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कोविड तो सिर्फ बहाना है.. सीनेट खत्म कर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस बनाने के लिए टाले जा रहे चुनाव
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट के चुनाव टाले जाने के बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का बहाना बनाकर चुनाव जानबूझकर टाले जा रहे हैं। पीयू प्रशासन की ओर से यूटी प्रशासन का आदेश बोलकर चुनाव को स्थगित कराने के पीछे कोई न कोई राज छुपा हुआ है। विशेषज्ञों ने बताया कि पीयू में अंदर खाते सीनेट खत्म कर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस बनाने की चर्चा चल रही है। इसी कारण पीयू सीनेट सदस्यों को चुनावों को लेकर वीसी की तरफ से कोई तय समय नहीं बताया जा रहा है और टालमटोल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि दिसंबर तक अगर चुनाव टाले जाते हैं तो उसके बाद नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड ऑफ गवर्नेंस ही पीयू में सर्वेसर्वा होगा।
पीयू में वीसी और एक पार्टी विशेष सदस्यों का मानना है कि अभी स्वास्थ्य प्राथमिकता है। कोविड संक्रमण को देखते हुए वीसी यूटी प्रशासन के फैसले के अनुसार ही चल रहे हैं। अगर यूटी प्रशासन चुनाव करवाने की अनुमति नहीं देता है तो चुनाव स्थगित किए जाएंगे। हालांकि शनिवार को रजिस्ट्रार की ओर से यूटी प्रशासन के चुनाव नहीं करवाने के फैसले के बाद दूसरे गुट के सीनेटरों ने मिलकर प्रशासक को पत्र लिखा। सीनेटरों ने प्रशासन की ओर से जांच के बाद दिए गए शनिवार के फैसले पर भी संदेह जताया है। उनका कहना था कि शुक्रवार को डिप्टी कमिश्नर ऑफिस से पीयू की ओर से राय मांगी गई थी। वहीं वीरवार को पत्र प्रशासक के दफ्तर और प्रशासक के सलाहकार को भेजा गया था। सिर्फ एक ही दिन में प्रशासन ने पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों की राय लेकर अंतिम जवाब के रूप में चुनावों को लेकर ना बोल दिया जबकि पुटा चुनाव के दौरान जवाब देने में हफ्ते से दस दिन का समय लगाया था। इससे संदेह होता है कि यूटी प्रशासन और पीयू के बीच चुनाव नहीं करवाने को लेकर अंदर खाते कुछ राजनीति चल रही है।
क्या कहते हैं सीनेट सदस्य
बिहार में करोड़ों जनता के बीच चुनाव हो सकते हैं, यहां इतना खौफ क्यों
लगभग एक साल से सीनेट बैठक नहीं बुलवाई गई है। इस कारण विद्यार्थियों के परीक्षा का फैसला भी ढंग से नहीं हो पाया। अब परीक्षा परिणामों को लेकर विद्यार्थियों को भटकना पड़ रहा है। पीयू की ओर से विद्यार्थियों को उनकी समस्याओं को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है। जब अनलॉक -5 के दिशा निर्देशों के तहत करोड़ों की जनता के बीच बिहार चुनाव हो सकते हैं, फिर 100 से भी कम संख्या के लोगों के सीनेट चुनाव में कोरोना को इतना खौफ क्यों बनाया जा रहा है।
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-प्रो. इंदरपाल सिद्धू, सीनेटर
जब शोधार्थी आ सकते हैं तो चुनाव क्यों नही हो सकते
पीयू और कॉलेजों में शोषर्थियों को भी आने की अनुमति दे दी गई है। बच्चों के लिए स्कूल भी खोले जा रहे हैं। फिर सीनेट चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमण का बहाना क्यों बनाया जा रहा है। सीनेट और सिंडिकेट की बैठक नहीं करवाना और अब चुनावों को अकारण स्थगित करने के कारण पीयू कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों में पिछड़ जाएगा। प्रशासनिक फैसले समय से नहीं होने का नुकसान विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रो. रूबिंदरनाथ, सीनेटर
इस समय स्वास्थ्य ही प्राथमिकता
हम यूटी प्रशासन के फैसले के साथ में हैं। यह हमारे स्वास्थ्य के हित में ही है। कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है, ऐसे में परहेज ही एकमात्र उपाय है। सभी को इसे हराने के लिए मिलजुलकर काम करना चाहिए। यह तभी होगा जब सभी सामाजिक दूरी का पालन करेेंगे।
प्रो. सुभाष, सीनेटर
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पीयू में वीसी और एक पार्टी विशेष सदस्यों का मानना है कि अभी स्वास्थ्य प्राथमिकता है। कोविड संक्रमण को देखते हुए वीसी यूटी प्रशासन के फैसले के अनुसार ही चल रहे हैं। अगर यूटी प्रशासन चुनाव करवाने की अनुमति नहीं देता है तो चुनाव स्थगित किए जाएंगे। हालांकि शनिवार को रजिस्ट्रार की ओर से यूटी प्रशासन के चुनाव नहीं करवाने के फैसले के बाद दूसरे गुट के सीनेटरों ने मिलकर प्रशासक को पत्र लिखा। सीनेटरों ने प्रशासन की ओर से जांच के बाद दिए गए शनिवार के फैसले पर भी संदेह जताया है। उनका कहना था कि शुक्रवार को डिप्टी कमिश्नर ऑफिस से पीयू की ओर से राय मांगी गई थी। वहीं वीरवार को पत्र प्रशासक के दफ्तर और प्रशासक के सलाहकार को भेजा गया था। सिर्फ एक ही दिन में प्रशासन ने पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों की राय लेकर अंतिम जवाब के रूप में चुनावों को लेकर ना बोल दिया जबकि पुटा चुनाव के दौरान जवाब देने में हफ्ते से दस दिन का समय लगाया था। इससे संदेह होता है कि यूटी प्रशासन और पीयू के बीच चुनाव नहीं करवाने को लेकर अंदर खाते कुछ राजनीति चल रही है।
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क्या कहते हैं सीनेट सदस्य
बिहार में करोड़ों जनता के बीच चुनाव हो सकते हैं, यहां इतना खौफ क्यों
लगभग एक साल से सीनेट बैठक नहीं बुलवाई गई है। इस कारण विद्यार्थियों के परीक्षा का फैसला भी ढंग से नहीं हो पाया। अब परीक्षा परिणामों को लेकर विद्यार्थियों को भटकना पड़ रहा है। पीयू की ओर से विद्यार्थियों को उनकी समस्याओं को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है। जब अनलॉक -5 के दिशा निर्देशों के तहत करोड़ों की जनता के बीच बिहार चुनाव हो सकते हैं, फिर 100 से भी कम संख्या के लोगों के सीनेट चुनाव में कोरोना को इतना खौफ क्यों बनाया जा रहा है।
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-प्रो. इंदरपाल सिद्धू, सीनेटर
जब शोधार्थी आ सकते हैं तो चुनाव क्यों नही हो सकते
पीयू और कॉलेजों में शोषर्थियों को भी आने की अनुमति दे दी गई है। बच्चों के लिए स्कूल भी खोले जा रहे हैं। फिर सीनेट चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमण का बहाना क्यों बनाया जा रहा है। सीनेट और सिंडिकेट की बैठक नहीं करवाना और अब चुनावों को अकारण स्थगित करने के कारण पीयू कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों में पिछड़ जाएगा। प्रशासनिक फैसले समय से नहीं होने का नुकसान विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रो. रूबिंदरनाथ, सीनेटर
इस समय स्वास्थ्य ही प्राथमिकता
हम यूटी प्रशासन के फैसले के साथ में हैं। यह हमारे स्वास्थ्य के हित में ही है। कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है, ऐसे में परहेज ही एकमात्र उपाय है। सभी को इसे हराने के लिए मिलजुलकर काम करना चाहिए। यह तभी होगा जब सभी सामाजिक दूरी का पालन करेेंगे।
प्रो. सुभाष, सीनेटर