अमर उजाला स्वास्थ्य अभियान: बेटों और बेटियों में टीकाकरण का उत्साह, धीमी चाल ने भरी रफ्तार
16 मार्च से शुरू छठे चरण में लाभार्थियों में लड़के व लड़कियों की संख्या क्रमश: 1851 व 1842 है। 3694 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। इनमें लड़कों का प्रतिशत 50.12 व लड़कियों का 49.87 है।
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पढ़ाई-लिखाई ही नहीं कोरोना महामारी से बचाव के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में भी बेटियां बेटों के बराबरी में चल रही हैं। लड़के व लड़कियों में टीके को लेकर उत्साह नजर आने लगा है। सामान्य तौर पर इंजेक्शन लेने में लड़कियों में ज्यादा डर होता है लेकिन टीकाकरण अभियान इसे गलत साबित कर रहा है क्योंकि लड़कियां भी आगे आकर टीका लगवा रही हैं।
रविवार तक शहर में 12 से 14 साल तक के 3694 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। इसमें लड़कियों की संख्या लड़कों से सिर्फ 9 ही कम है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग बेहद खुश है क्योंकि लड़कियों के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उसे अलग से कोई प्रयास नहीं करना पड़ रहा। वहीं, बच्चों का कहना है कि अभियान को सफल बनाना उनका दायित्व है। इसमें बराबरी की बात नहीं की जानी चाहिए। बात एक साथ मिलकर आगे आने और कोरोना पर जीत दर्ज करने की होनी चाहिए।
गौरतलब है कि 12 से 14 साल तक के बच्चों के अभियान में शहर के 45 हजार बच्चों को टीका लगाया जाना है। शुरुआती दौर में निराशाजनक परिणाम से स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई थी लेकिन अब बच्चों ने अभियान में रफ्तार भर दी है। प्रतिदिन 400 से 500 बच्चों को टीका लगाया जा रहा है। इसमें लड़के और लड़कियों का अनुपात लगभग एक समान है।
3694 बच्चों को लगा टीका
16 मार्च से शुरू छठे चरण में लाभार्थियों में लड़के व लड़कियों की संख्या क्रमश: 1851 व 1842 है। 3694 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। इनमें लड़कों का प्रतिशत 50.12 व लड़कियों का 49.87 है।
बराबरी नहीं, मिलकर जीत दर्ज करना है
महामारी से बचाव के लिए टीके का सुरक्षा चक्र उपलब्ध कराया गया है फिर उसे लगवाने में देर क्यों की जाए। मैंने पहली खुराक लगवा ली है। मानक के अनुसार दूसरी डोज भी तय समय पर लगवाऊंगी। मैं अपनी दोस्तों को भी जल्द से जल्द टीका लगवाने की सलाह देती हूं। रिचा शर्मा, सेक्टर 46
यह बात कोई मायने नहीं रखती कि लड़के ज्यादा संख्या में टीका लगवा रहे हैं या लड़कियां। हमें बराबरी नहीं करनी। एक साथ मिलकर कोरोना पर जीत दर्ज करनी है। अपनी सुरक्षा के लिए टीका लगवाने में ज्यादा सोच-विचार करके समय बर्बाद करना ठीक नहीं। अनिकेत सिंह, हल्लोमाजरा
एक बात तो समझ में आ गई है कि कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी। ऐसे में टीके का सुरक्षा चक्र हम सभी के लिए बेहद जरूरी है। बड़े हों या बच्चे सभी महामारी की जद में हैं इसलिए अपनी सुरक्षा के लिए हमें ही आगे आकर टीका लगवाना होगा। सत्यांशी कुमारी, सेक्टर 44
जब तक टीका नहीं था तब तक लोग यही कह रहे थे कि हमारे बच्चों के लिए सरकार नहीं सोच रही। अब जब टीका उपलब्ध है, तब उसे लगवाने में आनाकानी की जा रही है। अगर यही हाल रहा तो चौथी लहर आ जाएगी और अभियान अधूरा ही रह जाएगा। सबकी सुरक्षा के लिए अभियान को मिलकर पूरा करना हमारी भी जिम्मेदारी है। अमिश सिंह, सेक्टर 45
बच्चों के टीकाकरण अभियान में बच्चों के साथ अभिभावकों को भी आगे आना होगा। जब तक माता-पिता आगे आकर बच्चों को टीका नहीं लगवाएंगे तब तक अभियान सफल नहीं होगा। फिलहाल अभियान में तेजी आ रही है। इसके लिए स्कूल स्तर पर बच्चों और अभिभावकों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. मंजीत सिंह, राज्य टीकाकरण अधिकारी