फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Coronavirus: Corona Pandemic Increasing Mental Stress and Suicide Cases in Chandigarh

जीवन पर भारी तनाव, चंडीगढ़ में कोरोना से ज्यादा मौतें मानसिक तनाव से...4 महीने 41 सुसाइड

Fri, 31 Jul 2020 01:15 PM IST
खुशबू गोयल आशीष वर्मा/अमित गुप्ता, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमित गुप्ता, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 31 Jul 2020 01:15 PM IST
विज्ञापन
Coronavirus: Corona Pandemic Increasing Mental Stress and Suicide Cases in Chandigarh
सांकेतिक तस्वीर
कोरोना महामारी से फैला डर लोगों को दिमागी तौर पर कमजोर बना रहा है। खासकर मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए कोरोना ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। अप्रैल से जुलाई तक चंडीगढ़ में 41 लोगों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, जबकि पूरी दुनिया को खौफ में डालने वाले कोरोना से अब तक 14 मौतें हुईं हैं। भागती-दौड़ती जिंदगी में अचानक लगे ब्रेक और कोरोना के डर ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


लोगों में चिंता, डर, उदासी और हताशा भर रही है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि आत्महत्याएं करने वालों ने कोरोना या लॉकडाउन की वजह से मौत का रास्ता चुना, लेकिन यह तय है कि मुश्किल समय ने इनके अंदर डर, अकेलापन और चिंता बढ़ाई, जिसे वह सह नहीं पाए और अपनी जिंदगी खत्म कर डाली। मानसिक रोग से जुड़े विशेषज्ञों ने माना है कि चिंता, तनाव और आत्महत्या के मामले अभी काफी बढ़ेंगे और यह एक गंभीर संकट के रूप में उभरकर सामने आएगा।
विज्ञापन


इसे संभाल पाना भविष्य में काफी मुश्किल भी होगा। ओपीडी की सेवाएं बंद होने से मरीज डाक्टरों को दिखा नहीं पा रहे हैं। टेलीमेडिसिन चल रही है। वहां भी रोजाना 100 से ज्यादा कॉल आती हैं, लेकिन इसका इतना ज्यादा असर नहीं दिख रहा। इससे ज्यादा जरूरी है कि लोगों में मानसिक तनाव के प्रति जागरूकता होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे बड़ी चुनौती तनाव को कैसे पहचानें

इस तरह के रोगों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि इस बात का पता कैसे लगाएं कि अपना कोई डिप्रेशन या चिंता के दौर से गुजर रहा है। मानसिक तनाव के बारे में बातें तो होती हैं, मगर इसके लक्षण और उससे बाहर निकलने की चर्चा का इतना प्रचार व प्रसार नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन बीमारियों के भी लक्षण होते हैं पर इन्हें पहचानने के लिए व्यक्ति की दिनचर्या पर नजर रखनी होगी।

ऐसे पहचानें लक्षण
  • दोस्त, परिवार और समाज से भी कट जाना
  • ज्यादा चिंता करना। हर वक्त नकारात्मक बात करना
  • बात-बात पर गुस्सा करना, दुखी रहना
  • नींद ज्यादा आना या बहुत कम आना
  • पहले ज्यादा बात करता हो और अब बहुत कम कर दिया हो
  • खाना ज्यादा खाना या सामान्य से कम खाना
  • आत्महत्या जैसे ख्याल का आना

परिवार के सदस्य क्या कर सकते हैं

  • डिप्रेशन से गुजर रहे व्यक्ति से गुस्से की बजाए धैर्य से बात करें
  • व्यक्ति को अकेला न छोड़े। उन्हें व्यस्त रखें
  • जिस क्षेत्र में उनकी रुचि हो, उसमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें
  • परिवार के सभी सदस्य उनसे अच्छे से बात करें
  • रोजाना कम से कम 45 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करवाएं
  • उदासी, मायूसी के बजाए उन्हें आशावान बनाएं
  • इस बारे में किसी अच्छे डाक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करें

लॉकडाउन के चलते सुखना में लगाई छलांग

केस वन: 18 जुलाई को एफसीआई (फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया) से रिटायर सेक्टर-22 निवासी यशवीर सिंह (70) ने सुखना झील में छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पुलिस ने अपनी जांच और परिजनों की ओर से दिए बयान में पाया कि यशवीर सिंह लॉकडाउन में सबकुछ बंद होने से मानसिक तनाव की चपेट में आ गए थे। घर से बाहर निकलने की उनकी आजादी छिन गई थी। उसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी समाप्त करने का फैसला ले लिया

केस दो: चार मई को इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित एक प्राइवेट बैंक की महिला कर्मी ने रामदरबार फेज-2 स्थित मकान में आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले वह हिमाचल के कांगड़ा से लौटकर आई थी। नौकरी ज्वाइन करने से पहले उसे होम क्वारंटीन होने को कहा था। पुलिस की जांच में सामने आया था कि वह 18 महीने से बैंक में जॉब कर रही थी। कुछ समय से डिप्रेशन में भी थी। होम क्वारंटीन होने के बाद वह और डिप्रेशन में आ गई और आत्महत्या कर ली।

किस महीने कितनी आत्महत्याएं

अप्रैल             6
मई                11
जून               17
जुलाई             07

यहां से ले सकते हैं मदद
पीजीआई : यदि कोई मानसिक तनाव में है तो वह सुबह दस से एक बजे के बीच 0172-2756809 पर कॉल कर अपनी जानकारी दें। अगले 24 घंटे के भीतर पीजीआई के मनोचिकित्सक विभाग से जुड़े सीनियर रेजिडेंट मरीज को कॉल कर उसकी समस्या का समाधान करेंगे।

मेडिकल कॉलेज: आपातकालीन मानसिक समस्याओं के लिए मेडिकल कॉलेज ने आशा हेल्पलाइन शुरू की है। कोई भी मरीज 0172-2660078 व 2660178 पर कॉल कर सकते हैं।

जो ठीक हो गए थे, वे दोबारा से मानसिक रोगी हो गए

कोरोना के दौरान यह देखने को मिला है कि डिप्रेशन के जो मरीज दवा खाने से ठीक हो गए थे, वह दोबारा से इसकी जद में आ गए हैं। लॉकडाउन से उनके चारों तरफ हताशा व निराशा के ऐसी दीवार खड़ी हो गई, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाए। लॉकडाउन में बिजनेस ठप होना, नौकरी जाना, कोरोना संक्रमण का डर, अकेलापन, बाहर आने जाने की आजादी छिन जाने या फिर घर न जा पाने की हताशा की वजह कई लोगों में डिप्रेशन बढ़ा है और आत्महत्या की एक बड़ी वजह डिप्रेशन है। आत्महत्या की कोशिश करने वालों पर हुई एक स्टडी में सामने आ चुका है कि मरने से पहले उन्होंने अपने करीबी दोस्त व पारिवारिक सदस्य से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। इसलिए ऐसे व्यक्तियों के संपर्क में रहे और उनसे बातचीत करते रहें।
- डॉ. सतीश थापर, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, मैक्स हॉस्पिटल

लॉकडाउन के दौरान अलग अलग थानों के अंतर्गत कई आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इनमें ज्यादातर आत्महत्याएं मानसिक रूप से परेशान या फिर घरेलू कलह की वजह रही है।
- चरणजीत सिंह विर्क, डीएसपी चंडीगढ़ पुलिस
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed