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बेटियो! डरना नहीं, डराना... मुश्किल में फंसे तो ये कदम उठाना

Mon, 02 Dec 2019 02:00 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2019 02:00 AM IST
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Daughters Do not be afraid, be afraid ... if you are in trouble, take these steps
चंडीगढ़। तेलंगाना में महिला डॉक्टर की गैंगरेप के बाद हत्या से पूरा देश सिहर उठा है। इस जघन्य अपराध ने निर्भया कांड की याद दिला दी है। इससे डर हावी हो गया है। लड़कियां फिर से खुद को असुरक्षित महसूस करने लगी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कोई लड़की मुसीबत पर फंसे तो उसे क्या करना चाहिए? मुश्किल वक्त का वह सामना कैसे करे। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करते किन बातों का ध्यान रखना होगा? एहतियात के तौर पर पैरेंट्स, लड़कियों, महिलाओं और शुभचिंतकों को क्या कदम उठाने चाहिए, ताकि इस तरह की घटना उनके किसी अपने के साथ न घटे। इन सब सवालों का जवाब देती एक विशेष रिपोर्ट।
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रात के वक्त बेटियां हो बाहर तो पुलिस की इस सुविधा का उठाएं लाभ
चंडीगढ़ पुलिस ने रात के वक्त महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं। रात दस बजे के बाद अगर कोई महिला या लड़की घर जाते वक्त असुरक्षित महसूस करती है तो वह 112, 100, 0172-2749194, 0172-2744100 पर कॉल कर चंडीगढ़ पुलिस की पिक एंड ड्राप सुविधा उठा सकती है। कॉल करते ही तीन मिनट के भीतर चंडीगढ़ पुलिस की पीसीआर वैन आएगी। पीसीआर वैन में एक महिला पुलिसकर्मी रहती है, जो महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएंगी। यह सुविधा साल 2016 में शुरू हुई थी। साल 2016 में 32, 2017 में 14, साल 2018 में 41 और इस साल अब तक 67 महिला पिक एंड ड्राप की सुविधा उठा चुकी हैं।
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याद रखें इन नंबरों को, मोबाइल पर सेव रखें
युवतियों को कुछ नंबर हमेशा याद रखने चाहिए। ये नंबर उन्हें मोबाइल पर डायरेक्ट डायल के ऑप्शन पर रखना होगा। ये नंबर 112, 1091 है। गृह मंत्रालय ने हाल ही में 100 नंबर के बजाए 112 को इमरजेंसी नंबर बना दिया है। यदि किसी को ऐन वक्त पर 112 याद नहीं आता है तो वह 100 नंबर भी डायल कर सकती हैं। 112 नंबर डायल होने पर वह सीधे पुलिस के कंट्रोल रूम में चला जाएगा। चंडीगढ़ पुलिस का दावा है कि कंट्रोल रूम में सूचना पहुंचते ही पीसीआर वैन आपकी लोकेशन पर मात्र तीन मिनट में पहुंच जाएगी। युवतियों व महिलाओं को एक बार हेल्पलाइन पर फोन कर जांच भी कर लेना चाहिए कि इन नंबरों को मिलाने पर क्या रिएक्शन मिलता है।
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सेल्फ डिफेंस की प्रैक्टिस जरूर करवाएं
मुश्किल वक्त पर मुकाबले के लिए अपनी बेटियों को सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण जरूर दिलवाएं। इससे बच्चियों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे किसी भी खतरे के दौरान अच्छी तरह से रिएक्ट कर पाएंगी। चंडीगढ़ पुलिस भी इस तरह का प्रशिक्षण दिलाती हैं। समय समय पर वह मुफ्त कैंप का आयोजन करती हैं। ‘स्वयं’ नाम से ट्रेनिंग सेेंटर में सैकड़ों लड़कियां स्नैचिंग, छेड़छाड़, मारपीट, अपहरण से खुद का बचाव करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। चंडीगढ़ पुलिस अब तक 175 कैंप में 24609 लड़कियों को चंडीगढ़ पुलिस ट्रेंड कर चुकी है। जबकि पुलिस ने इस वर्ष शहर के अलग अलग स्कूल, कालेज, इंस्टीट्यूट और स्लम एरिया में 60 कैंप लगाकर 8620 लड़कियों और महिलाओं को ट्रेंड किया जा चुका है। जो किसी मुसीबत पर अपनी और दूसरों की रक्षा कर सकती हैं।

ऑटो व कैब में सफर के वक्त ये एहतियात बरतें
-यदि ऑटों में सफर कर रही हैं तो उसी ऑटों का इस्तेमाल करें, जिनमें पहले से ही महिला सवारी बैठी हो।
-बैठने से पहले ऑटों की नंबर व लोकेशन जरूर अपने किसी परिचित को भेज दें।
-यदि मजबूरी में अकेला बैठना भी पड़ जाए तो ऊंची आवाज में घरवालों को मोबाइल पर टैक्सी का नंबर बताएं।
-इससे टैक्सी या ऑटो में सवार व्यक्ति के मन में भय पैदा हो जाएगा।
-अपने मोबाइल का जीपीएस लोकेशन ऑन रखें, ताकि किसी भी मुसीबत पर ट्रेस करने पर आसानी हो।
-ध्यान रहे उसी कैब का इस्तेमाल करें, जो जीपीएस युक्त हों। कैब में सफर करते वक्त अपने परिजनों को सूचना जरूर दें।
पैरेंट्स इन बातों का रखें खास ध्यान
-तीन साल की उम्र से ही बच्चियों को गुड व बैड टच की जानकारी देना शुरू कर दें।
-बच्चियों को पुरुष स्टाफ जैसे ड्राइवर, सर्वेंट, रिश्तेदार, ट्यूशन टीचर आदि के साथ अकेला न छोड़ें।
-आठ साल की उम्र में बच्ची को अश्लील हरकतों और रेप का मतलब समझा दें।
-उन्हें बताएं कि यदि कोई बैड टच करे तो फौरन अभिभावकों को जरूर बताएं।
-लड़कों को बचपन से ही शिक्षित करें। इसलिए 10-12 की उम्र में ही उन पर नजर रखें।
-लड़कों के मोबाइल पर, उसके दोस्तों पर, उसकी आदतों पर लगातार नजर रखें।
-लड़कों के साथ भी रेप की घटना पर चरचा करें। उन्हें महिलाओं के प्रति सम्मान करना सिखाएं।
-लड़कों में अपराध की सजा के बारे में डर भी पैदा करें।
-आसपास कोई आवारा लड़का है, जिसकी हरकतें ठीक नहीं हैं, उसके बारे में पुलिस को बताएं।
युवतियां दें विशेष ध्यान.. सेफ्टी में ये आएंगी काम...
-युवतियां अपने बैग में स्प्रे, चाकू, कैंची, सेफ्टी पिन, मिर्च पाउडर बैग में जरूर रखें।
-इन चीजों को चलाने की प्रैक्टिस होनी चाहिए, ताकि इमरजेंसी पर वे इसका इस्तेमाल कर सकें।
-चिल्लाना आना चाहिए। मुसीबत पर चिल्लाएं जरूर ना कि चुप्पी साधें। चिल्लाने से अपराधी में डर पैदा होता है।
-अपराधों से बचाव के उपाय आप न जानते हों तो बेझिझक चंडीगढ़ पुलिस से संपर्क करें।
-पुलिस आपकी मदद करेगी और वे स्कूल या सेक्टर में आकर काउंसिलिंग सेशन आयोजित करेगी।
कोट
लड़कियों को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उनकी सुरक्षा को लेकर पुलिस जगह जगह मुस्तैद रहती है। साथ ही लड़कियों और महिलाओं को सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण जरूर लेना चाहिए, ताकि किसी भी मुसीबत का वह डटकर सामना कर सकें। पुलिस पिक एंड ड्राप की सुविधा भी मुहैया कराती है। कंट्रोल रूम पर कॉल कर इस सेवा का लाभ उठाया जा सकता है। हमारी कोशिश रहती है कि लड़कियों के कालेज व संस्थान के आसपास पुलिस की बराबर गश्त रहें। मुसीबत पर उनसे भी मदद ले सकती हैं।
-नीलांबरी विजय जगदले, एसएसपी चंडीगढ़
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