{"_id":"5eb4f6688ebc3e905d3bb863","slug":"coronavirus-lockdown-chandigarh-administration-and-citco-facing-financial-crisis","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आर्थिक संकटः कर्जदार बना चंडीगढ़, चार महीने से नहीं दिए 6.5 करोड़, सिटको बोला- कैसे दें वेतन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आर्थिक संकटः कर्जदार बना चंडीगढ़, चार महीने से नहीं दिए 6.5 करोड़, सिटको बोला- कैसे दें वेतन
Fri, 08 May 2020 11:34 AM IST
खुशबू गोयल
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 08 May 2020 11:34 AM IST
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आपको यह जानकर थोड़ी हैरानी जरूर होगी कि यूटी प्रशासन सिटको का कर्जदार हो गया है। चार महीने से यूटी के सरकारी वाहनों में भराए जाने वाले पेट्रोल और डीजल का 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। इधर कोरोना के कारण मंदी के इस दौर में सिटको के सामने वित्तीय संकट खड़ा हुआ है।
जिस कारण से सिटको के 1200 कर्मचारियों को अभी तक सैलरी का भुगतान नहीं किया जा सका है। सिटको के पेट्रोल पंपों से यूटी के सैकड़ों सरकारी वाहनों में प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल भरवाया जाता है। सिटको प्रबंधन की लापरवाही के कारण चार महीने के पेट्रोल-डीजल के भुगतान के लिए बिलों को भेजने में लापरवाही बरती गई। इसके कारण अभी तक इन बिलों का 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया जा सका है।
सिटको कर्मचारी वर्कर्स यूनियन के प्रधान बलदेव राज ने बताया कि प्रबंधन द्वारा यदि बिलों के भुगतान को लेकर लापरवाही नहीं बरती गई होती तो यूटी द्वारा बकाया बिलों का भुगतान हो गया था, जिससे सिटको में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन का भुगतान आसानी से किया जा सकता था। उन्होंने जल्द ही यूटी प्रशासन द्वारा पेट्रोल-डीजल के भुगतान किए जाने की मांग की।
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जिस कारण से सिटको के 1200 कर्मचारियों को अभी तक सैलरी का भुगतान नहीं किया जा सका है। सिटको के पेट्रोल पंपों से यूटी के सैकड़ों सरकारी वाहनों में प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल भरवाया जाता है। सिटको प्रबंधन की लापरवाही के कारण चार महीने के पेट्रोल-डीजल के भुगतान के लिए बिलों को भेजने में लापरवाही बरती गई। इसके कारण अभी तक इन बिलों का 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया जा सका है।
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सिटको कर्मचारी वर्कर्स यूनियन के प्रधान बलदेव राज ने बताया कि प्रबंधन द्वारा यदि बिलों के भुगतान को लेकर लापरवाही नहीं बरती गई होती तो यूटी द्वारा बकाया बिलों का भुगतान हो गया था, जिससे सिटको में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन का भुगतान आसानी से किया जा सकता था। उन्होंने जल्द ही यूटी प्रशासन द्वारा पेट्रोल-डीजल के भुगतान किए जाने की मांग की।
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दो महीने से नहीं आया किराया
अतिरिक्त आय के लिए सिटको द्वारा कलाग्राम का बैंकट हॉल, ड्रापिंन फूड कोर्ट और सेक्टर-10 स्थित स्टॉप एंड स्टेयर को लीज पर दिया गया है। इन संपत्तियों का अभी तक प्रबंधन द्वारा दो माह का किराया नहीं लिया गया है। बकाया किराये की राशि 50 लाख रुपये से अधिक है।
सैलरी के लिए मांग चुके हैं 20 करोड़ की ग्रांट
कोरोना के कारण सिटको का कारोबार जीरो पहुंच गया है। कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए पैसे नहीं हैं। इस कारण सिटको कर्मचारी द्वारा यूटी प्रशासन से सिटको को वित्तीय संकट से उबारने के लिए 20 करोड़ रुपये की ग्रांट भी मांगी जा चुकी है, लेकिन ग्रांट को लेकर अभी तक यूटी प्रशासन की ओर से कोई भी जवाब नहीं मिल पाया है।
सैलरी के लिए मांग चुके हैं 20 करोड़ की ग्रांट
कोरोना के कारण सिटको का कारोबार जीरो पहुंच गया है। कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए पैसे नहीं हैं। इस कारण सिटको कर्मचारी द्वारा यूटी प्रशासन से सिटको को वित्तीय संकट से उबारने के लिए 20 करोड़ रुपये की ग्रांट भी मांगी जा चुकी है, लेकिन ग्रांट को लेकर अभी तक यूटी प्रशासन की ओर से कोई भी जवाब नहीं मिल पाया है।