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शिक्षा के साथ काम, आवेदन के लिए मांगे नाम
अमर उजाला/ ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 11 Sep 2014 12:23 AM IST
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केयू के छात्र कल्याण अधिष्ठाता विभाग ने विभिन्न विभागों में काम करने के इच्छुक उन विद्यार्थियों के नाम ‘अर्न वाइल यू लर्न’ स्कीम के लिए मांगे हैं।
जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर अनिल वशिष्ठ की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार विश्विद्यालय के सभी विभागाध्यक्षों से कहा है कि वे अपने विभाग में आर्थिक रूप से कमजोर उन विद्यार्थियों से आवेदन मांगें जो पढ़ाई के साथ-साथ विभाग में इस स्कीम के तहत काम करना चाहते हैं।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए विभाग को स्टाफ काउंसिल की बैठक कर किसी एक छात्र के नाम की सिफारिश करनी होगी। इसी आधार पर ही विद्यार्थी इस स्कीम का लाभ उठा कर पार्ट टाइम काम कर सकेगा।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर अनिल वशिष्ठ ने बताया कि विश्वविद्यालय के वीसी डॉ. डीडीएस संधू के निर्देशानुसार पिछले नौ सालों में विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।
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2009 में इस योजना को आर्थिक रूप से कमजोर उन विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयार किया था, जिन्हें किसी स्कॉलरशिप का लाभ नहीं मिल पाता।
ऐसे विद्यार्थ्यों के मदद के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने हर वर्ष एक लाख पचास हजार रुपये योजना के बजट के लिए निर्धारित किए हैं।
उन्होंने बताया कि तब से लेकर आज तक हर वर्ष करीब 50 विद्यार्थी विभिन्न विभागों, संस्थानों के पुस्तकालयों, लेबोरेट्ररी व ऑफिस में काम करते हैं, लेकिन उन्हें 30 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि एक विद्यार्थी इस योजना के तहत 30 घंटे काम कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की है कि विभाग में आवेदन कर इस योजना का लाभ उठाएं।
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जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर अनिल वशिष्ठ की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार विश्विद्यालय के सभी विभागाध्यक्षों से कहा है कि वे अपने विभाग में आर्थिक रूप से कमजोर उन विद्यार्थियों से आवेदन मांगें जो पढ़ाई के साथ-साथ विभाग में इस स्कीम के तहत काम करना चाहते हैं।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए विभाग को स्टाफ काउंसिल की बैठक कर किसी एक छात्र के नाम की सिफारिश करनी होगी। इसी आधार पर ही विद्यार्थी इस स्कीम का लाभ उठा कर पार्ट टाइम काम कर सकेगा।
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छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर अनिल वशिष्ठ ने बताया कि विश्वविद्यालय के वीसी डॉ. डीडीएस संधू के निर्देशानुसार पिछले नौ सालों में विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।
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2009 में इस योजना को आर्थिक रूप से कमजोर उन विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयार किया था, जिन्हें किसी स्कॉलरशिप का लाभ नहीं मिल पाता।
ऐसे विद्यार्थ्यों के मदद के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने हर वर्ष एक लाख पचास हजार रुपये योजना के बजट के लिए निर्धारित किए हैं।
उन्होंने बताया कि तब से लेकर आज तक हर वर्ष करीब 50 विद्यार्थी विभिन्न विभागों, संस्थानों के पुस्तकालयों, लेबोरेट्ररी व ऑफिस में काम करते हैं, लेकिन उन्हें 30 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि एक विद्यार्थी इस योजना के तहत 30 घंटे काम कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की है कि विभाग में आवेदन कर इस योजना का लाभ उठाएं।