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Chandigarh News: चेकिंग टीमें बनीं, फिर भी चार सेक्टरों में गंदे पानी की सप्लाई
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चंडीगढ़। नगर निगम ने पानी की गुणवत्ता पर निगरानी के लिए क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) और विशेष चेकिंग टीमें तो गठित कर दीं लेकिन शहर के कई इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई अब भी नहीं थम रही। सेक्टर-39 डी, 40-डी, 45-ए और 32-सी के निवासी पिछले कई दिनों से मिट्टी मिला पानी मिलने की शिकायत कर रहे हैं। बरसात के मौसम में जलजनित (वाटर बोर्न) बीमारियों के खतरे को देखते हुए लोग पीने के लिए बाजार से बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
सेक्टर-39 डी और 40-डी में गर्मियों के दौरान लो प्रेशर की समस्या भी लगातार बनी रही थी। अब बारिश के बीच पानी में मिट्टी मिलने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। सेक्टर-39 डी, 40-डी, 45-ए और 32-सी के निवासी गुरप्रीत सिंह, विवेक, अनिल कुमार और रामपाल का कहना है कि नगर निगम को संबंधित क्षेत्रों की पाइपलाइन की तत्काल जांच करानी चाहिए। घरों से पानी के नमूने लेकर परीक्षण कराया जाए और यदि कहीं पाइपलाइन लीकेज है तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाए।
लोगों का कहना है कि निगम केवल शिकायत दर्ज कर औपचारिकता पूरी करता है जबकि असली कारण तलाशने और उसे दूर करने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। उनका कहना है कि बरसात में दूषित पानी की सप्लाई बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
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लो प्रेशर और गंदे पानी के पीछे कई कारण
नगर निगम के इंजीनियरिंग सूत्रों के अनुसार जिन क्षेत्रों में बूस्टर पंप से पानी की सप्लाई होती है, वहां समस्या के कई कारण हो सकते हैं। बूस्टर पंपों के अंडरग्राउंड रिजर्वायर (यूजीआर) तक पर्याप्त नहरी पानी नहीं पहुंचने से ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ जाती है। ट्यूबवेल लाइन में लीकेज, यूजीआर की समय पर सफाई न होना या वितरण पाइपलाइन में रिसाव के कारण मिट्टी मिला पानी सप्लाई हो सकता है। सेक्टर-39, 40, 45, 32 और 21 के बूस्टर पंपों पर गर्मियों में कम पानी मिलने से लो प्रेशर की शिकायतें भी सामने आई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में पानी की कमी नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की खामियां समस्या की जड़ हैं।
टीमें बनीं, असर नहीं दिखा
एक सप्ताह पहले ही नगर निगम के चीफ इंजीनियर ने पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए क्विक रिस्पांस टीम गठित करने और नियमित जांच के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद इन सेक्टरों में गंदे पानी की शिकायतें जारी हैं, जिससे निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारी बोले
संबंधित क्षेत्रों की पानी सप्लाई लाइन और पानी के नमूनों की विशेष जांच कराई जाएगी। वीवीआईपी दौरे के कारण स्टाफ व्यस्त था, लेकिन अब सेक्टर-39, 40, 45 और 32 सहित सभी शिकायत वाले क्षेत्रों में कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान किया जाएगा। जहां भी लीकेज या तकनीकी खामी मिलेगी, उसे प्राथमिकता से दुरुस्त कराया जाएगा। -संजय अरोड़ा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
सेक्टर-39 डी और 40-डी में गर्मियों के दौरान लो प्रेशर की समस्या भी लगातार बनी रही थी। अब बारिश के बीच पानी में मिट्टी मिलने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। सेक्टर-39 डी, 40-डी, 45-ए और 32-सी के निवासी गुरप्रीत सिंह, विवेक, अनिल कुमार और रामपाल का कहना है कि नगर निगम को संबंधित क्षेत्रों की पाइपलाइन की तत्काल जांच करानी चाहिए। घरों से पानी के नमूने लेकर परीक्षण कराया जाए और यदि कहीं पाइपलाइन लीकेज है तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाए।
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लोगों का कहना है कि निगम केवल शिकायत दर्ज कर औपचारिकता पूरी करता है जबकि असली कारण तलाशने और उसे दूर करने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। उनका कहना है कि बरसात में दूषित पानी की सप्लाई बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
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लो प्रेशर और गंदे पानी के पीछे कई कारण
नगर निगम के इंजीनियरिंग सूत्रों के अनुसार जिन क्षेत्रों में बूस्टर पंप से पानी की सप्लाई होती है, वहां समस्या के कई कारण हो सकते हैं। बूस्टर पंपों के अंडरग्राउंड रिजर्वायर (यूजीआर) तक पर्याप्त नहरी पानी नहीं पहुंचने से ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ जाती है। ट्यूबवेल लाइन में लीकेज, यूजीआर की समय पर सफाई न होना या वितरण पाइपलाइन में रिसाव के कारण मिट्टी मिला पानी सप्लाई हो सकता है। सेक्टर-39, 40, 45, 32 और 21 के बूस्टर पंपों पर गर्मियों में कम पानी मिलने से लो प्रेशर की शिकायतें भी सामने आई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में पानी की कमी नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की खामियां समस्या की जड़ हैं।
टीमें बनीं, असर नहीं दिखा
एक सप्ताह पहले ही नगर निगम के चीफ इंजीनियर ने पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए क्विक रिस्पांस टीम गठित करने और नियमित जांच के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद इन सेक्टरों में गंदे पानी की शिकायतें जारी हैं, जिससे निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारी बोले
संबंधित क्षेत्रों की पानी सप्लाई लाइन और पानी के नमूनों की विशेष जांच कराई जाएगी। वीवीआईपी दौरे के कारण स्टाफ व्यस्त था, लेकिन अब सेक्टर-39, 40, 45 और 32 सहित सभी शिकायत वाले क्षेत्रों में कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान किया जाएगा। जहां भी लीकेज या तकनीकी खामी मिलेगी, उसे प्राथमिकता से दुरुस्त कराया जाएगा। -संजय अरोड़ा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम