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#Ladengecoronase: सुरक्षा के लिए नहीं थे फेस शील्ड, जीएमसीएच-32 के डॉक्टरों ने खुद किए तैयार
Tue, 31 Mar 2020 11:10 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 31 Mar 2020 11:10 AM IST
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फेस शील्ड लगाए डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना लगातार अपना विस्तार कर रहा है और देश में अपने सुरक्षा संसाधन कम पड़ रहे हैं। इसी बीच एक अच्छी खबर आई है। संसाधनों की पूर्ति करने के लिए गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर- 32 के एलुमनी व यहां के चिकित्सकों के हाथ एक तरीका लगा है। इसी तरीके से चिकित्सकों ने फेस शील्ड बना डाली। यह फेस शील्ड मुंह, आंख, नाक, कान व पूरे फेस को सुरक्षित करेगी। सबसे अच्छी बात ये है कि इसे लगाने के बाद न तो एन 95 मास्क की आवश्यकता होगी और न ही गोगल की।
चिकित्सकों ने सोमवार को इसका प्रयोग किया और सफल रहा। सभी में खुशी की लहर है कि चिकित्सक व स्टाफ सुरक्षित रह सकेंगे। कोरोना के पॉजिटिव केस धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन अस्पतालों में चिकित्सकों के लिए पर्सनल प्रोटेक्ट इक्यूपमेंट की भारी कमी है। इसकी पूर्ति के लिए सरकार प्रयास कर रही है, वहीं सभी चिकित्सक भी तरीके निकाल रहे हैं। क्योंकि उन्हें मरीज के इलाज के साथ-साथ अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखना है। सबसे अधिक जरूरत पूरी फेस शील्ड की है। इसमें एन- 95 मास्क, गोगल आते हैं।
जीएमसीएच- 32 के चिकित्सक इसके लिए जुटे हैं और उन्हें सोमवार को सफलता भी मिल गई। सिंगापुर में रिसर्च कर रहे डॉ. साहिल ठाकुर ने उन देशों की स्थिति देखी जहां पर्सनल प्रोटेक्ट इक्यूपमेंट बहुत कम हैं और वहां कैसे काम चलाया जा रहा है। उन्होंने थाईलैंड का हाल देखा। यहां फेस शील्ड के लिए अपना गया तरीका डॉ. साहिल को रास आ गया और उन्होंने उसी तरीके से फेस शील्ड बना दी। इसके लिए जीएमसीएच के डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. आरुषि अग्रवाल की मदद ली और प्रयोग सफल हो गया।
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चिकित्सकों ने सोमवार को इसका प्रयोग किया और सफल रहा। सभी में खुशी की लहर है कि चिकित्सक व स्टाफ सुरक्षित रह सकेंगे। कोरोना के पॉजिटिव केस धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन अस्पतालों में चिकित्सकों के लिए पर्सनल प्रोटेक्ट इक्यूपमेंट की भारी कमी है। इसकी पूर्ति के लिए सरकार प्रयास कर रही है, वहीं सभी चिकित्सक भी तरीके निकाल रहे हैं। क्योंकि उन्हें मरीज के इलाज के साथ-साथ अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखना है। सबसे अधिक जरूरत पूरी फेस शील्ड की है। इसमें एन- 95 मास्क, गोगल आते हैं।
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जीएमसीएच- 32 के चिकित्सक इसके लिए जुटे हैं और उन्हें सोमवार को सफलता भी मिल गई। सिंगापुर में रिसर्च कर रहे डॉ. साहिल ठाकुर ने उन देशों की स्थिति देखी जहां पर्सनल प्रोटेक्ट इक्यूपमेंट बहुत कम हैं और वहां कैसे काम चलाया जा रहा है। उन्होंने थाईलैंड का हाल देखा। यहां फेस शील्ड के लिए अपना गया तरीका डॉ. साहिल को रास आ गया और उन्होंने उसी तरीके से फेस शील्ड बना दी। इसके लिए जीएमसीएच के डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. आरुषि अग्रवाल की मदद ली और प्रयोग सफल हो गया।
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जानिए.. कैसे तैयार की 220 फेस शील्ड
सिंगापुर में बैठे जीएमसीएच-32 के एलुमनी डॉ. साहिल ने मेडिकल कॉलेज के डॉ. सिद्धार्थ को कॉल की और फेस शील्ड बनाने का आइडिया शेयर किया, लेकिन इस आइडिया को पंख लगाने के लिए ट्रांसपरेंट फाइल फोल्डर की आवश्यकता थी, लेकिन लॉक डाउन के कारण मार्केट बंद होने के चलते यह संभव नहीं था।
डॉ. साहिल व सिद्धार्थ ने सभी स्टेशनरी की दुकानों के ऑनलाइन कांटेक्ट नंबर निकाले और कई से काल करके संपर्क किया, लेकिन तमाम लोगों ने इंकार कर दिया। दुकानदारों को डर था कि जैसे ही दुकान खुलेगी तो बड़ी कार्रवाई होगी। इसी बीच एक कॉल जौहर ब्रदर्स को की गई। उन्होंने फोन उठाकर बात की, लेकिन उन्होंने पहले तो मना कर दिया और नियमों की बात समझाने लगे, लेकिन डॉक्टरों के काफी समझाने के बाद वह मान गए।
जौहर ब्रदर्स ने पंजाब यूनिवर्सिटी की मार्केट स्थित अपनी दुकान खोली और उन्होंने डॉ. सिद्धार्थ को सभी ट्रांसपरेंट्स फाइल फोल्डर दे दिए। वहां से आने के बाद डॉ. सिद्धार्थ ने डॉ. आरुषि व अन्य लोगों की मदद से फेस शील्ड बनाई। एक फेस शील्ड का प्रयोग डॉ. आरुषि अग्रवाल ने खुद किया। दिनभर उनका प्रयोग सफल रहा। सबसे बड़ी बात ये है कि इस फेस शील्ड को लगाने के बाद पूरा चेहरा व गर्दन पूरी तरह सुरक्षित रहती है। इस टीम ने 220 फेस शील्ड बनाई हैं। डॉ. साहिल कहते हैं कि इस फेस शील्ड को कोई भी चिकित्सक बना सकते हैं।
बुधवार तक पहुंच जाएंगे पीपीई
सिंगापुर से डॉ. साहिल ठाकुर व यूएसए से डॉ. रोहन बीर सिंह धालीवाल की ओर से चंदा इकट्ठा कर जीएससीएच 32 के चिकित्सकों के लिए खरीदे गए पीपीई यानी पर्सनल प्रोटेक्ट इक्यूपमेंट बुधवार तक पहुंच जाएंगे। इनकी मार्केट में काफी कमी है। 250 एन 95 मास्क भेजे गए हैं। साथ ही शूज, गाउन व गोगल भेजे गए हैं। सामान की दूसरी खेप भी इतनी ही मात्रा में इस मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों को मिलेगी।
डॉ. साहिल व सिद्धार्थ ने सभी स्टेशनरी की दुकानों के ऑनलाइन कांटेक्ट नंबर निकाले और कई से काल करके संपर्क किया, लेकिन तमाम लोगों ने इंकार कर दिया। दुकानदारों को डर था कि जैसे ही दुकान खुलेगी तो बड़ी कार्रवाई होगी। इसी बीच एक कॉल जौहर ब्रदर्स को की गई। उन्होंने फोन उठाकर बात की, लेकिन उन्होंने पहले तो मना कर दिया और नियमों की बात समझाने लगे, लेकिन डॉक्टरों के काफी समझाने के बाद वह मान गए।
जौहर ब्रदर्स ने पंजाब यूनिवर्सिटी की मार्केट स्थित अपनी दुकान खोली और उन्होंने डॉ. सिद्धार्थ को सभी ट्रांसपरेंट्स फाइल फोल्डर दे दिए। वहां से आने के बाद डॉ. सिद्धार्थ ने डॉ. आरुषि व अन्य लोगों की मदद से फेस शील्ड बनाई। एक फेस शील्ड का प्रयोग डॉ. आरुषि अग्रवाल ने खुद किया। दिनभर उनका प्रयोग सफल रहा। सबसे बड़ी बात ये है कि इस फेस शील्ड को लगाने के बाद पूरा चेहरा व गर्दन पूरी तरह सुरक्षित रहती है। इस टीम ने 220 फेस शील्ड बनाई हैं। डॉ. साहिल कहते हैं कि इस फेस शील्ड को कोई भी चिकित्सक बना सकते हैं।
बुधवार तक पहुंच जाएंगे पीपीई
सिंगापुर से डॉ. साहिल ठाकुर व यूएसए से डॉ. रोहन बीर सिंह धालीवाल की ओर से चंदा इकट्ठा कर जीएससीएच 32 के चिकित्सकों के लिए खरीदे गए पीपीई यानी पर्सनल प्रोटेक्ट इक्यूपमेंट बुधवार तक पहुंच जाएंगे। इनकी मार्केट में काफी कमी है। 250 एन 95 मास्क भेजे गए हैं। साथ ही शूज, गाउन व गोगल भेजे गए हैं। सामान की दूसरी खेप भी इतनी ही मात्रा में इस मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों को मिलेगी।