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नानकशाही कैलेंडर को लेकर फिर विवाद

Thu, 04 Dec 2014 06:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर Updated Thu, 04 Dec 2014 06:46 PM IST
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Controversy Again on Nanak Shahi Callender in Punjab

सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व की तारीख बदले जाने के बाद एक बार फिर नानकशाही कैलेंडर विवादों में आ गया है। एनआरआई पाल सिंह पुरेवाल ने नानकशाही कैलेंडर तैयार किया था। इसमें कई तरह के संशोधन किए जा चुके हैं। विवाद के बाद सिख स्कालर कैलेंडर में संशोधन की मांग कर रहे हैं।

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सिख कौम के एक विशेष अभियान के तहत विक्रमी कैलेंडर से अलग नानक शाही कैलेंडर तैयार कराया गया था। एसजीपीसी की कोशिश थी कि नानकशाही कैलेंडर तैयार कर सिख कौम को एकजुट किया जाए। इसके चलते एसजीपीसी के निर्देश पर 14 मार्च 2003 को एनआरआई पाल सिंह पुरेवाल ने नानकशाही कैलेंडर तैयार किया।
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एसजीपीसी की तरफ से 2003 में कैलेंडर लागू कर दिया गया। पाकिस्तान समेत सारी दुनिया में कैलेंडर को मान्यता दे दी, लेकिन विवाद के चलते अक्तूबर 2009 में एसजीपीसी ने कैलेंडर में संशोधन का फैसला लिया। इस संबंध में दमदमी टकसाल के प्रमुख हरनाम सिंह धूमा और अवतार सिंह मक्कड़ की दो सदस्यीय कमेटी बनाई गई।
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इस कमेटी ने सिर्फ चार तारीखों (गुरु अर्जुन देव जी का शहादत दिवस, गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व, श्री गुरुग्रंथ साहिब जी का गुरुता गद्दी दिवस और गुरु गोबिंद सिंह जी का ज्योति जोत दिवस) में संशोधन की सिफारिश की। शिरोमणि कमेटी ने समिति की सिफारिशों के अनुरूप 14 मार्च 2010 को संशोधित नानकशाही कैलेंडर जारी कर दिया।

कई कमेटियों का विरोध
पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक समिति, अमेरिकन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी समेत देश-विदेश के कई गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों ने संशोधित कैलेंडर को मानने से इंकार कर दिया। मूल नानकशाही कैलेंडर को ही मान्यता दी।

अब उठा यह विवाद
संशोधित नानकशाही कैलेंडर के अनुसार इस बार श्री गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व साल में दो बार मनाया जा रहा है। दूसरी बार यह गुरु पर्व 28 दिसंबर को पड़ रहा है, जबकि वही तिथि छोटे साहिबजादे की शहादत का दिन है। 26 से 28 दिसंबर तक छोटे साहिबजादों की शहादत की याद में शहीदी जोड़ मेले का आयोजन होता है।

इसी के चलते एसजीपीसी ने पांच सिंह साहिबान को पत्र भेजकर अपील की थी कि प्रकाश पर्व की तारीख बदल दी जाए, ताकि दुनिया भर का सिख भाईचारा दोनों अवसर अलग-अलग समय पर मना सकें। इस पर विचार करने के बाद में पांच सिंह साहिबान ने दसवें गुरु के प्रकाश पर्व की तिथि 7 जनवरी तय कर दी।

बाद में इसे रद कर 28 दिसंबर को ही पर्व मनाने की घोषणा कर दी गई। कैलेंडर विवाद को हमेशा के लिए हल करने के उद्देश्य से इस मुद्दे पर फिर विचार किया जाए। सिख कौम फैसला करे कि वह विक्रमी कैलेंडर चाहती है या मूल नानकशाही कैलेंडर। हर बार गुरु पर्वों की तारीखें बदलकर कौम में विवाद पैदा किया जा रहा है।


एसजीपीसी मेंबर संशोधन के बाद नानकशाही कैलेंडर का मूल स्वरूप बदल गया है, जिस कारण गुरु पर्व, शहादत दिवस और ज्योति-ज्योत समाने की तारीखें एक साथ पड़ रही है। इसने सिख कौम को दुविधा में डाल दिया है। इस पर फिर से विचार करने की जरूरत है।

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