हिंदी दिवस 2022: आजादी का अमृत महोत्सव मनाया फिर भी चंडीगढ़ में हिंदी-पंजाबी पर भारी है अंग्रेजी
आम बोलचाल में चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद किसी भी नीति को लागू करने से पहले प्रशासन शहरवासियों से सुझाव मांगता है तो उसके ड्राफ्ट को अंग्रेजी में ही जारी किया जाता है। इसकी वजह से शहर का एक बड़ा वर्ग नीति को समझ पाने में असमर्थ हो जाता है।
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देश की आजादी के 75 साल बीत चुके हैं। चंडीगढ़ के गठन को भी 56 साल हो गए हैं लेकिन यहां आज भी अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी पर भारी है। शहर के सभी साइन बोर्ड, कार्यालयों के नाम सबसे पहले अंग्रेजी फिर हिंदी और उसके बाद पंजाबी में लिखे हैं। वहीं नियम कहते हैं कि सबसे ऊपर क्षेत्रीय भाषा, उसके बाद हिंदी और फिर अंग्रेजी का इस्तेमाल होना चाहिए।
सवाल यह उठ रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद चंडीगढ़ केंद्र के ही आदेश का पालन क्यों नहीं कर रहा है। वो भी तब जब चंडीगढ़ की 95 फीसदी आबादी हिंदी और पंजाबी बोलती है फिर भी अंग्रेजी इन दोनों भाषाओं पर भारी क्यों है। सेक्टर-46 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज के सहायक प्रोफेसर पंडित राव धरेनवर ने इसके खिलाफ एक मुहिम भी छेड़ी है।
मंगलवार को वह शहर के कई साइन बोर्ड व सरकारी कार्यालयों के पास गए। उन्होंने सिर पर एक बैनर उठा रखा था, जिस पर लिखा था कि हिंदी और पंजाबी को अंग्रेजी से नीचे क्यों लिखा गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत चंडीगढ़ में किसी भी साइन बोर्ड पर सबसे पहले पंजाबी फिर हिंदी और उसके बाद अंग्रेजी में लिखा होना चाहिए लेकिन चंडीगढ़ में ठीक इसका उल्टा हो रहा है। इस संबंध में उन्होंने करीब एक महीना पहले गृह सचिव नितिन कुमार यादव को पत्र भी लिखा था और साइन बोर्डों को नियमों के तहत बदलने का आग्रह किया था।
कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने मंगलवार को विरोध करने का यह तरीका अपनाया। बता दें कि पांच अप्रैल 2022 को राज्यसभा में तत्कालीन सभापति एम वेंकैया नायडू ने भी कहा था कि सभी सरकारी साइन बोर्डों पर सबसे ऊपर क्षेत्रीय भाषा, उसके बाद हिंदी और फिर अंग्रेजी का प्रयोग होना चाहिए।
अंग्रेजी में बनती हैं नीतियां, गरीबों से जुड़ी योजनाओं के फॉर्म तक अंग्रेजी में
आम बोलचाल में चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद किसी भी नीति को लागू करने से पहले प्रशासन शहरवासियों से सुझाव मांगता है तो उसके ड्राफ्ट को अंग्रेजी में ही जारी किया जाता है। इसकी वजह से शहर का एक बड़ा वर्ग नीति को समझ पाने में असमर्थ हो जाता है, जबकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी सूचना को कम से कम दो भाषाओं में जारी करना अनिवार्य है।
समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग समेत कई ऐसे विभाग हैं जिससे गरीब, मजबूर व कम पढ़े-लिखे लोग जुड़े हैं लेकिन इनकी वेबसाइट अंग्रेजी में हैं। समाज कल्याण विभाग की कई योजनाएं, जिनके नाम तो हिंदी में हैं लेकिन उनके फॉर्म अंग्रेजी में हैं। प्रशासन की तरफ से सरकारी विज्ञप्तियां भी अंग्रेजी में ही आती हैं।
एक साल में वेबसाइट को हिंदी में नहीं कर पाया प्रशासन
शहर में हिंदी के लिए बातें तो बड़ी-बड़ी होती हैं। अफसर सरकारी हो या फिर निजी कार्यक्रम, सभी में हिंदी के विकास की बात करते हैं लेकिन बात जब खुद पर आती है तो वही अफसर अंग्रेजी की तरफ हो जाते हैं। उदाहरण के लिए यूटी प्रशासन ने पिछले साल केंद्र के दिशा निर्देशों के तहत नई वेबसाइट बनाई लेकिन सिर्फ अंग्रेजी में।
हिंदी का एक टैब है लेकिन पिछले एक साल से सिर्फ यही लिखा आ रहा है कि वर्तमान में हिन्दी भाषा में जानकारी उपलब्ध नहीं है, जल्द ही जानकारी उपलब्ध होगी। अंग्रेजी भाषा में देखने के लिए यहां क्लिक करें। इससे समझा जा सकता है कि यूटी प्रशासन हिंदी को लेकर कितना गंभीर है।
चंडीगढ़ में भाषा बोलने वाले लोग
| भाषा | प्रतिशत |
| हिंदी | 73.6 |
| पंजाबी | 22.03 |
| उर्दू | 01 |
| नेपाली | 0.62 |
| बंगाली | 0.59 |
| तमिल | 0.53 |
| अन्य | 1.63 |