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लॉकडाउन से बच्चे चिड़चिड़े हुए तो उनके साथ गेम्स खेलें मां-बाप...मनोचिकित्सक से सवाल-जवाब
Thu, 30 Apr 2020 03:13 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 30 Apr 2020 03:13 PM IST
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लॉकडाउन में लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए शुरू की गई अमर उजाला हेल्पलाइन में सोमवार को सवालों के जवाब दिए वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सतीश कुमार थॉपर ने।
आज के हमारे एक्सपर्ट
आज हमारे पैनल में योगा एक्सपर्ट डॉ. नीलम हैं। डॉ. नीलम से योग से संबंधित कोई सवाल पूछ सकते हैं। सवाल शाम चार बजे तक chd-cityreporter@chd.amarujala.com पर मेल या 8054009839 पर व्हाट्सएप पर भेज दें। सवाल पूछते समय अपनी उम्र, नाम और जगह का नाम जरूर उल्लेख करें।
सवाल : मेरा पोता तीन साल दो महीने का है। वह हर काम को पहले मना करता है। फिर उसी काम को कर देगा। जब से लॉकडाउन हुआ है, तब से उसमें चिड़चिड़ापन आ गया है।
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- जगजीत शर्मा, पंचकूला
जवाब: अभी वह काफी छोटा है। इस बात पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। लॉकडाउन में बच्चों का बाहर जाना बंद हुआ है। इससे बच्चे में चिड़चिड़ापन आ गया है। घर के अंदर उसे किसी फिजिकल एक्टिविटीज में इनवाल्व करें। जो गेम उसे अच्छा लगता है, उसके साथ खेलें। छुप्पन छिपाई, बेट बॉल, झूला, उसके दौड़ना, पकड़ना जैसे गेम भी खेल सकते हैं, लेकिन अपने कंफर्ट जोन के लिए उसे मोबाइल बिल्कुल न पकड़वाएं।
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आज हमारे पैनल में योगा एक्सपर्ट डॉ. नीलम हैं। डॉ. नीलम से योग से संबंधित कोई सवाल पूछ सकते हैं। सवाल शाम चार बजे तक chd-cityreporter@chd.amarujala.com पर मेल या 8054009839 पर व्हाट्सएप पर भेज दें। सवाल पूछते समय अपनी उम्र, नाम और जगह का नाम जरूर उल्लेख करें।
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सवाल : मेरा पोता तीन साल दो महीने का है। वह हर काम को पहले मना करता है। फिर उसी काम को कर देगा। जब से लॉकडाउन हुआ है, तब से उसमें चिड़चिड़ापन आ गया है।
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- जगजीत शर्मा, पंचकूला
जवाब: अभी वह काफी छोटा है। इस बात पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। लॉकडाउन में बच्चों का बाहर जाना बंद हुआ है। इससे बच्चे में चिड़चिड़ापन आ गया है। घर के अंदर उसे किसी फिजिकल एक्टिविटीज में इनवाल्व करें। जो गेम उसे अच्छा लगता है, उसके साथ खेलें। छुप्पन छिपाई, बेट बॉल, झूला, उसके दौड़ना, पकड़ना जैसे गेम भी खेल सकते हैं, लेकिन अपने कंफर्ट जोन के लिए उसे मोबाइल बिल्कुल न पकड़वाएं।
सवाल: मेरा बेटा चार साल का है। वह बहुत जिद्दी है। कोई भी बात वह नहीं मानता है। हर चीज के लिए वह बहुत जिद करता है।
- पूजा, मनीमाजरा
जवाब: जो जिद उसके लिए हानिकारक है, उसे पूरी न करें। जिद पूरी न होने पर वह ज्यादा रोएगा। आपको लग सकता है कि वह ज्यादा जिद्दी हो रहा है। उसे मारना-पीटना नहीं है। सिर्फ उसका ध्यान भटकाना है। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए आपने तो मना कर दिया, लेकिन परिवार के किसी अन्य सदस्य ने लाड़ में आकर उसकी जिद पूरी कर दी। इससे उसकी जिद और बढ़ेगी। परिवार के सभी सदस्यों को अपना व्यवहार सामान रखना होगा। दूसरा काम यह करना है कि उसकी अच्छी आदतों की सराहना करें। खाना टाइम पर खा लेता है तो उसका उत्साह बढ़ाएं। कोई गेम खेलता है तो परिवार के सदस्य ताली बजाएं। खाने में जो अच्छा लगता है, उसे बनाकर खिलाएं।
सवाल: मेरा बेटी मोबाइल पर चिपकी रहती है। उसकी उम्र चार साल है। वह काफी जिद्दी भी हो गई है। मोबाइल से कैसे छुटकारा दिलाऊं।
- राजेश, चंडीगढ़
जवाब: उसकी मोबाइल की लत पुरानी होगी। पैरेंट्स अपने कंफर्ट के लिए मोबाइल बच्चों को पकड़ा देते हैं। उसकी लत धीरे-धीरे हटानी होगी। एक काम कीजिए खाने के वक्त मोबाइल किसी भी कीमत में न दें। मोबाइल पर आधे घंटे का टाइमर फिक्स कर दें, ताकि वीडियो अपने आप बंद हो जाए। उसे जो एक्टिविटीज पसंद है, उसमें उसे इनवाल्व करें। बड़ों को चाहिए कि वे अपने बच्चों के सामने मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करें।
- पूजा, मनीमाजरा
जवाब: जो जिद उसके लिए हानिकारक है, उसे पूरी न करें। जिद पूरी न होने पर वह ज्यादा रोएगा। आपको लग सकता है कि वह ज्यादा जिद्दी हो रहा है। उसे मारना-पीटना नहीं है। सिर्फ उसका ध्यान भटकाना है। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए आपने तो मना कर दिया, लेकिन परिवार के किसी अन्य सदस्य ने लाड़ में आकर उसकी जिद पूरी कर दी। इससे उसकी जिद और बढ़ेगी। परिवार के सभी सदस्यों को अपना व्यवहार सामान रखना होगा। दूसरा काम यह करना है कि उसकी अच्छी आदतों की सराहना करें। खाना टाइम पर खा लेता है तो उसका उत्साह बढ़ाएं। कोई गेम खेलता है तो परिवार के सदस्य ताली बजाएं। खाने में जो अच्छा लगता है, उसे बनाकर खिलाएं।
सवाल: मेरा बेटी मोबाइल पर चिपकी रहती है। उसकी उम्र चार साल है। वह काफी जिद्दी भी हो गई है। मोबाइल से कैसे छुटकारा दिलाऊं।
- राजेश, चंडीगढ़
जवाब: उसकी मोबाइल की लत पुरानी होगी। पैरेंट्स अपने कंफर्ट के लिए मोबाइल बच्चों को पकड़ा देते हैं। उसकी लत धीरे-धीरे हटानी होगी। एक काम कीजिए खाने के वक्त मोबाइल किसी भी कीमत में न दें। मोबाइल पर आधे घंटे का टाइमर फिक्स कर दें, ताकि वीडियो अपने आप बंद हो जाए। उसे जो एक्टिविटीज पसंद है, उसमें उसे इनवाल्व करें। बड़ों को चाहिए कि वे अपने बच्चों के सामने मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करें।
सवाल: मेरा बेटा तीन साल का है। वह बहुत कम शांत बैठता है। इधर से उधर चलता रहेगा। खिलौने से खेलता है। बोलता कम है। उसकी ग्रोथ सही हो रही है। उसमें कोई कमी नहीं है, लेकिन उसका व्यवहार मुझे डराता है। क्या ये किसी बीमारी के लक्षण तो नहीं है।
- सुनीता, चंडीगढ़
जवाब: बच्चे के व्यवहार के बारे में थोड़ी और जानकारी देनी चाहिए थी। आपकी बातों से लग रहा है कि आप इस बात से चिंतित हैं कि बच्चा नार्मल बच्चों से ज्यादा उछल-कूद करता है। तो घबराने की बात नहीं है। कुछ बच्चों का मिजाज थोड़ा तेज रहता है। आपको अपनी चिंता नहीं बढ़ानी। इस चक्कर में लोग बच्चों के व्यवहार को ज्यादा मॉनीटर करते हैं और उसे बढ़ाकर देखते हैं। आपको उसकी इन बातों को नोट करना है कि क्या वह किसी गेम को आधे सेकेंड खेलकर दूसरी गेम खेलने लगता है। किसी काम को लंबे समय तक नहीं कर पाना, पानी की टोटी या फ्रिज के गेट को बार-बार खोलना, पैरेंट्स की आवाज पर रिस्पांस न देना, अपनी उम्र के हिसाब से न बोलता हो तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।
- सुनीता, चंडीगढ़
जवाब: बच्चे के व्यवहार के बारे में थोड़ी और जानकारी देनी चाहिए थी। आपकी बातों से लग रहा है कि आप इस बात से चिंतित हैं कि बच्चा नार्मल बच्चों से ज्यादा उछल-कूद करता है। तो घबराने की बात नहीं है। कुछ बच्चों का मिजाज थोड़ा तेज रहता है। आपको अपनी चिंता नहीं बढ़ानी। इस चक्कर में लोग बच्चों के व्यवहार को ज्यादा मॉनीटर करते हैं और उसे बढ़ाकर देखते हैं। आपको उसकी इन बातों को नोट करना है कि क्या वह किसी गेम को आधे सेकेंड खेलकर दूसरी गेम खेलने लगता है। किसी काम को लंबे समय तक नहीं कर पाना, पानी की टोटी या फ्रिज के गेट को बार-बार खोलना, पैरेंट्स की आवाज पर रिस्पांस न देना, अपनी उम्र के हिसाब से न बोलता हो तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।