मोगा एनकाउंटरः 'नहीं चलाई पुलिस पर गोली'
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मोगा-कोटकपूरा बाईपास पर 25 जून को देर रात चंडीगढ़ पुलिस से मुठभेड़ में काबू किए गए मुलजिमों को सिविल अस्पताल में पुलिस रिकार्ड में गिरफ्तारी से पहले हथकड़ी लगाकर पुलिस पहरे में रखा गया है।
मुठभेड़ में मामूली घायल दोनों आरोपियों को देर शाम तक भी अदालत में पेश नहीं किया गया। मामले की जांच से जुड़े थाना सिटी साउथ के एएसआई प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपियों को सिविल अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाएगा।
सीनियर मेडिकल अफ़सर डॉ. अरविंदर सिंह गिल ने कहा कि पुलिस ने इस बारे में उनके साथ संपर्क नहीं किया। दोनों आरोपियों को पुलिस जब चाहे ले जा सकती है।
न गोली चलाई, न हथियार बरामद हुआ
सिविल अस्पताल में पुलिस पहरे में बंद कैदी गुरचरन सिंह उर्फ रिंकू गांव चन्नूवाला और सुखपाल सिंह उर्फ खुशपिंदर सिंह गांव संगतपुरा ने बताया कि उन्होंने पुलिस पर कोई गोली नहीं चलाई और न ही उनके पास से कोई हथियार बरामद हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस पर गोली चलाने वाले लोगों से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्हें फंसाया गया है। मुठभेड़ में मारे गए सुखदेव सिंह और उनके निजी सहायक इंद्रजीत सिंह उर्फ गोरा के परिवारों ने डिप्टी कमिश्नर परमिंदर सिंह गिल और जिला पुलिस प्रमुख गुरशरन सिंह संधू से निजी तौर पर मिलकर इंसाफ की मांग की।
उन्होंने दोनों परिवारों को इंसाफ का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह मजिस्ट्रेट जांच में दखल नहीं देंगे। मृतक सुखदेव सिंह के बेटे गुरप्रीत सिंह और इंद्रजीत सिंह उर्फ गोरा के पिता छिंदर सिंह ने बताया कि मजिस्ट्रेट जांच में उनको इंसाफ न मिला तो वह दोनों परिवार मरनव्रत पर बैठेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस जांच पर उनको भरोसा नहीं है और वह सीबीआई जांच की मांग को लेकर अदालत में भी जाने से पीछे नहीं हटेंगे।
एनकाउंटर पर उठ रहे है सवाल
एनकाउंटर में मारे गए सुखदेव सिंह और इंद्रजीत सिंह का चंडीगढ़ पुलिस में दर्ज वारदात से कोई वास्ता नहीं है ऐसे में क्राइम ब्रांच द्वारा किए गए एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे है। जिस समय एनकाउंटर हुआ उस समय मोगा पुलिस का कोई कर्मचारी क्राइम ब्रांच के साथ नहीं था।
एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल का कहना है कि प्रतिदिन पुलिस की टीमें अलग अलग जगह पर आरोपियों की तलाश में जाती हैं। उनका कहना है कि पुलिस गिरफ्तार करने के लिए जाती है न कि एनकाउंटर करने के लिए।
गिल का कहना है कि मोगा में हुई वारदात के मामले में ज्यूडिश्यल जांच के आदेश हो चुके है ऐसे में वह इस मामले में ज्यादा टिप्पणी नहीं कर सकते।
ये था मामला
25 जून को देर शाम चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच के इंचार्ज इंस्पेक्टर रणजोध सिंह के नेतृत्व में सेक्टर 17 -चंडीगढ़ में 23 जून को दर्ज एफआईआर में नामजद आरोपी गुरचरन सिंह उर्फ रिंकू गांव चन्नूवाला, सुखपाल सिंह गांव संगतपुरा और छिंदर सिंह उर्फ गोगा गांव लंगेआना पुराना की गिरफ्तारी के लिए मोगा में थे।
इस दौरान मोगा-कोटकपूरा बाईपास पर दो तरफा गोलीबारी में सब इंस्पेक्टर राजदीप सिंह और सिपाही सुरिंदर कुमार घायल हो गए। सुखदेव सिंह निवासी न्यू टाउन, मोगा और इंद्रजीत सिंह उर्फ गोरा गांव सिंघांवाला मारे गए थे।
मेरी हत्या करने आए थे हमलावर
अमेरिका में बैठे युवकों के इशारे पर हमलावर मेरी हत्या करने के लिए आए थे। ये कहना है हरपिंदर। उसने कहा कि उसकी किस्मत अच्छी थी कि जो पिस्तौल वह लेकर आए थे उसमें गोलियां नहीं थी। एक हमलावर ने तो उसके सिर पर पिस्तौल लगाकर ट्रिगर भी दबा दिया।
जब गोली नहीं चली तो हमलावर आपस में बात करने लग गए कि गोलियां तो कार में ही रह गई हैं। कार सेक्टर-22 स्थित पीजी के नीचे सड़क पर पार्क की गई थी। घायल हरपिंदर सिंह का कहना है कि सभी हमलावर शराब के नशे में थे।
जब हमलावर कार में गोलियां लेने के लिए गए तो एक पड़ोसी ने शोर मचा दिया और हमलावर वहां से भाग गए। हमलावर भागते हुए उसे धमकी दे गए कि इस घटना की जानकारी किसी को न दे।
मारपीट करके, सोना-नगदी लूटकर फरार हो गए
हरपिंदर का कहना है कि पिछले रविवार को रंजिश का बदला लेने के लिए सेक्टर-22 में बंधक बनाकर मारपीट, कपड़े उतार कर वीडियो बनाया, सोने की चेन और नगदी लूट कर मौके से हमलावर फरार हो गए थे।
आरोपियों में गुरचरण सिंह, शुभपाल और खुशपिंद्र सिंह सहित अन्य का नाम शामिल हैं। गुरचरण सिंह और खुशपिंद्र सिंह इस समय मोगा पुलिस की गिरफ्त में हैं। हरपिंदर सिंह ने पुलिस को बताया कि हमलावर उनके पीजी में दीवार फांद कर आए थे।
हमलावरों ने हरपिंदर और उसके दोस्त के मुंह में कपड़े भी ठूस दिए और बेस बाल के डंडे से उन्हें पीटा। सूत्रों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने में क्राइम ब्रांच के ही एक कर्मचारी ने शिकायतकर्ता की मदद की थी।