"DIG चीमा ने ट्रांसफर ऑर्डर को कैट में दी चुनौती, प्रशासन को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
DIG चीमा ने ट्रांसफर ऑर्डर को कैट में दी चुनौती, प्रशासन को नोटिस
अमरीश शर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 17 Nov 2016 01:17 AM IST
विज्ञापन
डीआईजी एएस चीमा
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूटी पुलिस के डीआईजी एएस चीमा ने गृह मंत्रालय द्वारा दिल्ली ट्रांसफर करने के आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में चुनौती दी है। कैट ने डीआईजी की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्थानीय प्रशासन और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।
एजीएमयूटी-2000 बैच के आईपीएस अफसर एएस चीमा (59) ने ट्रिब्यूनल से प्रशासन के इस आदेश को मनमाना और अनुचित करार देते हुए ट्रांसफर आदेश को रद्द करने की अपील की है। साथ ही चीमा ने ट्रिब्यूनल से अंतरित राहत की मांग करते हुए याचिका के लंबित रहने तक अपने ट्रांसफर पर स्टे लगाने की अपील की है।
चीमा ने अपनी याचिका में भारत सरकार, प्रशासक के सलाहकार, गृह सचिव, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) को प्रतिवादी बनाया है। इसमें उनका कहना है कि अगले साल मई में उनकी रिटायरमेंट है। ऐसे में उन्हें यहीं पोस्टिंग दी जाए। उनका कहना है कि ज्वाइंट एजीएमयूटी कैडर-2010 के तहत आईएएस/आईपीएस आफिसर्स के ट्रांसफर के लिए जारी गाइडलाइन के अनुसार जिन अफसरों की अगले दो साल में रिटायरमेंट हो उन्हें ऐसी जगह पोस्टिंग नहीं दी जा सकती है।
विज्ञापन
चीमा का कहना है कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन से अनुमति के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में दो साल के एलएलएम कोर्स (इवनिंग) में एडमिशन लिया था। इसके लिए उन्होंने 80 हजार रुपये पहले सेमेस्टर की फीस भी दी। उनके अनुसार 2014 में भारत सरकार ने उनके पारिवारिक हालात पर चंडीगढ़ ट्रांसफर करने अनुरोध पर ही उन्हें यहां पोस्टिंग दी थी। चीमा ने अपने ससुराल पक्ष से किसी की तबीयत खराब होने पर उनके देखभाल के लिए ही ट्रांसफर मांगा था।
हालांकि उन्होंने याचिका में कहा है कि उनके ससुर की नवंबर 2015 में मृत्यु हो चुकी है। वहीं उनकी सास जो कि 80 वर्ष की हैं और कई बीमारियों से ग्रस्त हैं, उन्हें देखभाल की सख्त जरूरत है। चीमा के अनुसार आईजीपी ने उन्हें 8 नवंबर को रिलीव कर दिया था। इसके बावजूद वह अब तक इस पद पर बने हुए हैं। यूटी प्रशासन के नोडल आफिसर अरविंद मोदगिल ने ट्रिब्यूनल को अवगत कराया कि गृह मंत्रालय पहले ही डीआईजी का अतिरिक्त चार्ज आईजी को सौंप चुका है।
विज्ञापन
एजीएमयूटी-2000 बैच के आईपीएस अफसर एएस चीमा (59) ने ट्रिब्यूनल से प्रशासन के इस आदेश को मनमाना और अनुचित करार देते हुए ट्रांसफर आदेश को रद्द करने की अपील की है। साथ ही चीमा ने ट्रिब्यूनल से अंतरित राहत की मांग करते हुए याचिका के लंबित रहने तक अपने ट्रांसफर पर स्टे लगाने की अपील की है।
विज्ञापन
चीमा ने अपनी याचिका में भारत सरकार, प्रशासक के सलाहकार, गृह सचिव, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) को प्रतिवादी बनाया है। इसमें उनका कहना है कि अगले साल मई में उनकी रिटायरमेंट है। ऐसे में उन्हें यहीं पोस्टिंग दी जाए। उनका कहना है कि ज्वाइंट एजीएमयूटी कैडर-2010 के तहत आईएएस/आईपीएस आफिसर्स के ट्रांसफर के लिए जारी गाइडलाइन के अनुसार जिन अफसरों की अगले दो साल में रिटायरमेंट हो उन्हें ऐसी जगह पोस्टिंग नहीं दी जा सकती है।
विज्ञापन
चीमा का कहना है कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन से अनुमति के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में दो साल के एलएलएम कोर्स (इवनिंग) में एडमिशन लिया था। इसके लिए उन्होंने 80 हजार रुपये पहले सेमेस्टर की फीस भी दी। उनके अनुसार 2014 में भारत सरकार ने उनके पारिवारिक हालात पर चंडीगढ़ ट्रांसफर करने अनुरोध पर ही उन्हें यहां पोस्टिंग दी थी। चीमा ने अपने ससुराल पक्ष से किसी की तबीयत खराब होने पर उनके देखभाल के लिए ही ट्रांसफर मांगा था।
हालांकि उन्होंने याचिका में कहा है कि उनके ससुर की नवंबर 2015 में मृत्यु हो चुकी है। वहीं उनकी सास जो कि 80 वर्ष की हैं और कई बीमारियों से ग्रस्त हैं, उन्हें देखभाल की सख्त जरूरत है। चीमा के अनुसार आईजीपी ने उन्हें 8 नवंबर को रिलीव कर दिया था। इसके बावजूद वह अब तक इस पद पर बने हुए हैं। यूटी प्रशासन के नोडल आफिसर अरविंद मोदगिल ने ट्रिब्यूनल को अवगत कराया कि गृह मंत्रालय पहले ही डीआईजी का अतिरिक्त चार्ज आईजी को सौंप चुका है।