दुबई से लाया गया शव: कंपनी में बना MD, चार लाख रुपये मिलना था वेतन, सैलरी आने से एक दिन पहले हो गई मौत
मृतक के पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि अभी कंपनी शुरू हुए मुश्किल से एक माह ही हुआ था और बतौर एमडी गुरप्रीत सिंह को पहला वेतन छह जुलाई को मिलना था लेकिन इससे पहले ही वह इस दुनिया से चल बसा।
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पंजाब के फिरोजपुर कैंट का एक युवक करीब सवा साल पहले टूरिस्ट वीजा पर दुबई गया। यहां उसने एक बांग्लादेशी नागरिक के साथ मिलकर उसके नाम पर एक कंपनी बना ली। युवक का नाम गुरप्रीत सिंह था। वह कंपनी में प्रबंध निदेशक (एमडी) बन गया। इस कंपनी को दुबई में काम शुरू किए अभी एक माह ही हुआ था। बतौर एमडी गुरप्रीत को चार लाख रुपये पहला वेतन छह जुलाई को मिलना था लेकिन इसके एक दिन पहले ही पांच जुलाई को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि गुरप्रीत सिंह (35) सवा साल पहले ही दुबई नौकरी की तलाश में गया था। वह टूरिस्ट वीजा पर दुबई गया था तो वहां वीजा बढ़ाने के लिए उसने सरकार को टैक्स भरा था। वह बहुत मेहनती था तो उसने वहां एक साल के अंदर ही बांग्लादेशी नागरिक (जो वहां का नागरिक था) के साथ मिलकर एक कंपनी बना ली थी। इसके लिए सरकार को पूरा टैक्स अदा किया। कंपनी बनाने के बाद वह खुद कंपनी में बतौर एमडी के तौर पर काम करने लगा।
मृतक के पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि अभी कंपनी शुरू हुए मुश्किल से एक माह ही हुआ था और बतौर एमडी गुरप्रीत सिंह को पहला वेतन छह जुलाई को मिलना था लेकिन इससे पहले ही वह इस दुनिया से चल बसा। वह तीन बहनों का अकेला भाई था। उसकी एक बहन दुबई में रहती है, जबकि दो बहनें यहां भारत में ही रहती हैं। पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि गुरप्रीत और उसके बुजुर्ग माता-पिता के अच्छे दिन आने वाले थे, मगर भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
ऐसे दुबई से भारत पहुंचा गुरप्रीत का शव
सरबत द भला ट्रस्ट के संस्थापक व दुबई के प्रसिद्ध कारोबारी डॉ. एसपी सिंह ओबराय के प्रयास के बाद फिरोजपुर के बुजुर्ग दंपती के इकलौते बेटे गुरप्रीत का का शव रविवार को दुबई से भारत लाया गया। रविवार को दुबई से आई फ्लाइट से शव को श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतारा गया। पीड़ित दंपती ने डॉ. सिंह से संपर्क किया और बेटे के शव को लाने की गुहार लगाई थी।
डॉ. एसपी सिंह ओबराए ने बताया की गुरप्रीत सिंह भी अन्य युवाओं की तरह अपने परिवार को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए करीब सवा साल पहले दुबई गया था। गुरप्रीत अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था। बीती पांच जुलाई को अचानक उसे दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास के सहयोग और अपने निजी सहायक बलदेव सिंह चाहल की देखरेख में जरूरी कागजी करवाई मुकम्मल की गई। इसके बाद गुरप्रीत का शव भारत भेजा। उन्होंने बताया कि गुरप्रीत के शव को भारत भेजने का खर्च दुबई में रह रही बहन और दोस्तों ने मिलकर उठाया है। एयरपोर्ट पर शव लेने गुरप्रीत की बहन मंजीत कौर, जीजा विक्रमजीत सिंह, चाचा ओमप्रकाश, प्रदीप राणा व बलविंदर सिंह पहुंचे।