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मनमानीः चंडीगढ़ में दुकानदार धड़ल्ले से बेच रहे नॉन-एनसीईआरटी किताबें, लोगों को करते मजबूर
Thu, 07 May 2020 11:12 AM IST
खुशबू गोयल
कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 07 May 2020 11:12 AM IST
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किताबों की दुकान पर लाइनों में खड़े ग्राहक
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में किताबें बेचने वाले दुकानदान परिजनों को प्राइवेट स्कूलों की तरफ से लगाईं गईं नॉन एनसीईआरटी की किताबें बेच रहे हैं। पिछले हफ्ते परिजनों की ओर से स्कूलों में नॉन एनसीईआरटी किताबें लगाने को लेकर 40 शिकायतें आई थीं, लेकिन शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ढील दे रखी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लॉकडाउन में हम कैसे जांच कर सकते हैं कि दुकानों की ओर से क्या बेचा जा रहा है।
यूटी प्रशासन ने बुधवार को किताबों की होम डिलीवरी के आदेश दे दिए हैं, क्योंकि लॉकडाउन के कारण अभिभावक नए सेशन के लिए किताबें नहीं खरीद पाए थे। इसके कारण दो दिन से बुक स्टोर के बाहर 2-3 घंटे अभिभावकों को कतार में लगना पड़ रहा था। इस फैसले पर पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने कहा कि किताबों की होम डिलीवरी एक सराहनीय कदम है। हालांकि शिक्षा विभाग एनसीईआरटी की किताबों पर भ्रम को स्पष्ट करने में विफल रहा है।
हाईकोर्ट, सीसीपीसीआर और डीईओ ने एनसीईआरटी की किताबों को अनिवार्य करने के आदेश दिए थे, इसके बावजूद निजी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवा रहे हैं। पिछले हफ्ते परिजनों की 40 शिकायतें डीईओ के पास पेंडिंग हैं, लेकिन अब कार्रवाई ना करके प्रशासन खुद अपने ही आदेशों की धज्जियां उड़वा रहा है। बता दें हर एक बुक स्टोर का 5-6 प्राइवेट स्कूलों के साथ टाई-अप होता है, जहां से परिजनों को उस स्कूल की किताबें मिलती हैं।
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सभी सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूलों में एनसीईआरटी किताबें अनिवार्य हैं। हमने भी स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अगर बुक स्टोर एनसीईआरटी के अलावा अन्य प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेच रहे हैं तो लॉकडाउन में हम कैसे दुकानों पर जाकर जांच कर सकते हैं।
- रुबिन्दर जीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक
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यूटी प्रशासन ने बुधवार को किताबों की होम डिलीवरी के आदेश दे दिए हैं, क्योंकि लॉकडाउन के कारण अभिभावक नए सेशन के लिए किताबें नहीं खरीद पाए थे। इसके कारण दो दिन से बुक स्टोर के बाहर 2-3 घंटे अभिभावकों को कतार में लगना पड़ रहा था। इस फैसले पर पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने कहा कि किताबों की होम डिलीवरी एक सराहनीय कदम है। हालांकि शिक्षा विभाग एनसीईआरटी की किताबों पर भ्रम को स्पष्ट करने में विफल रहा है।
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हाईकोर्ट, सीसीपीसीआर और डीईओ ने एनसीईआरटी की किताबों को अनिवार्य करने के आदेश दिए थे, इसके बावजूद निजी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवा रहे हैं। पिछले हफ्ते परिजनों की 40 शिकायतें डीईओ के पास पेंडिंग हैं, लेकिन अब कार्रवाई ना करके प्रशासन खुद अपने ही आदेशों की धज्जियां उड़वा रहा है। बता दें हर एक बुक स्टोर का 5-6 प्राइवेट स्कूलों के साथ टाई-अप होता है, जहां से परिजनों को उस स्कूल की किताबें मिलती हैं।
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सभी सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूलों में एनसीईआरटी किताबें अनिवार्य हैं। हमने भी स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अगर बुक स्टोर एनसीईआरटी के अलावा अन्य प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेच रहे हैं तो लॉकडाउन में हम कैसे दुकानों पर जाकर जांच कर सकते हैं।
- रुबिन्दर जीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक
परिजन एनसीईआरटी की वेबसाइट से खरीद सकते हैं किताबें
एनसीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ अमरेंद्र बहेरा ने ट्वीट कर परिजनों को जानकारी दी कि उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है, वे एनसीईआरटी की वेबसाइट से किताबें खरीद सकते हैं। अगर किसी परिजन को पूरे सेट के बजाय एक किताब चाहिए तो वो भी आर्डर हो जाएगी। लॉकडाउन के कारण होम डिलीवरी में एक हफ्ते का समय लग सकता है।
बुक स्टोर कस्टमर को पूरा सेट खरीदने पर कर रहे मजबूर
प्राइवेट स्कूल के एक शिक्षक संदीप ने बताया कि उन्हें 6वीं से 9वीं तक की पंजाबी की किताब चाहिए थी। इसके लिए वे दो घंटे लाइन में लगे रहे। जब उनकी किताब खरीदने की बारी आई तो दुकानदार कहा कि उन्हें चारों कक्षाओं का पूरा बुक सेट खरीदना पड़ेगा। वे एक किताब निकालकर नहीं देंगे। इसके बाद उन्हें बिना किताब लिए ही लौटना पड़ा।
स्कूलों में एनसीईआरटी पुस्तक से पढ़ाना अनिवार्य
सीबीएसई द्वारा 12.04.2016, 19.04.2017 और 09.08.2017 को एक सकुर्लर जारी किया गया था। इसके अनुसार सभी स्कूलों में (जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त) एनसीईआरटी पुस्तकों से पढ़ाना अनिवार्य किया गया था। लेकिन पैरेंट्स द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया है कि उनके बच्चों को नॉन एनसीईआरटी बुक्स से पढ़ाया जा रहा है।
बुक स्टोर कस्टमर को पूरा सेट खरीदने पर कर रहे मजबूर
प्राइवेट स्कूल के एक शिक्षक संदीप ने बताया कि उन्हें 6वीं से 9वीं तक की पंजाबी की किताब चाहिए थी। इसके लिए वे दो घंटे लाइन में लगे रहे। जब उनकी किताब खरीदने की बारी आई तो दुकानदार कहा कि उन्हें चारों कक्षाओं का पूरा बुक सेट खरीदना पड़ेगा। वे एक किताब निकालकर नहीं देंगे। इसके बाद उन्हें बिना किताब लिए ही लौटना पड़ा।
स्कूलों में एनसीईआरटी पुस्तक से पढ़ाना अनिवार्य
सीबीएसई द्वारा 12.04.2016, 19.04.2017 और 09.08.2017 को एक सकुर्लर जारी किया गया था। इसके अनुसार सभी स्कूलों में (जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त) एनसीईआरटी पुस्तकों से पढ़ाना अनिवार्य किया गया था। लेकिन पैरेंट्स द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया है कि उनके बच्चों को नॉन एनसीईआरटी बुक्स से पढ़ाया जा रहा है।
13 सितंबर, 2018 को प्राइवेट को दिया गया ऑर्डर
कोर्ट के आदेश के बाद 13 सितंबर, 2018 को जिला शिक्षा अधिकारी ऑफिस से जारी पत्र में इस बात का साफ उल्लेख किया गया था कि स्कूलों को एनसीईआरटी बुक्स से पढ़ाना अनिवार्य है। इनमें वे स्कूल शामिल थे जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त हैं।
3 फरवरी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी दिया आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए गए पत्र को वर्ष 2018 में एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल द्वारा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिसे हाल ही में उच्चन्यायालय ने 3 फरवरी, 2020 में खारिज कर दिया था और डीईओ के आदेश को बरकरार रखा था।
3 फरवरी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी दिया आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए गए पत्र को वर्ष 2018 में एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल द्वारा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिसे हाल ही में उच्चन्यायालय ने 3 फरवरी, 2020 में खारिज कर दिया था और डीईओ के आदेश को बरकरार रखा था।