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नहीं खुले पीयू के विभागीय कार्यालय, शिक्षकों की टूटी आस
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चंडीगढ़। शहर के सरकारी कार्यालय भले ही सोमवार को खुले हों, लेकिन पीयू के कार्यालय नहीं खुले। इसका मुख्य कारण यह है कि सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे, इससे शिक्षकों की आस टूट गई है।
शिक्षकों का कहना है कि वह अपने विभागीय कार्यालय में जाकर अपने रिसर्च से लेकर पेंडिंग कार्य निपटाते, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। कर्फ्यू से पहले लगे लॉकडाउन में विभागीय कार्यालय खुल रहे थे और कार्य भी चल रहा था। शिक्षकों ने यूटी प्रशासन से कहा है कि उन्हें अपने विभागीय कार्यालय तक जाने की अनुमति दें।
पीयू में 70 से अधिक विभाग हैं। नियमित शिक्षकों की संख्या 600 से अधिक है। रिसर्च से जुड़े शिक्षकों की संख्या लगभग 400 है। हालांकि पीएचडी सभी शिक्षक अपने-अपने विद्यार्थियों को करवा रहे हैं, लेकिन एजेंसियों की ओर से या भारत सरकार की ओर से रिसर्च के लिए दिए गए फंड से कई शिक्षक जुड़े हैं। उनके रिसर्च प्रोजेक्ट अहम हैं और समय पर उन रिसर्च के बेहतर परिणाम भी देने हैं। शिक्षकों को उम्मीद थी कि उनके कार्यालय खुलेंगे तो राहत मिलेगी और वह रिसर्च बेहतर और जल्द करके सौंप सकेंगे।
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शिक्षकों का कहना है कि जो शिक्षक बड़े रिसर्च या समयबद्ध वाले रिसर्च से जुड़े हैं उन्हें विभागों में जाने की अनुमति दी जाए। ऐसे शिक्षकों की संख्या हर विभाग में चार से पांच ही होगी। ऐसे में शारीरिक दूरी बनाकर भी काम किया जा सकता है।
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शिक्षकों का कहना है कि वह अपने विभागीय कार्यालय में जाकर अपने रिसर्च से लेकर पेंडिंग कार्य निपटाते, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। कर्फ्यू से पहले लगे लॉकडाउन में विभागीय कार्यालय खुल रहे थे और कार्य भी चल रहा था। शिक्षकों ने यूटी प्रशासन से कहा है कि उन्हें अपने विभागीय कार्यालय तक जाने की अनुमति दें।
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पीयू में 70 से अधिक विभाग हैं। नियमित शिक्षकों की संख्या 600 से अधिक है। रिसर्च से जुड़े शिक्षकों की संख्या लगभग 400 है। हालांकि पीएचडी सभी शिक्षक अपने-अपने विद्यार्थियों को करवा रहे हैं, लेकिन एजेंसियों की ओर से या भारत सरकार की ओर से रिसर्च के लिए दिए गए फंड से कई शिक्षक जुड़े हैं। उनके रिसर्च प्रोजेक्ट अहम हैं और समय पर उन रिसर्च के बेहतर परिणाम भी देने हैं। शिक्षकों को उम्मीद थी कि उनके कार्यालय खुलेंगे तो राहत मिलेगी और वह रिसर्च बेहतर और जल्द करके सौंप सकेंगे।
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शिक्षकों का कहना है कि जो शिक्षक बड़े रिसर्च या समयबद्ध वाले रिसर्च से जुड़े हैं उन्हें विभागों में जाने की अनुमति दी जाए। ऐसे शिक्षकों की संख्या हर विभाग में चार से पांच ही होगी। ऐसे में शारीरिक दूरी बनाकर भी काम किया जा सकता है।