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भाजपा काउंसलर सतीश कैंथ को कोर्ट से झटका, जमानत याचिका रद्द
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Wed, 15 Jun 2016 02:55 PM IST
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satish kainth
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हल्लोमाजरा में विधवा का प्लॉट कब्जाने के मामले में फंसे भाजपा काउंसलर सतीश कैंथ की जमानत याचिका रद्द हो गई है। बीते दिन कैंथ की ओर से दायर नियमित जमानत याचिका पर सेक्टर-31 थाना पुलिस ने जवाब दाखिल किया था। पुलिस और शिकायतकर्ता पक्ष ने कैंथ की जमानत का विरोध किया है। सोमवार को दोनों पक्षों में जमानत के लिए लंबी बहस के
बाद अदालत ने फैसला 15 जून के लिए सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को कोर्ट ने जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे रद्द कर दिया।
गौरतलब है कि 10 जून को सतीश कैंथ के वकील गगन अग्रवाल ने जमानत याचिका दायर की थी। सोमवार को पुलिस के जवाब के बाद दोनों पक्षों में बहस हुई थी। पुलिस ने कैंथ की जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया है। गैर कानूनी तरीके से यह प्रॉपर्टी हथियाने के पीछे कैंथ का ही दिमाग है। जमीन पर कब्जा जमाने के लिए आरोपी ने सरकारी कर्मियों की मिलीभगत से सरकारी दस्तावेजों में गड़बड़ी कराई है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि पंजाब न्यू (पेरीफेरी) कंट्रोल एक्ट, 1952 की धारा 12 के तहत संबंधित कंस्ट्रक्शन को तोड़ने के 22 फरवरी, 2011 को आदेश जारी हुए थे। लेकिन, कैंथ ने पद और पावर का दुरुपयोग करते हुए इन आदेश पर कार्रवाई नहीं होने दी। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि उस वक्त करीब 4000 घरों को नोटिस हुए थे। अकेले कैंथ के घर को तोड़ने के नहीं, लेकिन उनमें से एक के भी घर पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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वहीं पुलिस ने कहा है कि अगर कैंथ को जमानत दी गई तो वह बाहर आकर जांच को प्रभावित कर सकते हैं। वैसे भी अभी दोनों सहआरोपी फरार हैं। इसके जवाब में कैंथ के वकील गगन अग्रवाल ने दलील दी कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया है। उनके खिलाफ आपराधिक ट्रैसपासिंग की धारा नहीं बनती। जिस जमीन को लेकर विवाद है, उसकी जीपीए और रजिस्ट्री कैंथ के पिता और पत्नी के नाम है। ऐसे में उनकी कोई भूमिका नहीं है। किसी अन्य का आपराधिक दायित्व दूसरे पर नहीं डाला जा सकता।
अग्रवाल ने दलील दी कि, जिस जमीन के खसरा नंबर को लेकर विवाद है उसके पार्टीशन को लेकर कोर्ट में सिविल सूट दायर करना चाहिए था। लैंड एक्वीजिशन ऑफिसर (एलएओ) ने भी अपनी कानूनी राय में इसे सिविल प्रकृति का केस बताया था। उनके अनुसार कैंथ के पिता के पास 1998 से यह जमीन है और 2005 में उन्होंने कंस्ट्रक्शन शुरू किया था। वहीं 20 अगस्त 2014 की जमाबंदी में कोई जालसाजी नहीं की गई थी। बता दें कि सेक्टर-31 थाना पुलिस ने 14 मार्च 2016 को कैंथ सहित उनकी पत्नी जसवंत कौर और पिता सोहन लाल के खिलाफ केस दर्ज किया था। जिला अदालत और हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद सात जून को ही भाजपा काउंलसर कैंथ ने जिला अदालत में सरेंडर किया था।
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बाद अदालत ने फैसला 15 जून के लिए सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को कोर्ट ने जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे रद्द कर दिया।
गौरतलब है कि 10 जून को सतीश कैंथ के वकील गगन अग्रवाल ने जमानत याचिका दायर की थी। सोमवार को पुलिस के जवाब के बाद दोनों पक्षों में बहस हुई थी। पुलिस ने कैंथ की जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया है। गैर कानूनी तरीके से यह प्रॉपर्टी हथियाने के पीछे कैंथ का ही दिमाग है। जमीन पर कब्जा जमाने के लिए आरोपी ने सरकारी कर्मियों की मिलीभगत से सरकारी दस्तावेजों में गड़बड़ी कराई है।
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शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि पंजाब न्यू (पेरीफेरी) कंट्रोल एक्ट, 1952 की धारा 12 के तहत संबंधित कंस्ट्रक्शन को तोड़ने के 22 फरवरी, 2011 को आदेश जारी हुए थे। लेकिन, कैंथ ने पद और पावर का दुरुपयोग करते हुए इन आदेश पर कार्रवाई नहीं होने दी। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि उस वक्त करीब 4000 घरों को नोटिस हुए थे। अकेले कैंथ के घर को तोड़ने के नहीं, लेकिन उनमें से एक के भी घर पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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वहीं पुलिस ने कहा है कि अगर कैंथ को जमानत दी गई तो वह बाहर आकर जांच को प्रभावित कर सकते हैं। वैसे भी अभी दोनों सहआरोपी फरार हैं। इसके जवाब में कैंथ के वकील गगन अग्रवाल ने दलील दी कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया है। उनके खिलाफ आपराधिक ट्रैसपासिंग की धारा नहीं बनती। जिस जमीन को लेकर विवाद है, उसकी जीपीए और रजिस्ट्री कैंथ के पिता और पत्नी के नाम है। ऐसे में उनकी कोई भूमिका नहीं है। किसी अन्य का आपराधिक दायित्व दूसरे पर नहीं डाला जा सकता।
अग्रवाल ने दलील दी कि, जिस जमीन के खसरा नंबर को लेकर विवाद है उसके पार्टीशन को लेकर कोर्ट में सिविल सूट दायर करना चाहिए था। लैंड एक्वीजिशन ऑफिसर (एलएओ) ने भी अपनी कानूनी राय में इसे सिविल प्रकृति का केस बताया था। उनके अनुसार कैंथ के पिता के पास 1998 से यह जमीन है और 2005 में उन्होंने कंस्ट्रक्शन शुरू किया था। वहीं 20 अगस्त 2014 की जमाबंदी में कोई जालसाजी नहीं की गई थी। बता दें कि सेक्टर-31 थाना पुलिस ने 14 मार्च 2016 को कैंथ सहित उनकी पत्नी जसवंत कौर और पिता सोहन लाल के खिलाफ केस दर्ज किया था। जिला अदालत और हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद सात जून को ही भाजपा काउंलसर कैंथ ने जिला अदालत में सरेंडर किया था।