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सिटको में भर्ती के लिए नहीं अपनाई गई सही प्रक्रिया, विजिलेंस जांच की मांग
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चंडीगढ़। सिटको प्रोग्रेसिव वर्कर्स यूनियन ने चीफ विजिलेंस अधिकारी व प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल को पत्र लिखकर होटल शिवालिक में पिछले कई सालों से कार्य कर रहे एक कर्मचारी की भर्ती में गड़बड़ी की विजिलेंस से जांच की मांग की है। यूनियन का कहना है कि कर्मी की गलत तरीके से भर्ती की गई। कई साल बाद विभाग ने वर्ष 2011 में जांच शुरू की, लेकिन उसे अधूरा ही छोड़ दिया।
धर्मपाल को लिखे पत्र में यूनियन ने कहा कि कर्मचारी की भर्ती के लिए तय प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, जिसे लेकर वर्ष 2011 में जांच करवाई गई थी। जांच में विभाग ने कई गड़बड़ियां पकड़ी थीं, लेकिन विभाग ने जानबूझ कर जांच को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया। यही कारण है कि अब दोबारा उन्होंने मामले में विजिलेंस जांच करवाने की मांग की है। यूनियन के प्रधान प्रेम लाल ने कहा कि इसमें एक व्यक्ति को सिलेक्शन कमेटी ने पहले रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन बाद में उसे दोबारा प्रेेक्टिकल टेस्ट में शामिल कर लिया गया था। इसमें उसे प्रथम रैंक दिया गया, जिसकी जांच करने की जरूरत है। इसके अलावा संबंधित कर्मी द्वारा विभाग के पास जमा किए गए अनुभव प्रमाणपत्र में 13 दिन का मतभेद है, क्योंकि एक व्यक्ति एक वक्त में दो जगह काम नहीं कर सकता है और न ही अनुभव प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकता है। जबकि संबंधित कर्मी ने प्रमाण पत्र दिए हैं कि उसने दो अलग-अलग राज्यों के दो अलग-अलग होटल में एक साथ 13 दिन की ट्रेनिंग ली है। विभाग ने वर्ष 2011 की जांच में भी संदेहजनक माना था, लेकिन इसकी विस्तृत जांच नही की गई। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मी ने पहले ट्रेनिंग ली है, इसके बाद डिग्री हासिल की है। नियमों के अनुसार उस ट्रेनिंग का कोई महत्व नही है। इस लिहाज से संबंधित कर्मी की भर्ती गलत तरीके से की गई है। यूनियन ने मांग की है कि वर्ष 2011 की जांच को पूरा किया जाए और दोषी पाये जाने पर होटल शिवालिक के कर्मी पर जुर्माना लगाया जाए। यूनियन ने यह भी मांग की है कि जब तक जांच पूरी नही हो जाती, तब तक कर्मी को वर्तमान की सुविधाएं न दी जाएं।
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धर्मपाल को लिखे पत्र में यूनियन ने कहा कि कर्मचारी की भर्ती के लिए तय प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, जिसे लेकर वर्ष 2011 में जांच करवाई गई थी। जांच में विभाग ने कई गड़बड़ियां पकड़ी थीं, लेकिन विभाग ने जानबूझ कर जांच को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया। यही कारण है कि अब दोबारा उन्होंने मामले में विजिलेंस जांच करवाने की मांग की है। यूनियन के प्रधान प्रेम लाल ने कहा कि इसमें एक व्यक्ति को सिलेक्शन कमेटी ने पहले रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन बाद में उसे दोबारा प्रेेक्टिकल टेस्ट में शामिल कर लिया गया था। इसमें उसे प्रथम रैंक दिया गया, जिसकी जांच करने की जरूरत है। इसके अलावा संबंधित कर्मी द्वारा विभाग के पास जमा किए गए अनुभव प्रमाणपत्र में 13 दिन का मतभेद है, क्योंकि एक व्यक्ति एक वक्त में दो जगह काम नहीं कर सकता है और न ही अनुभव प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकता है। जबकि संबंधित कर्मी ने प्रमाण पत्र दिए हैं कि उसने दो अलग-अलग राज्यों के दो अलग-अलग होटल में एक साथ 13 दिन की ट्रेनिंग ली है। विभाग ने वर्ष 2011 की जांच में भी संदेहजनक माना था, लेकिन इसकी विस्तृत जांच नही की गई। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मी ने पहले ट्रेनिंग ली है, इसके बाद डिग्री हासिल की है। नियमों के अनुसार उस ट्रेनिंग का कोई महत्व नही है। इस लिहाज से संबंधित कर्मी की भर्ती गलत तरीके से की गई है। यूनियन ने मांग की है कि वर्ष 2011 की जांच को पूरा किया जाए और दोषी पाये जाने पर होटल शिवालिक के कर्मी पर जुर्माना लगाया जाए। यूनियन ने यह भी मांग की है कि जब तक जांच पूरी नही हो जाती, तब तक कर्मी को वर्तमान की सुविधाएं न दी जाएं।
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