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पंजाब: कृषि कानून वापसी और करतारपुर से भाजपा का खुलेगा कॉरिडोर? गठबंधन को तैयार कैप्टन
Fri, 19 Nov 2021 10:35 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 19 Nov 2021 10:35 AM IST
सार
पंजाब सरकार विधानसभा में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव ला चुकी है। ऐसे में केंद्र का यह फैसला कहीं पार्टियों के हाथ से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा न छीन ले
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किसान आंदोलन
- फोटो : फाइल
विस्तार
गुरु नानक देव जयंती पर करतारपुर कॉरिडोर दोबारा खोलने और कृषि कानून वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले का पंजाब की सियासत पर बड़ा असर होगा। पिछले लगभग एक साल से पंजाब में राजनेताओं के बयानों की धुरी तीन कृषि कानूनों और किसान आंदोलन पर ही टिकी थी। ऐसे में जब विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, केंद्र का ये फैसला किस पार्टी को जीवनदान देगा ये बड़ा सवाल बन गया है।
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पंजाब में आपसी कलह से जूझ रही कांग्रेस सरकार ने किसान आंदोलन का हमेशा खुलकर समर्थन किया। वहीं शिरोमणि अकाली दल ने तो इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी से अपना पुराना गठबंधन तक तोड़ लिया था। अकाली सांसद हरसिमरत कौर बादल ने अपना मंत्रीपद भी छोड़ दिया था। पंजाब भाजपा के नेताओं ने किसानों का पूरा विरोध सहा। वहीं आम आदमी पार्टी हमेशा ही इन कानूनों के खिलाफ दिखी।
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कुछ दिन पहले जब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और चरणजीत चन्नी ने सरकार की बागडोर संभाली तो कई ऐसे फैसले लिए गए जिनसे कांग्रेस सरकार की आलोचना हुई। इनमें सबसे बड़ा फैसला था 26 जनवरी की लाल किला हिंसा में गिरफ्तार किसानों के परिवारों को दो-दो लाख का मुआवजा देने का एलान। विधानसभा में कृषि कानून को रद्द करने के बाद सरकार ने 83 किसान समर्थकों को मुआवजा देने का फैसला किया था। इसके अलावा किसान आंदोलन के दौरान पंजाब में किसानों पर दर्ज सभी केस रद्द करने का फैसला लिया गया था। आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों व मजदूरों के परिजनों को सरकारी नौकरी व तय मुआवजा देने के लिए पंजाब सरकार संयुक्त किसान मोर्चा से सूची मांग चुकी है।
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वहीं इस्तीफे के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी नई पार्टी के गठन का एलान कर चुके हैं। इसी के साथ ही उन्होंने कृषि कानूनों के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर चुके हैं। पार्टी बनाने के बाद कैप्टन ने भाजपा से गठजोड़ की संभावनाओं पर कहा था कि किसानों का मुद्दा हल होने पर इस पर विचार किया जा सकता है। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि वे भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे।
करतारपुर कॉरिडोर दोबारा खोलने के फैसले पर भी पंजाब में हर्ष
कोरोना के कारण लगभग बीस माह से बंद करतारपुर कॉरिडोर को दोबारा खोल कर मोदी पहले ही सिख वर्ग को सौगात दे चुके हैं। गुरु नानक जयंती से पहले कॉरिडोर खोलने के एलान का पंजाब में सभी ने स्वागत किया था।