'साधुओं की नपुंसकता के पीछे राम रहीम तो नहीं'
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डेरा सच्चा सौदा में साधुओं को कथित तौर पर नपुंसक बनाने की सीबीआई जांच की मांग पर हाईकोर्ट न हरियाणा सरकार को जांच का निर्देश दिया है। सरकार से पूछा है कि वह पता लगाए कि नपुंसक बनाने के पीछे कहीं डेरा मुखी का हाथ तो नहीं है।
जस्टिस के. कानन ने जांच की स्थिति रिपोर्ट एक महीने में ही पेश करने का निर्देश दिया है। सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। डेरे के पूर्व श्रद्धालू हंसराज चौहान ने एडवोकेट नवकिरन सिंह के माध्यम से याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम श्रद्धालुओं को यह कहकर नपुंसक बनाते हैं कि ऐसा करने से श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
चौहान ने 166 साधुओं की सूची भी हाईकोर्ट में पेश की थी। इन्हें नपुंसक बनाने का आरोप है। हाईकोर्ट चौहान समेत आठ साधुओं की जांच करवा चुकी है, वह नपुंसक निकले थे।
हाईकोर्ट में पेशियों का रिकार्ड तलब
इसी मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। आरोप लगाया था कि जो साधु प्रेरणा से नपुंसक बन सकते हैं, वह कुछ भी कर सकते हैं। इन्हीं साधुओं में से कुछेक पर आरोप लगाया गया कि पत्रकार छत्रपति कत्ल केस में इनका हाथ था।
पिछली सुनवाई पर चौहान ने अर्जी देकर आरोप लगाया था कि डेरामुखी को राजनीतिक शरण है और मौजूदा प्रदेश सरकार बनाने में भी उन्होंने भाजपा की मदद की। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस अर्जी पर नोटिस जारी हुआ था और एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने बेंच से कहा कि सरकार निष्पक्ष जांच करने को तैयार है।
इसी पर बेंच ने सरकार को जांच कर महीनावार स्थिति रिपोर्ट देने को कहा है। जांच की जानी है कि यह साधु नपुंसक किन हालातों में बने और क्या इसके पीछे गुरमीत राम रहीम का हाथ है।
हाईकोर्ट ने डेरामुखी के खिलाफ चल रहे ट्रायल में पेशियों का रिकार्ड तलब किया था। डेरामुखी के वकील एसकेगर्ग नरवाणा ने कहा कि यदि बेंच आदेश दे तो राम रहीम ट्रायल के दौरान निजी तौर पर पेश होने को तैयार हैं।