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बेटियों के साथ छेड़छाड़ केस में कोर्ट के फैसले के बाद पिता ने दिया बड़ा बयान, जानिए
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Sun, 05 Mar 2017 09:15 AM IST
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रोहतक सिस्टर्स
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बेटियों के साथ चलती बस में छेड़छाड़ केस में सवा दो साल बाद कोर्ट का फैसला आने के बाद पिता ने भी बड़ा बयान दिया और बरी किए गए युवकों को चेतावनी दी। शुक्रवार को रोहतक की अदालत ने मामले में आरोपी युवकों को बरी कर दिया तो लड़कियों के पिता ने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला है। फैसले के खिलाफ अब वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
वर्ष 2014 में बस में युवकों की पिटाई कर थाना कलां गांव की दो बहनें सुर्खियों में आईं थीं। हरियाणा रोडवेज की बस में बहनों ने छेड़छाड़ का आरोप लगाकर लड़कों पर जमकर बेल्ट बरसाईं थीं। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिससे मामला देशभर में चर्चित हो गया था। मामले में रोहतक पुलिस ने लड़कियों की शिकायत पर रोहतक के गांव आसण निवासी युवकों पर मामला दर्ज किया था।
यहां तक की हरियाणा राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने भी दोनों बहनों को सम्मानित किया था। मामले में शुक्रवार को आरोपी युवकों को रोहतक की कोर्ट ने बरी कर दिया तो दोनों लड़कियों के पिता राजेश चौंक गए। इस बारे में उनके पिता राजेश कुमार ने कहा कि उनको दोपहर बाद तक फैसले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उनको शाम के समय इस बारे में बताया गया। व
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ह फैसले से काफी हताश हैं, क्योंकि उनके साथ नाइंसाफी हुई है। उनको इंसाफ नहीं मिल जाता वह इस लड़ाई को जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि वह अपने वकील से संपर्क कर जल्द ही उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। वहीं, इस समय दोनों बहनें गुड़गांव में नौकरी कर रही हैं।
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वर्ष 2014 में बस में युवकों की पिटाई कर थाना कलां गांव की दो बहनें सुर्खियों में आईं थीं। हरियाणा रोडवेज की बस में बहनों ने छेड़छाड़ का आरोप लगाकर लड़कों पर जमकर बेल्ट बरसाईं थीं। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिससे मामला देशभर में चर्चित हो गया था। मामले में रोहतक पुलिस ने लड़कियों की शिकायत पर रोहतक के गांव आसण निवासी युवकों पर मामला दर्ज किया था।
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यहां तक की हरियाणा राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने भी दोनों बहनों को सम्मानित किया था। मामले में शुक्रवार को आरोपी युवकों को रोहतक की कोर्ट ने बरी कर दिया तो दोनों लड़कियों के पिता राजेश चौंक गए। इस बारे में उनके पिता राजेश कुमार ने कहा कि उनको दोपहर बाद तक फैसले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उनको शाम के समय इस बारे में बताया गया। व
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ह फैसले से काफी हताश हैं, क्योंकि उनके साथ नाइंसाफी हुई है। उनको इंसाफ नहीं मिल जाता वह इस लड़ाई को जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि वह अपने वकील से संपर्क कर जल्द ही उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। वहीं, इस समय दोनों बहनें गुड़गांव में नौकरी कर रही हैं।
गुरुग्राम में नौकरी कर रही हैं बहनें
रोहतक सिस्टर्स
‘रोहतक सिस्टर्स’आरती और पूजा फिलहाल गुरुग्राम में नौकरी कर रही हैं। मूलत: सोनीपत के थाना कलां गांव निवासी आरती और पूजा रोहतक में आईसी कॉलेज की छात्राएं थीं। इसी वजह से इस घटना के बाद वे रोहतक सिस्टर्स के नाम से चर्चित हुईं। छेड़छाड़ मामले में तीनों युवकों को आरोप मुक्त किए जाने के फैसले पर उनके पिता राजेश ने हैरानी जताई और कहा कि उनके साथ नाइंसाफी हुई है और लड़ाई को जारी रखेंगे।
इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। राजेश ने बताया कि दोपहर बाद तक इस फैसले के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा इस फैसले से हताशा हुई है, क्योंकि उनके साथ नाइंसाफी हुई है। आरती और पूजा प्रतिदिन बस से रोहतक में कॉलेज आती-जाती थीं। 28 नवंबर को रोहतक से बस में सवार हुई थीं। बस में दोनों बहनें पहले से ही रिजर्व सीट पर बैठ गईं।
बस में आसन गांव निवासी कुलदीप और मोहित भी सवार थे। एक बुजुर्ग महिला ने जब दोनों बहनों से सीट खाली करने को कहा तो वे भड़क गईं। इस बीच बस गांव भालौठ तक पहुंच गई। इसी दौरान वहां से आसन निवासी दीपक बस में चढ़ गया। लड़कियों को बुजुर्ग महिला के साथ बहस करते देख कुलदीप ने महिला का पक्ष लेते हुए सीट खाली करने के लिए कहा। मोहित और दीपक ने भी उसका साथ दिया। इस पर दोनों बहनों ने एक महिला को मोबाइल देकर वीडियो बनाने के लिए कहा और तीनों युवकों के साथ मारपीट करने लगीं।
इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। राजेश ने बताया कि दोपहर बाद तक इस फैसले के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा इस फैसले से हताशा हुई है, क्योंकि उनके साथ नाइंसाफी हुई है। आरती और पूजा प्रतिदिन बस से रोहतक में कॉलेज आती-जाती थीं। 28 नवंबर को रोहतक से बस में सवार हुई थीं। बस में दोनों बहनें पहले से ही रिजर्व सीट पर बैठ गईं।
बस में आसन गांव निवासी कुलदीप और मोहित भी सवार थे। एक बुजुर्ग महिला ने जब दोनों बहनों से सीट खाली करने को कहा तो वे भड़क गईं। इस बीच बस गांव भालौठ तक पहुंच गई। इसी दौरान वहां से आसन निवासी दीपक बस में चढ़ गया। लड़कियों को बुजुर्ग महिला के साथ बहस करते देख कुलदीप ने महिला का पक्ष लेते हुए सीट खाली करने के लिए कहा। मोहित और दीपक ने भी उसका साथ दिया। इस पर दोनों बहनों ने एक महिला को मोबाइल देकर वीडियो बनाने के लिए कहा और तीनों युवकों के साथ मारपीट करने लगीं।
दूसरा वीडियो आने के बाद बदला नजरिया
रोहतक सिस्टर्स
छेड़छाड़ के नाम पर तीनों युवकों की बेल्ट पिटाई की वीडियो वायरल होने के बाद आरती और पूजा युवतियों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरी थीं। लेकिन घटनाक्रम के चार दिन बाद एक और वीडियो वायरल हो गया। इसमें दोनों बहनें कुछ युवकों के साथ एक पार्क में मारपीट कर रही थीं। इस घटनाक्रम की भी वीडियो बनाई जा रही थी। इसके बाद से लोगों का इनके प्रति नजरिया कुछ बदल गया।
इतना ही नहीं सरकार ने भी इन्हें सम्मानित करने की घोषणा की थी,जिसे वापस ले ली। इसके बाद जांच के लिए डीएसपी यशपाल खटाना के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने 40 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। उनमें बस के ड्राइवर और कंडक्टर के अलावा उसमें सवार अन्य सवारियां शामिल थीं। सभी ने युवकों के पक्ष में बयान दर्ज कराए थे।
लड़कियों ने की थी लाई डिटेक्टर टेस्ट की मांग
एडवोकेट प्रदीप मलिक ने बताया कि मामले की जांच के दौरान दोनों सगी बहनों ने आरोपी लड़कों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग की थी। उनकी इस मांग को मान लिया गया। साथ ही दोनों बहनों का भी लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग की। उसके बाद अदालत के आदेश पर तीनों आरोपियों और दोनों बहनों का लाई डिटेक्टर टेस्ट सीबीआई की दिल्ली स्थित लेबोरेट्री में किया गया। टेस्ट में आरोपी सच और दोनों बहनें झूठी साबित हुईं।
इतना ही नहीं सरकार ने भी इन्हें सम्मानित करने की घोषणा की थी,जिसे वापस ले ली। इसके बाद जांच के लिए डीएसपी यशपाल खटाना के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने 40 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। उनमें बस के ड्राइवर और कंडक्टर के अलावा उसमें सवार अन्य सवारियां शामिल थीं। सभी ने युवकों के पक्ष में बयान दर्ज कराए थे।
लड़कियों ने की थी लाई डिटेक्टर टेस्ट की मांग
एडवोकेट प्रदीप मलिक ने बताया कि मामले की जांच के दौरान दोनों सगी बहनों ने आरोपी लड़कों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग की थी। उनकी इस मांग को मान लिया गया। साथ ही दोनों बहनों का भी लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग की। उसके बाद अदालत के आदेश पर तीनों आरोपियों और दोनों बहनों का लाई डिटेक्टर टेस्ट सीबीआई की दिल्ली स्थित लेबोरेट्री में किया गया। टेस्ट में आरोपी सच और दोनों बहनें झूठी साबित हुईं।