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कोरोना और लॉकडाउनः आटा-दाल और तेल की न हो कमी, हरियाणा सरकार ने मांगी है केंद्र से मदद
Thu, 02 Apr 2020 12:28 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 02 Apr 2020 12:28 PM IST
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हरियाणा में लॉकडाउन के दौरान आटा, दाल और तेल की कोई कमी न रहे, इसके लिए सरकार ने केंद्र से मदद मांगी है। 14 अप्रैल तक जिलों में कितनी मात्रा में आटा, दाल और सरसों के तेल की जरूरत है। इसकी जानकारी जिलों के खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों से जुटाने के बाद सरकार ने डिमांड केंद्रीय खाद्य एजेंसियों नेफेड और एफसीआई से की है।
सरकार ने सभी जिलों के खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों को आदेश दिया था कि वे अपने-अपने जिलों में दालों के थोक डीलरों, सरसों तेल व आटा मिल मालिकों से संपर्क कर ये जानकारी जुटाएं कि लॉकडाउन यानी 14 अप्रैल तक ओपन मार्केट में जिलावार कितनी मात्रा में आटा, दाल और तेल की जरूरत है। सभी खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों ने इस एक्सरसाइज को पूरा कर रिपोर्ट सरकार को भेजी थी।
जिसके बाद अब खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग हरियाणा ने पूरे प्रदेश की डिमांड के मुताबिक दालों और सरसों के लिए नेफेड से मांग की है। जबकि आटे के लिए एफसीआई से गेहूं मांगा है। ताकि आने वाले दिनों में प्रदेश में जरूरी खाद्य पदार्थों को लेकर कोई कमी न रहे। केंद्र जल्द ही प्रदेश सरकार की डिमांड पर अपना जवाब देगा। प्रदेश सरकार ने नेफेड से कुल 3646 मीट्रिक टन दालों की, 1635 मीट्रिक टन तेल निकालने के लिए सरसों की मांग की है। जबकि फूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया से कुल 7100 मीट्रिक टन आटे के लिए गेहूं मांगा है।
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सरकार ने सभी जिलों के खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों को आदेश दिया था कि वे अपने-अपने जिलों में दालों के थोक डीलरों, सरसों तेल व आटा मिल मालिकों से संपर्क कर ये जानकारी जुटाएं कि लॉकडाउन यानी 14 अप्रैल तक ओपन मार्केट में जिलावार कितनी मात्रा में आटा, दाल और तेल की जरूरत है। सभी खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों ने इस एक्सरसाइज को पूरा कर रिपोर्ट सरकार को भेजी थी।
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जिसके बाद अब खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग हरियाणा ने पूरे प्रदेश की डिमांड के मुताबिक दालों और सरसों के लिए नेफेड से मांग की है। जबकि आटे के लिए एफसीआई से गेहूं मांगा है। ताकि आने वाले दिनों में प्रदेश में जरूरी खाद्य पदार्थों को लेकर कोई कमी न रहे। केंद्र जल्द ही प्रदेश सरकार की डिमांड पर अपना जवाब देगा। प्रदेश सरकार ने नेफेड से कुल 3646 मीट्रिक टन दालों की, 1635 मीट्रिक टन तेल निकालने के लिए सरसों की मांग की है। जबकि फूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया से कुल 7100 मीट्रिक टन आटे के लिए गेहूं मांगा है।
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मार्केट, एजेंसियों के बीच डीएफएससी बनेंगे कड़ी
सभी जिलों से दालों, सरसों और गेहूं की डिमांड के मुताबिक राज्य सरकार में केंद्रीय खाद्य एजेंसियों से मदद मांगी है। उसके बाद मार्केट और एजेंसियों के बीच सभी जिलों में डीएफएससी एक कड़ी के रूप में काम करेंगे। डीएफएससी मिल मालिकों और डीलरों को गेहूं, दालें और सरसों की सप्लाई के दौरान केंद्रीय खाद्य एजेंसियों की पेमेंट सुनिश्चित करवाएंगे। इसके अलावा ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत आटा मिल मालिकों और एफसीआई के बीच भी डीएफएससी गेहूं की सप्लाई के दौरान एक कड़ी का काम करेंगे।
हर हफ्ते ओपन मार्केट में गेहूं बेचेगी एफसीआई
केंद्र सरकार की खाद्य एजेंसी फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) लॉकडाउन में अब ओपन मार्केट में हर हफ्ते ई-ऑक्शन के माध्यम से गेहूं बेचेगी। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि आटा मिल मालिक गेहूं खरीदें और आटा पीस कर मार्केट में आमजन को बेचें। जिससे मार्केट में आटे को लेकर किसी तरह की कोई कमी न हो। इसके लिए एफसीआई ने विशेष रूप से ओपन मार्केट सेल स्कीम (डी) की शुरुआत की है। गेहूं खरीदने के बाद आटा मिल मालिक वाहनों के जरिए एफसीआई गोदामों से सीधा गेहूं उठाएंगे और अपनी मिलों तक ले जा सकेंगे।
हर हफ्ते ओपन मार्केट में गेहूं बेचेगी एफसीआई
केंद्र सरकार की खाद्य एजेंसी फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) लॉकडाउन में अब ओपन मार्केट में हर हफ्ते ई-ऑक्शन के माध्यम से गेहूं बेचेगी। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि आटा मिल मालिक गेहूं खरीदें और आटा पीस कर मार्केट में आमजन को बेचें। जिससे मार्केट में आटे को लेकर किसी तरह की कोई कमी न हो। इसके लिए एफसीआई ने विशेष रूप से ओपन मार्केट सेल स्कीम (डी) की शुरुआत की है। गेहूं खरीदने के बाद आटा मिल मालिक वाहनों के जरिए एफसीआई गोदामों से सीधा गेहूं उठाएंगे और अपनी मिलों तक ले जा सकेंगे।