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प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या करने वाली पत्नी की फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील, जानिए मामला
Wed, 04 Mar 2020 10:00 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 04 Mar 2020 10:00 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या करने वाली पत्नी की फांसी की सजा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। इसके साथ ही प्रेमी को सुनाई गई अंतिम सांस तक जेल की सजा को भी हाईकोर्ट ने सामान्य उम्र कैद में बदल दिया है। बहादुरगढ़ सदर थाने में दर्ज मामले के अनुसार गुभाना गांव निवासी पुष्पा ने अपने प्रेमी सुरेंद्र के साथ मिलकर अपने पति सुरेश की 8 अप्रैल 2013 को हत्या कर दी थी।
दोषियों द्वारा अपने कबूलनामे में बताया गया कि सुरेंद्र के पुष्पा के साथ अवैध संबंध थे, जिनमें सुरेश रोड़ा बन रहा था। इसलिए सुरेंद्र ने सुरेश को शराब पीने के लिए बुलाया। नशे में होने पर सुरेंद्र ने फरसा मारकर सुरेश की हत्या कर दी। हत्या को सड़क दुर्घटना दिखाने के लिए सुरेंद्र ने गुभाना-माजरी रोड पर सुरेश के शव को छोड़ दिया। जब मामले का पता मृतक के भाई सूरजमल को लगा तो उसे शक हुआ और उसने सुरेंद्र और पुष्पा के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया।
पुलिस ने तफ्तीश में मामला 120 बी और 302 का पाया। सुरेंद्र की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त फरसा भी बरामद कर लिया। अभियोजन पक्ष की तरफ से बताया गया कि एक महिला द्वारा किसी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की गई और उसे सख्त सजा नहीं मिली तो सामाजिक तानाबाना खराब हो जाएगा। हत्या केस में महिला व उसके प्रेमी को राहत देते हुए दोनों की सजा उम्रकैद में तब्दील करने का फैसला दिया है। कोर्ट ने दोनों की जुर्माने की राशि भी पांच लाख से कम कर एक - एक लाख करने का आदेश दिया।
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हाईकोर्ट की जस्टिस दया चौधरी व जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता ने यह आदेश निचली अदालत द्वारा महिला को फांसी की सजा व उसके प्रेमी को ताउम्र जेल की सजा के खिलाफ अपील व मर्डर रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए दिया। फांसी की सजा पा चुकी एक महिला की सजा को उम्रकैद में बदलने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने उसके साथी की भी सजा जिंदा रहने तक जेल में सजा को बदलकर उम्रकैद में बदल दिया है।
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दोषियों द्वारा अपने कबूलनामे में बताया गया कि सुरेंद्र के पुष्पा के साथ अवैध संबंध थे, जिनमें सुरेश रोड़ा बन रहा था। इसलिए सुरेंद्र ने सुरेश को शराब पीने के लिए बुलाया। नशे में होने पर सुरेंद्र ने फरसा मारकर सुरेश की हत्या कर दी। हत्या को सड़क दुर्घटना दिखाने के लिए सुरेंद्र ने गुभाना-माजरी रोड पर सुरेश के शव को छोड़ दिया। जब मामले का पता मृतक के भाई सूरजमल को लगा तो उसे शक हुआ और उसने सुरेंद्र और पुष्पा के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया।
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पुलिस ने तफ्तीश में मामला 120 बी और 302 का पाया। सुरेंद्र की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त फरसा भी बरामद कर लिया। अभियोजन पक्ष की तरफ से बताया गया कि एक महिला द्वारा किसी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की गई और उसे सख्त सजा नहीं मिली तो सामाजिक तानाबाना खराब हो जाएगा। हत्या केस में महिला व उसके प्रेमी को राहत देते हुए दोनों की सजा उम्रकैद में तब्दील करने का फैसला दिया है। कोर्ट ने दोनों की जुर्माने की राशि भी पांच लाख से कम कर एक - एक लाख करने का आदेश दिया।
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हाईकोर्ट की जस्टिस दया चौधरी व जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता ने यह आदेश निचली अदालत द्वारा महिला को फांसी की सजा व उसके प्रेमी को ताउम्र जेल की सजा के खिलाफ अपील व मर्डर रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए दिया। फांसी की सजा पा चुकी एक महिला की सजा को उम्रकैद में बदलने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने उसके साथी की भी सजा जिंदा रहने तक जेल में सजा को बदलकर उम्रकैद में बदल दिया है।