हरियाणाः आसमान से बरसी आफत में बर्बाद हुईं 1933 करोड़ की फसलें
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हरियाणा में पिछले ढाई साल में पांच फसलीय सीजन के दौरान प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। ओलावृष्टि, जलभराव व अन्य तरह की आपदाओं ने किसानों की करोड़ों रुपये की फसल को बर्बाद कर दिया है।
इस दौरान सिरसा के किसानों को आपदाओं की सबसे ज्यादा मार पड़ी है। जबकि भिवानी, हिसार, जींद व फतेहाबाद में किसानों का नुकसान कम नहीं है।
हरियाणा सरकार ने भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत इन किसानों को मुआवजा दिलवाकर उनके जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है। मगर वे किसान जो इस योजना के दायरे से बाहर रह गए, उनके नुकसान की भरपाई फिलहाल लटकी हुई है।
वर्ष 2016 के खरीफ से लेकर वर्ष 2018 के खरीफ सीजन की समाप्ति तक (कुल पांच सीजन) यदि देखें तो इस दौरान हरियाणा में बेमौसमी बारिश का कहर किसानों की फसलों पर बहुत ज्यादा टूटा है।
बेमौसमी बारिश से लो लाइंग एरिया के खेतों में कई दिनों तक बरसाती पानी जमा रहता और फसलों को खराब देता था। इन ढाई सालों में देखें तो प्रदेशभर के सभी जिलों में किसानों की करीब 1933.06 करोड़ रुपये की फसलें बर्बाद हुई।
सरकार ने लगाया मुआवजे का मरहम
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2016 से वर्ष 2018 तक (तीन खरीफ और दो रबी सीजन) सिरसा में किसानों को बर्बाद हुई फसलों के 529.11 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिलवाए। इसी तरह भिवानी में किसानों को 290.83 करोड़, फरीदाबाद में 2.06 करोड़, कुरुक्षेत्र में 65.94 करोड़, कैथल में 64.27 करोड़, पंचकूला में 3.04 करोड़, रेवाड़ी में 42.61 करोड़, हिसार में 273.14 करोड़, सोनीपत में 64.24 करोड़, गुरुग्राम में 10.33 करोड़, करनाल में 57.81 करोड़, अंबाला में 51.14 करोड़, जींद में 137.72 करोड़, महेंद्रगढ़ में 31.06 करोड़, फतेहाबाद में 153.31 करोड़, रोहतक में 34.27 करोड़, झज्जर में 31.42 करोड़, मेवात में 10.62 करोड़, पलवल में 24.20 करोड़, पानीपत में 10.20 करोड़, यमुनानगर में 17.42 करोड़ व चरखीदादरी में 28.32 करोड़ रुपये किसानों को फसलों के बर्बाद होने पर बतौर मुआवजे वितरित किए। ये मुआवजा उन किसानों को मिला जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत कवर हुए।
हरियाणा सरकार किसानों को लेकर बहुत ज्यादा फिक्रमंद है। जिन किसानों की फसलें प्राकृतिक आपदाओं की वजह से बर्बाद हुई है। उन्हे मुआवजे दिलवाने को लेकर सरकार पूरी तरह से गंभीर है। किसानों से आह्वान है कि वे अपनी फसलों को बीमा योजना केदायरे में लेकर आए।
-ओमप्रकाश धनखड़, कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री