डेरा के समर्थन से भाजपा को होगा कितना फायदा?
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दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक एक पहले डेरा सच्चा सौदा के समर्थन ने भाजपा में नई जान फूंक दी है। पार्टी को इसके मायने पता हैं। दिल्ली में डेरा के करीब 22 लाख श्रद्धालु हैं, जिनमें से 12 लाख मतदाता हैं।
राजनीतिक विंग की ओर से श्रद्धालुओं को समर्थन वाला संदेश जारी किया गया है। साथ ही विंग पदाधिकारी भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। दिल्ली में भाजपा को समर्थन के बाद डेरा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
डेरा सच्चा सौदा सिरसा की ताकत को राजनीतिक दलों ने भी माना है। डेरा पहले अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को मूक समर्थन देता था। यानी, डेरा संदेश देने के बाद श्रद्धालुओं की मनमर्जी पर फैसला छोड़ देता था। डेरा के श्रद्धालुओं की संख्या हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में सर्वाधिक रही। यही वजह रही कि डेरा की ओर से इन राज्यों के जिस उम्मीदवार को समर्थन दिया गया, वह फायदे में ही नजर आया।
2007 के चुनाव में अकाली देख चुके हैं ताकत
वर्ष 2007 के पंजाब विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल को डेरा सच्चा सौदा ने अपनी ताकत का अहसास करवाया। किसी बात को लेकर डेरा और शिअद के बीच ऐसी तनातनी हुई कि शिअद को अपने ही गढ़ मालवा क्षेत्र में करारी हार का सामना करना पड़ा। अन्य क्षेत्रों में शिलद और भाजपा को कामयाबी मिली और सरकार बन गई। इस चुनाव के बाद डेरा की राजनीतिक विंग ताकतवर होकर उभरी।
लोकसभा चुनाव में डेरा की ओर से किसी राजनीतिक विंग का खुलकर समर्थन नहीं किया गया, बल्कि अलग-अलग सीटों पर उम्मीदवारों को समर्थन दिया गया चाहे वे किसी भी दल के रहे हों। हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी ने अपना जाल बिछा दिया था।
भाजपा को फिर डेरा की याद आई
अमित शाह को हरियाणा प्रभारी की कमान सौंपी और शाह ने अपने दायें हाथ मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को डेरा का समर्थन हासिल करने की जिम्मेदारी सौंपी। विजय वर्गीय ने कई बार डेरा का दौरा किया और राजनीतिक विंग के चेयरमैन प्रदीप कलेर इंसां और राम सिंह चेयरमैन से कई दौर में बातचीत की।
रानियां में अमित शाह की चुनाव रैली में राजनीतिक विंग के पदाधिकारी अमित शाह से मिले और इसके बाद विंग ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर डाली। गद्दी संभालने के बाद पहली बार डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां ने मतदान किया। भाजपा की जीत हुई।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी भाजपा डेरा का समर्थन चाहती थी, लेकिन इस बार खुलकर नहीं बोल रही थी। लेकिन आप की बढ़ती ताकत के बाद भाजपा को फिर डेरा की याद आई। डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक विंग ने दिल्ली के श्रद्धालुओं की राय लेकर भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर डाली।
राजनीतिक विंग के चेयरमैन प्रदीप कलेर इंसां ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए बताया कि डेरा श्रद्धालुओं ने इस बार दिल्ली विधानसभा में भाजपा को समर्थन देने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में डेरा के करीब 22 लाख श्रद्धालु हैं, जिनमें से 12 लाख मतदाता हैं। उधर, भाजपा को समर्थन की घोषणा के बाद डेरा के स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी दिल्ली में डेरा डाला हुआ है जो अपने-अपने रिश्तेदारों का मनाने में जुटे हुए हैं।
भाजपा के पक्ष में चुनावी माहौल बनाने की कोशिश
डेरा सच्चा सौदा ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की तरह ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की है। हालांकि इसकी पटकथा सोमवार देर रात ही लिख ली गई थी। इस दिन डेरा प्रमुख संत राम रहीम के साथ हरियाणा के चुनाव प्रभारी रहे कैलाश विजयवर्गीय, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एक अन्य केंद्रीय मंत्री ने उनकी दिल्ली स्थित कोठी में बैठक की थी।
इसी बैठक में समर्थन की घोषणा मतदान से ठीक पहले करने की घोषणा की गई, जिससे भाजपा के पक्ष में चुनावी माहौल बन सके। अब भाजपा को डेरा के समर्थन की बदौलत हालात बदलने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि राजधानी की दो दर्जन से भी अधिक सीटों पर दलितों का व्यापक प्रभाव है और इसी वर्ग में डेरा समर्थकों की संख्या सबसे ज्यादा है।
डेरा सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व ने बीते हफ्ते इस सिलसिले में डेरा प्रमुख से संपर्क साधा। चूंकि डेरा प्रमुख को इसी बीच दिल्ली आना था, इसलिए यहीं पर मुलाकात की योजना बनी। सोमवार को देर रात अमित शाह के दूत के रूप में विजयवर्गीय और दो केंद्रीय मंत्रियों ने डेरा प्रमुख से करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा की और हरियाणा विधानसभा चुनाव की तरह ही दिल्ली चुनाव के लिए भी डेरा का समर्थन मांगा। सूत्रों के मुताबिक कई मुद्दों पर चर्चा और इन पर मिली सहमति के बाद डेरा प्रमुख भाजपा को समर्थन देने केलिए राजी हो गए। हालांकि इसी दौरान भाजपा नेताओं ने डेरा प्रमुख से तत्काल समर्थन का ऐलान न करने का अनुरोध किया।
डेरा के समर्थन के ऐलान के बाद चुनाव में आप से कड़े मुकाबले में उलझी भाजपा को दलितों के प्रभाव वाली सीटों पर स्थिति में सुधार आने का भरोसा है। उल्लेखनीय है कि भाजपा को दलितों, मुसलमानों और सिख समुदाय के आप के पक्ष में गोलबंद होने का फीडबैक मिला था। अब पार्टी को लगता है कि वह डेरा के समर्थन के सहारे दलित वोट बैंक में भी सेंध लगा पाएगी।