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जलियांवाला बाग शहीद के आश्रित ने मांगा मुआवजा, हाईकोर्ट में डाली याचिका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 02 Jul 2017 10:09 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग हत्याकांड में मारे गए ईशर सिंह के पोते मोहन सिंह ने मुआवजे के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। याचिकाकर्ता स्वतंत्रता सेनानी हैं और उनको स्वतंत्रता सेनानी पेंशन भी मिलती है।
मोहन सिंह ने याचिका दाखिल कर कहा है कि 13 अप्रैल 1919 को उनके दादा और गांव के कुछ अन्य लोग जलियांवाला बाग पहुंचे थे। इसी बीच अंग्रेजों ने यहां मौजूद लोगों पर गोलियां चला दीं। यह नरसंहार जलियांवाला बाग हत्याकांड नाम से जाना जाता है। इसमें याची के दादा ईशर सिंह भी मारे गए थे। याची ने कहा कि सरकार कई कल्याण योजनाएं तैयार कर रही है लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। पीड़ितों के आश्रित पिछले 98 साल से मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। याची ने कहा है कि वे स्वयं स्वतंत्रता सेनानी हैं और 1942-43 के दौरान अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लाहौर जेल में रहे थे।
प्रमाण न होने पर सरकार ने बंद कर दी थी पेंशन
पंजाब सरकार की ओर से जेल में होने का कोई प्रमाण नहीं होने पर उनकी पेंशन बंद कर दी गई थी। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने उनकी पेंशन जारी करने के आदेश दिए थे। अब याची ने अपने दादा की जलियांवाला बाग में हुई हत्या के लिए हाईकोर्ट से मुआवजे की गुहार लगाई है। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी।
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मोहन सिंह ने याचिका दाखिल कर कहा है कि 13 अप्रैल 1919 को उनके दादा और गांव के कुछ अन्य लोग जलियांवाला बाग पहुंचे थे। इसी बीच अंग्रेजों ने यहां मौजूद लोगों पर गोलियां चला दीं। यह नरसंहार जलियांवाला बाग हत्याकांड नाम से जाना जाता है। इसमें याची के दादा ईशर सिंह भी मारे गए थे। याची ने कहा कि सरकार कई कल्याण योजनाएं तैयार कर रही है लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। पीड़ितों के आश्रित पिछले 98 साल से मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। याची ने कहा है कि वे स्वयं स्वतंत्रता सेनानी हैं और 1942-43 के दौरान अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लाहौर जेल में रहे थे।
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प्रमाण न होने पर सरकार ने बंद कर दी थी पेंशन
पंजाब सरकार की ओर से जेल में होने का कोई प्रमाण नहीं होने पर उनकी पेंशन बंद कर दी गई थी। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने उनकी पेंशन जारी करने के आदेश दिए थे। अब याची ने अपने दादा की जलियांवाला बाग में हुई हत्या के लिए हाईकोर्ट से मुआवजे की गुहार लगाई है। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी।
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