नोटबंदी ने ली एक और जान, बैंक की कतार में खड़े शख्स ने दम तोड़ा
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जलालाबाद स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की शाखा में सोमवार पैसे जमा कराने के लिए सुबह आठ बजे से लाइन में खड़े एक 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। बैंक के अंदर गर्मी इतनी थी कि लोगों के कहने पर भी बैंक स्टाफ ने पंखे तक नहीं चलाए।
उधर, इस संबंधी बैंक शाखा के मैनेजर ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया। मृतक जोगिंदर सिंह (55) वासी गांव घुबाया के बेटे सुखदेव सिंह व राज कुमार ने बताया कि उनके पिता सुबह आठ बजे से स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में पैसे जमा करवाने के लिए गए थे।
उन्हें दोपहर ढाई बजे घर पर टेलीफोन गया कि जोगिंदर सिंह की बैंक के अंदर मौत हो गई। बैंक में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शनिवार व रविवार बैंक बंद होने के कारण सुबह से ही बैंक के गेट पर लोगों की भीड़ थी।
बैंक में नहीं था पानी का कोई बंदोबस्त
जैसे ही बैंक खुला लोग अंदर बने काउंटर पर कतारें बनाकर खड़े हो गए। बैंक में गर्मी और उमस बहुत थी। बैंक के स्टाफ से पंखे चलाने के लिए कहा गया लेकिन किसी ने पंखे नहीं चलाए।
बैंक में पानी का भी कोई बंदोबस्त नहीं था। लोगों ने बताया कि जोगिंदर सिंह लाइन में खड़ा था और चक्कर खाकर गिर गया। बैंक स्टाफ से पानी की मदद मांगी लेकिन किसी ने पानी तक नहीं दिया।
थोड़ी देर बाद जोगिंदर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बैंक में दो सौ से तीन सौ तक लोगों की भीड़ थी। उधर, कांग्रेस के पूर्व जंगलात मंत्री हंस राज जोसन बैंक में पहुंचे और मृतक के परिजनों से मिले।
जोसन ने कहा कि बैंक वाले लोगों से ठीक से व्यवहार नहीं कर रहे हैं। लोगों की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं है। ये मौत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के कारण हुई है। सरकार को जोगिंदर सिंह के परिजनों को मुआवजा देना चाहिए।