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कर्फ्यू/लॉकडाउनः गोशालाओं में 25 फीसदी घटा दूध उत्पादन, सूखा-हरा चारा नहीं मिलने से दिक्कत
Mon, 13 Apr 2020 01:47 PM IST
खुशबू गोयल
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 13 Apr 2020 01:47 PM IST
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गौशाला में खड़ी गायें
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के चलते देशव्यापी लॉकडाउन और कर्फ्यू की घोषणा के बाद चंडीगढ़ की पांच गोशालाओं के दूध उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। गोशालाओं में पल रही लगभग 3000 गायों द्वारा होने वाले दूध उत्पादन में 25 फीसदी की गिरावट आई है। संचालकों का कहना है कि मांग के अनुरूप सूखा और हरा चारा नहीं मिल पाने के कारण यह दिक्कत आई है। ऐसे में गोशाला संचालकों के सामने संकट की स्थिति बन गई है। पूरे देश में 14 अप्रैल तक 21 दिन का लॉकडाउन चल रहा है। इसके साइड इफेक्ट भी सामने आने लगे हैं। बंद का असर गोशालाओं पर भी हो रहा है।
लॉकडाउन के बाद अचानक पशुचारे के दामों में वृद्धि के साथ ही दूध उत्पादन में गिरावट आई है। चंडीगढ़ में पांच गोशालाओं में लगभग 3000 गायों का पालन पोषण किया जा रहा है। आम दिनों में इन गोशालाओं में 800-900 लीटर दूध का उत्पादन होता था, लेकिन कर्फ्यू के बाद चारे की बढ़ी दिक्कत से दूध के उत्पादन में भी 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। गोशाला संचालकों का कहना है कि पहले आसानी से चारे की व्यवस्था हो जाती थी, लेकिन अब कोरोना कर्फ्यू के कारण दिक्कत आ रही है। पोषक खानपान नहीं हो पाने के कारण दूध उत्पादन में गिरावट आई है।
नहीं चल पा रही हैं गो ग्रास रेहड़ी
गायों के चारे के लिए सेक्टर-45 गोशाला संचालकों द्वारा शहर में 10 गोग्रास रेहड़ियां चलाई जाती थीं। सब सेक्टरों में घूम-घूम कर घरों से चारा और बचा हुआ खाना एकत्र किया जाता था। इसका गायों के चारे के रूप में प्रयोग किया जाता था, लेकिन कर्फ्यू के कारण इस समय रेहड़ियों का संचालन नहीं हो पा रहा है। इस कारण गायों को अब पोषण चारा नहीं मिल पा रहा है।
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लॉकडाउन के बाद अचानक पशुचारे के दामों में वृद्धि के साथ ही दूध उत्पादन में गिरावट आई है। चंडीगढ़ में पांच गोशालाओं में लगभग 3000 गायों का पालन पोषण किया जा रहा है। आम दिनों में इन गोशालाओं में 800-900 लीटर दूध का उत्पादन होता था, लेकिन कर्फ्यू के बाद चारे की बढ़ी दिक्कत से दूध के उत्पादन में भी 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। गोशाला संचालकों का कहना है कि पहले आसानी से चारे की व्यवस्था हो जाती थी, लेकिन अब कोरोना कर्फ्यू के कारण दिक्कत आ रही है। पोषक खानपान नहीं हो पाने के कारण दूध उत्पादन में गिरावट आई है।
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नहीं चल पा रही हैं गो ग्रास रेहड़ी
गायों के चारे के लिए सेक्टर-45 गोशाला संचालकों द्वारा शहर में 10 गोग्रास रेहड़ियां चलाई जाती थीं। सब सेक्टरों में घूम-घूम कर घरों से चारा और बचा हुआ खाना एकत्र किया जाता था। इसका गायों के चारे के रूप में प्रयोग किया जाता था, लेकिन कर्फ्यू के कारण इस समय रेहड़ियों का संचालन नहीं हो पा रहा है। इस कारण गायों को अब पोषण चारा नहीं मिल पा रहा है।
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आप भी कर सकते हैं मदद
कर्फ्यू से पहले आसानी से लोग गोशालाओं में पहुंच जाते थे, और दान के साथ ही खाने पीने की सामग्री भी गोशालाओं को मिल जाती थी, लेकिन अब दिक्कतें आ रही हैं। यदि आप गोशाला में गायों के लिए हो रहे चारे के संकट में मदद करना चाहते हैं तो आप भी मदद कर सकते हैं। गौरीशंकर सेवा दल के मदद करने के लिए मोबाइल नंबर 9464897272 जारी किया है। जिस पर फोन करके कोई भी व्यक्ति गायों के लिए हरे या सूखे चारे को उपलब्ध करा सकता है। यदि कोई व्यक्ति गुप्त दान करना चाहता है तो वह भी इस नंबर पर फोन कर अपनी इच्छा प्रकट कर सकता है।
सूखे और हरे चारे के दामों में हुई वृद्धि
कर्फ्यू और लॉकडाउन के बाद पशुचारे के दामों में भी इजाफा हुआ है। कर्फ्यू से पहले पशुओं के लिए प्रयोग में लाए जाने वाला भूसा (तूड़ी) 500.00 रुपये प्रति क्विंटल मिलता था। कर्फ्यू के बाद भूसे के दाम 750-800 प्रति क्विंटल पहुंच गए हैं, वहीं हरा चारा 250 रुपये प्रति क्विंटल बिकता था जो अब 300-350 रुपये प्रति क्विंटल रुपये बिक रहा है।
एडवाइजर ने कहा था करेंगे मदद
चारे की दिक्कत को देखते हुए एडवाइजर मनोज परिदा ने ट्वीट कर कहा था कि यूटी प्रशासन शहर की सभी गोशालाओं को चारा पहुंचाएगा, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं किया गया है। गो संचालकों द्वारा एडवाइजर को चारे की दिक्कत को लेकर एक पत्र भेजा जाएगा।
पोषक चारे की अनुपलब्धता ने घटाया दूध उत्पादन
गायों को कर्फ्यू से पहले आसानी से हरा और सूखे चारे के साथ ही अन्य पोषक तत्वों वाला चारा मिल जाता था, लेकिन कर्फ्यू के कारण दिक्कत आई है। इस कारण इसका सीधा प्रभाव दूध उत्पादन पर पड़ा है।
- विनोद, संचालक, गोशाला सेक्टर-45, चंडीगढ़
सूखे और हरे चारे के दामों में हुई वृद्धि
कर्फ्यू और लॉकडाउन के बाद पशुचारे के दामों में भी इजाफा हुआ है। कर्फ्यू से पहले पशुओं के लिए प्रयोग में लाए जाने वाला भूसा (तूड़ी) 500.00 रुपये प्रति क्विंटल मिलता था। कर्फ्यू के बाद भूसे के दाम 750-800 प्रति क्विंटल पहुंच गए हैं, वहीं हरा चारा 250 रुपये प्रति क्विंटल बिकता था जो अब 300-350 रुपये प्रति क्विंटल रुपये बिक रहा है।
एडवाइजर ने कहा था करेंगे मदद
चारे की दिक्कत को देखते हुए एडवाइजर मनोज परिदा ने ट्वीट कर कहा था कि यूटी प्रशासन शहर की सभी गोशालाओं को चारा पहुंचाएगा, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं किया गया है। गो संचालकों द्वारा एडवाइजर को चारे की दिक्कत को लेकर एक पत्र भेजा जाएगा।
पोषक चारे की अनुपलब्धता ने घटाया दूध उत्पादन
गायों को कर्फ्यू से पहले आसानी से हरा और सूखे चारे के साथ ही अन्य पोषक तत्वों वाला चारा मिल जाता था, लेकिन कर्फ्यू के कारण दिक्कत आई है। इस कारण इसका सीधा प्रभाव दूध उत्पादन पर पड़ा है।
- विनोद, संचालक, गोशाला सेक्टर-45, चंडीगढ़