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Chandigarh News: धनखड़ एलुमिनाई से बोले- बहुत अधिक फंड नहीं...चोंच का पानी, पूंछ की आग बुझाने जितना चाहिए
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चंडीगढ़। अब समय आ गया है कि पूर्व छात्र अपने प्रतिष्ठित संस्थान के प्रति योगदान देने का कठोर संकल्प लें। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एलुमिनाई द्वारा 2024 में दिए 53 बिलियन एनडोमेंट फंड 120 देशों के जीडीपी से अधिक है। एंडोमेंट फंड संस्थान और पूर्व छात्रों के बीच घनिष्ठ संबंध विकसित कर रहा है। कॉर्पोरेट से वह बहुत अधिक फंड की मांग नहीं कर रहे हैं बस चोंच का पानी पूंछ की आग बुझाने में प्रयोग करने जितना कर रहे हैं। यह बात उपराष्ट्रपति एवं पीयू चांसलर जगदीप धनखड़ ने पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित पांचवीं ग्लोबल एलुमिनाई मीट के दौरान शनिवार को कही। ग्लोबल एलुमिनाई मीट में देश-विदेश से कई पूर्व छात्र पहुंचे थे।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने समारोह की अध्यक्षता की और पूर्व छात्रों से अपने संस्थान के विकास के प्रति योगदान की अपील करते हुए विश्वविद्यालय के साथ संबंध मजबूत करने के लिए कहा। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत समारोह में मुख्य अतिथि रहे। लॉ सभागार में आयोजित समारोह में मंच पर उपराष्ट्रपति धनखड़, उनकी पत्नी सुदेश धनखड़, कुलपति प्रो. रेनु विग समेत उत्तराखंड, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड के राज्यपाल रहे डॉ. केके पॉल, पद्म भूषण वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के पूर्व निदेशक अतुल करवाल उपस्थित रहे।
बोले- देश को विकसित बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों का रोल अहम
धनखड़ ने पूर्व छात्रों से उनके संसाधनों का पूर्ण प्रयोग करने पर प्रश्न किया और कहा कि देश आजादी के 100 साल पूरे होने में आखिरी क्वार्टर में प्रवेश कर चुका है। उपराष्ट्रपति ने आचार्य देवव्रत की सुनाई चिड़िया के चोंच में पानी लेकर आग बुझाने के दृढ़ संकल्प को लेकर बात कही। देश को विकसित बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों का रोल अहम बताया और इसके लिए पूर्व छात्रों को अपना ज्ञान या वित्तीय सहायता से मदद करने की अपील की।
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने समारोह की अध्यक्षता की और पूर्व छात्रों से अपने संस्थान के विकास के प्रति योगदान की अपील करते हुए विश्वविद्यालय के साथ संबंध मजबूत करने के लिए कहा। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत समारोह में मुख्य अतिथि रहे। लॉ सभागार में आयोजित समारोह में मंच पर उपराष्ट्रपति धनखड़, उनकी पत्नी सुदेश धनखड़, कुलपति प्रो. रेनु विग समेत उत्तराखंड, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड के राज्यपाल रहे डॉ. केके पॉल, पद्म भूषण वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के पूर्व निदेशक अतुल करवाल उपस्थित रहे।
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बोले- देश को विकसित बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों का रोल अहम
धनखड़ ने पूर्व छात्रों से उनके संसाधनों का पूर्ण प्रयोग करने पर प्रश्न किया और कहा कि देश आजादी के 100 साल पूरे होने में आखिरी क्वार्टर में प्रवेश कर चुका है। उपराष्ट्रपति ने आचार्य देवव्रत की सुनाई चिड़िया के चोंच में पानी लेकर आग बुझाने के दृढ़ संकल्प को लेकर बात कही। देश को विकसित बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों का रोल अहम बताया और इसके लिए पूर्व छात्रों को अपना ज्ञान या वित्तीय सहायता से मदद करने की अपील की।
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