Chandigarh: कामकाजी महिलाओं की परेशानी नहीं समझता यूटी प्रशासन, सरकारी कार्यालयों में क्रेच तक नहीं
यूटी सचिवालय से शहर के सभी आदेश जारी होते हैं। आईएएस, पीसीएस, एचसीएच समेत तमाम अधिकारी बैठते हैं, वहां भी क्रेच की सुविधा नहीं है।
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चंडीगढ़ यूटी सचिवालय में काम करने वाली पूजा का चार साल का बेटा है। पति प्राइवेट नौकरी करते हैं। दोनों को दफ्तर जाना होता है। दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे की देखभाल की है। कई बार उन्हें बच्चे को घर में अकेला छोड़ना पड़ जाता है। इस दंपती का कहना है कि स्कूल की छुट्टी के बाद उन्हें बच्चे की ही चिंता लगी रहती है।
यह सिर्फ पूजा की परेशानी नहीं है। शहर में ऐसी हजारों माताएं हैं जो नौकरीपेशा हैं और एकल परिवार में रहती हैं। केंद्र सरकार के मैटरनिटी बेनिफिट (अमेंडमेंट) एक्ट 2017 के तहत उन कार्यालयों में क्रेच की सुविधा का प्रावधान किया है जहां 50 या उससे ज्यादा महिला कर्मचारी हैं लेकिन स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ के ज्यादातर कार्यालयों में यह सुविधा नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सचिवालय से शहर के सभी आदेश जारी होते हैं। आईएएस, पीसीएस, एचसीएच समेत तमाम अधिकारी बैठते हैं, वहां भी क्रेच की सुविधा नहीं है। कुछ साल पहले प्रपोजल जरूर बना था। जगह भी देखी गई थी लेकिन बाद में प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यही स्थिति नगर निगम की है। सीएचबी की नई इमारत में क्रेच के लिए जगह चिह्नित की गई है। गेट पर लिखा भी गया है लेकिन कमरा खाली है। चंडीगढ़ के अन्य महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तरों का भी हाल यही है। सवाल यह भी है कि जब सरकारी दफ्तरों में क्रेच नहीं है तो शहर के निजी दफ्तरों से उम्मीद कैसे कर सकते हैं।
अमर उजाला ने जानी सरकारी दफ्तरों में क्रेच की हकीकत
अमर उजाला ने शहर के कई कार्यालयों का दौरा किया और जाना कि कहां क्रेच की सुविधा है और कहां नहीं। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि सिर्फ प्रशासन के तहत आने वाले विभागों में 25 हजार कर्मचारी हैं। इनमें महिलाएं लगभग एक तिहाई हैं। कई दफ्तर ऐसे हैं जहां महिलाओं की संख्या 100 से भी ज्यादा है, उसके बाद भी वहां क्रेच की सुविधा नहीं है।
प्रशासन ने भी माना- कर्मचारियों की उत्पादकता में होगा सुधार
यूटी प्रशासन ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी कार्य स्थल पर क्रेच के महत्व के बारे में बताया है। कहा गया है कि कामकाजी माता-पिता के लिए शहर में एक सुरक्षित और सुसज्जित क्रेच की आवश्यकता है। 300 से अधिक कर्मचारियों वाले सरकारी कार्यालय और 100 से अधिक कर्मचारियों वाले निजी कार्यालय परिसर में एक क्रेच प्रदान करने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि इससे कर्मचारियों की उत्पादकता में सुधार होगा।
इन विभागों में नहीं है क्रेच
यूटी सचिवालय, नगर निगम, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, शिक्षा निदेशालय, एस्टेट ऑफिस। इसके अलावा शहर के अन्य कई निदेशालय और कार्यालयों में क्रेच की व्यवस्था नहीं है।
यहां है सुविधा
कुछ विभाग ऐसे हैं जहां क्रेच की सुविधा उपलब्ध है। इनमें पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर, आयकर भवन, पुलिस लाइन समेत अन्य कई दफ्तर शामिल हैं।
यह है नियम
मैटरनिटी बेनिफिट (अमेंडमेंट) एक्ट 2017 के तहत सभी सरकारी, गैर सरकारी और फैक्ट्री में जहां कुल कर्मचारियों की संख्या 50 या उससे ज्यादा है, वहां महिलाओं के लिए क्रेच की सुविधा होनी चाहिए।
मैटरनिटी बेनिफिट (अमेंडमेंट) एक्ट 2017 के तहत क्रेच में ये सुविधाएं जरूरी
- क्रेच का समय कार्यालय के समयानुसार हो, क्रेच कम से कम 8 से 10 दस घंटे खुले
- क्रेच भूमि तल पर हो, यहां पक्का निर्माण हो
- यहां बच्चों की जरूरत का सारा सामान मौजूद हो। साथ ही बच्चों की पूरी जानकारी रजिस्टर में मेंटेन की जाए
- क्रेच के बाहर सुरक्षाकर्मी की व्यवस्था हो, जिसका पुलिस सत्यापन किया गया हो
- हर आने जाने वाले को पास दिया जाए और पूरे क्रेच में सीसीटीवी कैमरे लगे हों
केंद्र सरकार के नियमों का सभी विभागों को पालन करना चाहिए। यूटी सचिवालय की जो नई इमारत बन रही है उसमें क्रेच की सुविधा होगी। अन्य विभागों के दफ्तर में भी इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक