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Haryana: पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे मुरथल के ढाबे व रेस्तरां होंगे बंद, एनजीटी ने जारी किए निर्देश

Sat, 20 Aug 2022 10:58 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 20 Aug 2022 10:58 PM IST
सार

एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस सेवानिवृत्त एके गोयल की पीठ ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। गोयल ने कहा कि सोनीपत जिले के जीटी रोड पर मुरथल में रेस्तरां सहित विभिन्न प्रतिष्ठान अवैध रूप से डंपिंग और कचरा जलाकर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं।

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Dhabas, restaurants and food shops located on GT Road in Murthal harming environment  will be closed
एनजीटी - फोटो : NGT

विस्तार

पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे मुरथल में जीटी रोड पर स्थित ढाबे, रेस्तरां और खाने-पीने की दुकानें बंद होंगी। उनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा। दूषित पानी, कचरे और बची हुई खाद्य सामग्री का सही तरीके से निस्तारण न करने पर यह गाज गिरेगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले ढाबों, रेस्तरां व अन्य भोजनालयों को बंद कराने के निर्देश दिए हैं। 

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ट्रिब्यूनल ने कहा है कि एक माह के अंदर पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाएं। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस सेवानिवृत्त एके गोयल की पीठ ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। गोयल ने हरियाणा निवासी अभय दहिया और अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि सोनीपत जिले के जीटी रोड पर मुरथल में रेस्तरां सहित विभिन्न प्रतिष्ठान अवैध रूप से डंपिंग और कचरा जलाकर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। ढाबे, भोजनालय और रेस्तरां तरल और ठोस कचरा प्रबंधन के लिए कुछ नहीं कर रहे। इस मामले में अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे पर्यावरण को लगातार नुकसान हो रहा है। मुख्य सचिव को आदेश देते हुए पीठ ने कहा कि बड़े पैमाने पर उल्लंघनों को देखते हुए अब इन इकाइयों को बंद किया जाए, साथ ही पिछले उल्लंघनों के चलते उनसे जुर्माने की वसूली भी की जाए। इस मामले में मुख्य सचिव समयबद्ध कार्रवाई करने के लिए जिम्मेदारी तय करें।

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ये भी दिए निर्देश

  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखे।
  • अलग-अलग संस्थाओं के लिए या संयुक्त रूप से एक से अधिक संस्थाएं सीवेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र लगाएं
  • संयत्र लगाने के लिए ढाबा संचालक राजी होते हैं तो ही इकाइयों को संचालन के लिए आवश्यक सहमति (सीटीओ) प्रदान करें

 

सॉरी स्टेट ऑफ अफेयर की टिप्पणी की 

पीठ ने कहा कि पहले भी अधिकारियों को भोजनालयों से उत्पन्न कचरे के प्रबंधन के लिए ठोस अपशिष्ट उपचार संयंत्र की स्थापना करने का निर्देश दिया था। उस समय राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिपोर्ट पेश कर कहा था कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना 31 दिसंबर, 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हो पाया। रिपोर्ट सॉरी स्टेट ऑफ अफेयर्स जैसे हालात दिखाती है। जो इकाइयां 10 केएलडी (प्रति दिन किलो लीटर) से कम उत्सर्जन कर रही हैं, उन्हें कहीं और परिवहन से बचने के लिए मॉड्यूलर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित करने चाहिए। 

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