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दिल्ली बम धमाका: उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी भुल्लर को आठ सप्ताह की पैरोल, मानसिक हालत ठीक नहीं

Sat, 23 Sep 2023 12:05 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sat, 23 Sep 2023 12:05 AM IST
सार

11 सितंबर 1993 को दिल्ली के रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस मुख्यालय के पास हुए बम ब्लास्ट में नौ लोगों की मौत हो गई थी जबकि 30 लोग घायल हो गए थे। यह विस्फोट तत्कालीन युवा कांग्रेस अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा को निशाना बनाकर किया गया था।

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Court grants eight weeks parole to terrorist Davinderpal Singh Bhullar
दविंदरपाल सिंह भुल्लर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1993 के दिल्ली बम धमाके मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी दविंदरपाल सिंह भुल्लर को अदालत ने आठ सप्ताह की पैरोल दे दी है। उसे 21 सितंबर से 17 नवंबर तक पैरोल दी गई है। मानसिक हालत ठीक न होने के कारण उसे कड़ी सुरक्षा के बीच अमृतसर के स्वामी विवेकानंद नशा मुक्त केंद्र में रखा गया है। वहां उसका इलाज चल रहा है। 

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भुल्लर गांव दयालपुर भाईका का रहने वाला है। इस समय उसकी अमृतसर के सी ब्लॉक रंजीत एवेन्यू में रिहायश है। पैरोल के दौरान वह यहीं रहेगा। भुल्लर को दिल्ली बम ब्लास्ट मामले में पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी। बाद में सिख संगठनों की याचिका के चलते उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था। 
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11 सितंबर 1993 को दिल्ली के रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस मुख्यालय के पास हुए बम ब्लास्ट में नौ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 30 लोग घायल हो गए थे। यह विस्फोट तत्कालीन युवा कांग्रेस अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा को निशाना बनाकर किया गया था।

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इंजीनियर से बना था आतंकी

दविंदर पाल सिंह भुल्लर ने लुधियाना के गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। उसके पिता पंजाब के ऑडिट विभाग में सेक्शन अफसर और माता पंजाब ग्रामीण विकास में सुपरवाइजर थीं।



29 अगस्त 1991: चंडीगढ़ में एसएसपी सुमेध सिंह सैनी की कार को विस्फोट से उड़ा दिया गया था। इसमें एसएसपी का सुरक्षाकर्मी मारा गया। इसमें भी भुल्लर का नाम आया था। जांच के दौरान पाया गया कि वे खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के कट्टर समर्थक थे। बम धमाके के बाद भुल्लर जर्मनी चला गया और वहां की सरकार से राजनीतिक शरण मांगी लेकिन जर्मन सरकार ने उनकी अपील ठुकरा दी थी। इसके बाद उन्हें भारत प्रत्यार्पित कर दिया गया।

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