एक साथ जिंदा जल गए मां-बाप, बेटा-बेटी
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गांव रंगरूटीखेड़ा में शुक्रवार रात एक कमरे में सो रहे परिवार के चार लोग आग लगने से जिंदा जल गए। मरने वालों में दंपति समेत उनका बेटा और बेटी शामिल है।
घटना का पता उस समय लगा जब शनिवार करीब ग्यारह बजे मृतक सुरेंद्र की बहन कृष्णा यह देखने के लिए कमरे में दाखिल हुई कि आखिर ग्यारह बजे तक भैंस धूप में क्यों बंधी है। आंगन पार कर जब वह उस कमरे तक पहुंची तो वहां का मंजर देखकर वह स्तब्ध रह गई।
चारों के शव जल चुके थे और कमरे से धुआं निकल रहा था। आग लगने का कारण बीडी-सिगरेट सुलगना बताया जा रहा है। मृतकों में सुरेंद्र (42), उसकी पत्नी ऊषा (40), बेटा अनुज (10) व बेटी अंजलि (6) सहित परिवार के चार लोग शामिल हैं।
पति-पत्नी धूम्रपान के आदी थे
घटना की सूचना असंध पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही डीएसपी असंध श्याम लाल दलबल सहित मौके पर पहुंचे। एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। जिस कमरे में चारों सो रहे थे उसमें रखे रसोई गैस सिलेंडर का रेग्यूलेटर उतरा था व सिलेंडर में रिसाव की संभावना नहीं है।
सिलेंडर में रखी गैस पूरी तरह से सुरक्षित थी। यही नहीं कमरे से केरोसिन व पेट्रोल सहित किसी भी अन्य केमिकल के प्रयोग होने व आग लगने के भी कोई संकेत नजर नहीं आए। शॉर्ट सर्किट से आग लगने के संकेत घटनास्थल पर नहीं मिले।
प्रारंभिक साक्ष्यों से नजर आ रहा है कि पति-पत्नी धूम्रपान के आदी थे। सोते समय बीड़ी-सिगरेट सुलगने से आग लगने व कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस के चारों ओर फैलने से हादसा हुआ। आग पहले चारपाई और बिस्तर में लगी। आग से चारों बुरी तरह से जल गए।
धुएं की वजह से दम घुटने से मौत हो गई
फोरेंसिक विभाग की सहायक निदेशक कमलेश गिल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तो धुएं की वजह से दम घुटने से मौत हो गई व बाद में शव जलने की संभावना नजर आ रही है। उन्होंने इसमें किसी प्रकार की साजिश से इंकार किया है।
इस बारे में असंध (करनाल) के डीएसपी श्याम लाल ने बताया कि मौके पर पुलिस ने पहुंचकर हालात का जायजा लिया। अधजले शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रोहतक पीजीआई भेजे गए। जांच के बाद ही कुछ कार्रवाई की जा सकती है।