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Chandigarh News: नौतोड़ भूमि के लिए डिमार्केशन का काम छह माह में होगा पूरा
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चंडीगढ़। हरियाणा के पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में 40 हजार किसानों की नौतोड़ जमीन के मालिकाना हक के मामले में वन विभाग के सचिव द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हाईकोर्ट में पेश होकर बताया गया कि 14 भोज में से 2 का डिमार्केशन मार्च माह में पूरा कर लिया जाएगा।
बाकी का 6 माह के भीतर हो जाएगा। अभी तक 178 एकड़ भूमि का डिमार्केशन हो चुका है। हाईकोर्ट ने सरकार को 1997 में हुई सेक्शन 4 की नोटिफिकेशन रिकॉर्ड पर रखने का आदेश दिया है।
हरियाणा किसान कांग्रेस के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष व शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने एडवोकेट दीपांशु बंसल के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए न्यायालय को बताया कि 2017 में किसानों को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लंबे समय से इस भूमि का मालिकाना हक देने की मांग करीब 40 हजार स्थानीय किसान कर रहे हैं। 59998 एकड़ भूमि अधिग्रहण का फैसला लिया गया था जिसके बाद कुल 50807 एकड़ भूमि का अधिग्रहण वन क्षेत्र के लिए मुआवजा देकर किया गया। बाद में इस भूमि के मालिकाना हक पर विवाद हो गया था।
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रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी एमपी शर्मा ने अर्जी देकर बताया कि उन्हें नियुक्ति तो दे दी गई थी, लेकिन सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई गई थीं, जिसके चलते विवाद का निपटारा नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने शर्मा को तीन दिन में आवश्यक साधनों की सूची हरियाणा सरकार को सौंपने का आदेश दिया था। साथ ही सरकार को तुरंत संसाधन उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। सोमवार को सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्हें 2 पटवारी और 2 कानूनगो उपलब्ध करवाए गए हैंं। 14 भोज में से 2 का डिमार्केशन मार्च में कर लिया जाएगा और बाकी का 6 माह के भीतर हो जाएगा। कोर्ट को बताया गया कि शर्मा का काम डिमार्केशन का नहीं है, सरकार के डिमार्केशन पूरा करने के बाद ही उनका काम शुरू होगा।
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बाकी का 6 माह के भीतर हो जाएगा। अभी तक 178 एकड़ भूमि का डिमार्केशन हो चुका है। हाईकोर्ट ने सरकार को 1997 में हुई सेक्शन 4 की नोटिफिकेशन रिकॉर्ड पर रखने का आदेश दिया है।
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हरियाणा किसान कांग्रेस के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष व शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने एडवोकेट दीपांशु बंसल के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए न्यायालय को बताया कि 2017 में किसानों को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लंबे समय से इस भूमि का मालिकाना हक देने की मांग करीब 40 हजार स्थानीय किसान कर रहे हैं। 59998 एकड़ भूमि अधिग्रहण का फैसला लिया गया था जिसके बाद कुल 50807 एकड़ भूमि का अधिग्रहण वन क्षेत्र के लिए मुआवजा देकर किया गया। बाद में इस भूमि के मालिकाना हक पर विवाद हो गया था।
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रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी एमपी शर्मा ने अर्जी देकर बताया कि उन्हें नियुक्ति तो दे दी गई थी, लेकिन सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई गई थीं, जिसके चलते विवाद का निपटारा नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने शर्मा को तीन दिन में आवश्यक साधनों की सूची हरियाणा सरकार को सौंपने का आदेश दिया था। साथ ही सरकार को तुरंत संसाधन उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। सोमवार को सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्हें 2 पटवारी और 2 कानूनगो उपलब्ध करवाए गए हैंं। 14 भोज में से 2 का डिमार्केशन मार्च में कर लिया जाएगा और बाकी का 6 माह के भीतर हो जाएगा। कोर्ट को बताया गया कि शर्मा का काम डिमार्केशन का नहीं है, सरकार के डिमार्केशन पूरा करने के बाद ही उनका काम शुरू होगा।