जानिए, कैसे पकड़ा गया यूपी का खूंखार बदमाश भूरा?
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पांच राज्यों की पुलिस की ओर से वांटेड यूपी का कुख्यात गैंगस्टर अमित मलिक उर्फ भूरा देहरादून पुलिस की कस्टडी से फरारी के बाद से फर्जी आईडी प्रूफ पर हरियाणा में अलग-अलग जगहों पर ठिकाने बनाकर रह रहा था।
पटियाला पुलिस ने शनिवार को भूरा की उसके साथी सचिन खोखर उर्फ मोनू के साथ गिरफ्तारी के बाद उससे सात फर्जी आईडी प्रूफ बरामद किए हैं, जिनमें आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक भूरा पंजाब में कोई बड़ी वारदात करने की तैयारी में था। दोनों से पूछताछ की जा रही है।
भूरा व उसके साथी सचिन के खिलाफ थाना सदर पटियाला में केस दर्ज किया है। दोनों आरोपियों ने इशारे के बावजूद अपनी स्कार्पियो गाड़ी नहीं रोकी और नाके पर तैनात पुलिस मुलाजिमों को कुचलने की कोशिश की।
नाका लगाकर पकड़ा था भूरा को
एसएसपी गुरमीत सिंह चौहान, एसपी (डी) जसकिरन जीत सिंह तेजा, सीआईए स्टाफ इंचार्ज विक्रमजीत सिंह बराड़ ने बताया कि पुलिस पार्टी ने शनिवार को शाम करीब चार बजे पुली सुआ महिमदपुर जट्टां बहादुरंगढ़ घन्नौर रोड पर नाका लगाया था।
सूचना के आधार पर जब घन्नौर साइड से आती एक सफेद रंग की स्कार्पियो कार को रुकने का इशारा किया, तो चालक ने कार को पुलिस वालों पर चढ़ाकर उन्हें कुचलने की कोशिश की और नाका तोड़ते आगे बढ़ गए।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए कार सवार दो नौजवानों को धर लिया। कार को चलाने वाला अमित मलिक उर्फ भूरा निवासी था, जिसके पास पुलिस को भूरा की फोटो वाला रोहित वर्मा के नाम का आधार कार्ड, भूरा की ही फोटो वाला विपिन के नाम का ड्राइविंग लाइसेंस और उसके साथी सचिन की तलाशी से उसकी फोटो वाला रजनीश के नाम का आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए हैं, जो जाली पाए गए हैं। वहीं कुछ अन्य जाली आईडी प्रूफ भी मिले हैं। स्कार्पियो कार पर लगा नंबर भी जाली पाया गया है।
थाईलैंड भागने की फिराक में था भूरा
तीन माह 19 दिन तक पांच राज्य की पुलिस की नाक में दम कर देने वाला गैंगेस्टर अमित मलिक उर्फ भूरा अगर और थोड़े दिन नहीं पकड़ा जाता तो थाईलैंड भाग जाता। उसने फर्जी आईडी पर ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड बनवा लिया था। अब विदेश जाने के लिए उसकी तैयारी पासपोर्ट बनवाने की चल रही थी।
पटियाला में रविवार सुबह उससे हुई पुलिस पूछताछ में उसके इरादे सामने आए हैं। भूरा ने पंजाब पहुंचते ही अपने नाम बदलने शुरू कर दिए। किराये पर फ्लैट लेने के लिए उसने पहले अपना नाम रखा संजय। सचिन को बताया राजेश। तब वह लुधियाना में रहा। इसके बाद पटियाला आ गया।
यहां उसने अपना नाम बताया नितिन और मोनू का विपिन। वह मोनू को अपना भाई बताता था। पेशा पूछने पर कहते थे कि उनका प्रॉपर्टी का काम है, यहां जमीन देखने आए हैं। भूरा और मोनू के पास मोबाइल फोन था, लेकिन न तो इससे कॉल करते थे और न ही एसएमएस।
जब भूरा फरार हुआ था, तो व्हाट्स एप से मैसेज भेजता था, पंजाब पहुंचते ही उसने व्हाट्स एप की जगह अपने साथियों से बात करने के लिए वाइबर का इस्तेमाल किया। इसमें लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल होता है। इसकी बातचीत ट्रेस करना भी आसान नहीं है। भूरा को पुलिस के सर्विलांस की बारीक जानकारी है।