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टीन शेड अलॉटमेंट घोटाले में बबला दोषी करार, हाथ जोड़कर बोले- जो सजा देंगे वो मंजूर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 28 Mar 2018 03:51 PM IST
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दविंदर सिंह बबला
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चंडीगढ़ सेक्टर-26 सब्जी मंडी में टीन शेड अलॉटमेंट घोटाले के नौ साल पुराने मामले में दविंदर सिंह बबला को जिला अदालत ने दोषी करार दे दिया। इसके बाद वर्तमान कांग्रेसी पार्षद और मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन बबला को पुलिस कस्टडी में लेकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बबला को अदालत 31 मार्च को सजा सुनाएगी। इससे पहले बबला को इस मामले में निचली अदालत ने जुलाई 2014 में एक साल के अच्छे आचरण की गारंटी पर 50 हजार रुपये के मुचलके पर प्रोबेशन पर छोड़ा था। अदालत के इस आदेश के खिलाफ पुलिस ने 19 सितंबर 2014 को ऊपरी कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी।
वहीं बबला ने भी इस मामले में आपराधिक अपील दायर की थी, जिसे सुनवाई के बाद अदालत ने खारिज कर दिया और चार साल में 36 सुनवाई के बाद पुलिस की अपील मंजूर करते हुए बबला को दोषी करार दिया। बबला की सजा पर फैसला 31 मार्च को होगा। मंगलवार को अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद बबला ने जज के सामने हाथ जोड़कर कहा कि, वह उनके राजनीतिक भविष्य को देखते हुए जो भी फैसला देंगे, वह उन्हें मंजूर होगा। इसके बाद अदालत ने दोषी को पुलिस कस्टडी में लेने के आदेश दिए और बुड़ैल जेल भेज दिया।
यह है मामला
सेक्टर-26 सब्जी मंडी के दुकानदार सूरज प्रकाश आहूजा ने 19 अगस्त 2009 को पुलिस में मामला दर्ज कराया था। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने कहा था कि 24 जुलाई को हुई टीन शेड अलॉटमेंट नीलामी में बबला ने अनियमितताएं बरतते हुए अपने दस खास लोगों को अलग से टीन शेड अलॉट कर दिए। नियमों के तहत कुल 59 लोगों को शेड अलॉट होने थे लेकिन जाली कागजात के आधार पर मार्केट कमेटी के तत्कालीन चेयरमैन दविंदर सिंह बबला ने 59 की जगह 69 लोगों को शेड अलॉट कर दिए। शिकायत मिलने के बाद सेक्टर-26 थाना पुलिस में बबला के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 465, 468, 471 के तहत केस दर्ज हुआ था।
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केस दर्ज होने के बाद बबला फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए बबला ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। वहां से याचिका खारिज होने पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वहां से भी याचिका खारिज होने पर उसने जिला अदालत से भगोड़ा घोषित करने के लिए नोटिस जारी होने से कुछ दिन पहले ही 29 दिसंबर 2009 को सरेंडर कर दिया था। इसके बाद बबला करीब 11 महीने बुड़ैल जेल में रहा था। ट्रायल के बाद सिविल जज शिफा की अदालत ने बबला को अच्छे आचरण की शर्त पर एक साल के प्रोबेशन पर 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ा था।
दोस्त के भाई को नौकरी देने के मामले में मिली थी राहत
कांग्रेसी पार्षद और मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन दविंदर सिंह बबला पर मार्केट कमेटी में ऑक्शन रिकॉर्डर के पद पर नियमों को ताक पर रखकर दोस्त के बेटे को नौकरी दिलाने के मामले में जिला अदालत ने बरी कर दिया था। यह मामला शेड अलॉटमेंट घोटाले की जांच के दौरान सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने रशविंदर सिंह की शिकायत पर चार जनवरी 2010 को कांग्रेसी नेता दविंदर सिंह पर जालसाजी और धोखाधड़ी का एक और मामला दर्ज किया था। इसके तहत बबला पर मार्केट कमेटी का चेयरमैन रहते हुए फर्जी कागजात के आधार पर नियमों के विपरीत दोस्त के बेटे को मार्केट कमेटी में ऑक्शन रिकॉर्डर के पद पर तैनाती देने का आरोप था। हालांकि अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप साबित न कर पाने पर अदालत ने बबला को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
कब क्या हुआ
19 अगस्त 2009- दविंदर सिंह बबला के खिलाफ एफआईआर दर्ज
6 अक्तूबर 2009- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बबला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
28 दिसंबर 2009- बबला ने जिला अदालत में किया सरेंडर
25 फरवरी 2010- पुलिस ने बबला के खिलाफ चार्जशीट दायर की
22 जुलाई 2014- जिला अदालत ने बबला को दोषी करार दिया, लेकिन एक साल के प्रोबेशन पर छोड़ा
19 सितंबर 2014- पुलिस ने ऊपरी कोर्ट में निचली अदालत के आदेश के खिलाफ आपराधिक अपील दायर की
27 मार्च 2018- एडीजे केर्ट ने बबला की अपील खारिज कर उन्हें दोषी करार दिया और पुलिस कस्टडी में लेने के आदेश दिए
31 मार्च 2018- अदालत बबला को सुनाएगी सजा
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वहीं बबला ने भी इस मामले में आपराधिक अपील दायर की थी, जिसे सुनवाई के बाद अदालत ने खारिज कर दिया और चार साल में 36 सुनवाई के बाद पुलिस की अपील मंजूर करते हुए बबला को दोषी करार दिया। बबला की सजा पर फैसला 31 मार्च को होगा। मंगलवार को अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद बबला ने जज के सामने हाथ जोड़कर कहा कि, वह उनके राजनीतिक भविष्य को देखते हुए जो भी फैसला देंगे, वह उन्हें मंजूर होगा। इसके बाद अदालत ने दोषी को पुलिस कस्टडी में लेने के आदेश दिए और बुड़ैल जेल भेज दिया।
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यह है मामला
सेक्टर-26 सब्जी मंडी के दुकानदार सूरज प्रकाश आहूजा ने 19 अगस्त 2009 को पुलिस में मामला दर्ज कराया था। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने कहा था कि 24 जुलाई को हुई टीन शेड अलॉटमेंट नीलामी में बबला ने अनियमितताएं बरतते हुए अपने दस खास लोगों को अलग से टीन शेड अलॉट कर दिए। नियमों के तहत कुल 59 लोगों को शेड अलॉट होने थे लेकिन जाली कागजात के आधार पर मार्केट कमेटी के तत्कालीन चेयरमैन दविंदर सिंह बबला ने 59 की जगह 69 लोगों को शेड अलॉट कर दिए। शिकायत मिलने के बाद सेक्टर-26 थाना पुलिस में बबला के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 465, 468, 471 के तहत केस दर्ज हुआ था।
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केस दर्ज होने के बाद बबला फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए बबला ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। वहां से याचिका खारिज होने पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वहां से भी याचिका खारिज होने पर उसने जिला अदालत से भगोड़ा घोषित करने के लिए नोटिस जारी होने से कुछ दिन पहले ही 29 दिसंबर 2009 को सरेंडर कर दिया था। इसके बाद बबला करीब 11 महीने बुड़ैल जेल में रहा था। ट्रायल के बाद सिविल जज शिफा की अदालत ने बबला को अच्छे आचरण की शर्त पर एक साल के प्रोबेशन पर 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ा था।
दोस्त के भाई को नौकरी देने के मामले में मिली थी राहत
कांग्रेसी पार्षद और मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन दविंदर सिंह बबला पर मार्केट कमेटी में ऑक्शन रिकॉर्डर के पद पर नियमों को ताक पर रखकर दोस्त के बेटे को नौकरी दिलाने के मामले में जिला अदालत ने बरी कर दिया था। यह मामला शेड अलॉटमेंट घोटाले की जांच के दौरान सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने रशविंदर सिंह की शिकायत पर चार जनवरी 2010 को कांग्रेसी नेता दविंदर सिंह पर जालसाजी और धोखाधड़ी का एक और मामला दर्ज किया था। इसके तहत बबला पर मार्केट कमेटी का चेयरमैन रहते हुए फर्जी कागजात के आधार पर नियमों के विपरीत दोस्त के बेटे को मार्केट कमेटी में ऑक्शन रिकॉर्डर के पद पर तैनाती देने का आरोप था। हालांकि अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप साबित न कर पाने पर अदालत ने बबला को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
कब क्या हुआ
19 अगस्त 2009- दविंदर सिंह बबला के खिलाफ एफआईआर दर्ज
6 अक्तूबर 2009- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बबला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
28 दिसंबर 2009- बबला ने जिला अदालत में किया सरेंडर
25 फरवरी 2010- पुलिस ने बबला के खिलाफ चार्जशीट दायर की
22 जुलाई 2014- जिला अदालत ने बबला को दोषी करार दिया, लेकिन एक साल के प्रोबेशन पर छोड़ा
19 सितंबर 2014- पुलिस ने ऊपरी कोर्ट में निचली अदालत के आदेश के खिलाफ आपराधिक अपील दायर की
27 मार्च 2018- एडीजे केर्ट ने बबला की अपील खारिज कर उन्हें दोषी करार दिया और पुलिस कस्टडी में लेने के आदेश दिए
31 मार्च 2018- अदालत बबला को सुनाएगी सजा