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निगम को 50 रुपये वापस करने का निर्देश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 30 Mar 2014 04:29 PM IST
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एक मामले में सुनवाई करते हुए नगर निगम को उपभोक्ता फोरम ने मनीमाजरा निवासी शिकायतकर्ता को पचास रुपये वापिस करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही फोरम ने मुआवजा और मुकदमा राशि के दो हजार रुपये भी अदा करने को कहा। पैसे लेने के बाद अलाटमेंट लेटर की कॉपी की जगह पर बिजली पानी के नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने पर उपभोक्ता फोरम ने नगर निगम के खिलाफ सख्ती बरती है।
यह निर्देश उपभोक्ता फोरम एक के अध्यक्ष पीएल आहूजा सदस्य रजिंदर सिंह गिल और सुरजीत कौर ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद दिया है। मनीमाजरा के मोहल्ला गोबिंदपुरा मकान नंबर 1139/6 निवासी जादू राम आंचल ने म्यूनिसिपल कार्पोरेशन मनीमाजरा एडिशनल कमिश्नर के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी।
यह था मामला
जादू राम ने उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में कहा कि उन्होंने वर्ष 1984 में लोन लेकर घर बनाया था। इसके लिए आवश्यक फीस के पचास रुपये, घर का नक्शा और आवेदन जमा कराया था। उन्होंने 26 अक्तूबर 1984 को आवेदन करके मकान का नंबर अलाट करने के लिए आवेदन किया था और 14 जून 2013 को आवेदन कर मकान अलाटमेंट लेटर की मांग की। नगर निगम ने 28 जून 2013 को जवाब में कहा कि वे इसके लिए पचास रुपये जमा करा दें। जादू राम ने एक जुलाई 2013 को पचास रुपये कॉपी फीस के रूप में जमा करा दिए। शिकायतकर्ता ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि अलाटमेंट लेटर की कॉपी की जगह पर पानी और बिजली का नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट भेज दिया। जबकि शिकायतकर्ता ने अपने मकान के अलाटमेंट लेटर की मांग की थी। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने सात अगस्त 2013 को पत्र भेजकर सूचित किया कि 10 जून 1985 को उनके मकान का अलाटमेंट ऑफिस प्रोसीडिंग के अनुसार हुआ है। इसके लिए कोई अलाटमेंट लेटर जारी नहीं किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार बार बार पत्र लिखकर अलाटमेंट लेटर मांगे जाने पर भी उन्हें नहीं दिया गया। जबकि इसके लिए पचास रुपये फीस भी ले ली। उधर नगर निगम ने उपभोक्ता फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती है।
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साथ ही फोरम ने मुआवजा और मुकदमा राशि के दो हजार रुपये भी अदा करने को कहा। पैसे लेने के बाद अलाटमेंट लेटर की कॉपी की जगह पर बिजली पानी के नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने पर उपभोक्ता फोरम ने नगर निगम के खिलाफ सख्ती बरती है।
यह निर्देश उपभोक्ता फोरम एक के अध्यक्ष पीएल आहूजा सदस्य रजिंदर सिंह गिल और सुरजीत कौर ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद दिया है। मनीमाजरा के मोहल्ला गोबिंदपुरा मकान नंबर 1139/6 निवासी जादू राम आंचल ने म्यूनिसिपल कार्पोरेशन मनीमाजरा एडिशनल कमिश्नर के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी।
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यह था मामला
जादू राम ने उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में कहा कि उन्होंने वर्ष 1984 में लोन लेकर घर बनाया था। इसके लिए आवश्यक फीस के पचास रुपये, घर का नक्शा और आवेदन जमा कराया था। उन्होंने 26 अक्तूबर 1984 को आवेदन करके मकान का नंबर अलाट करने के लिए आवेदन किया था और 14 जून 2013 को आवेदन कर मकान अलाटमेंट लेटर की मांग की। नगर निगम ने 28 जून 2013 को जवाब में कहा कि वे इसके लिए पचास रुपये जमा करा दें। जादू राम ने एक जुलाई 2013 को पचास रुपये कॉपी फीस के रूप में जमा करा दिए। शिकायतकर्ता ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि अलाटमेंट लेटर की कॉपी की जगह पर पानी और बिजली का नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट भेज दिया। जबकि शिकायतकर्ता ने अपने मकान के अलाटमेंट लेटर की मांग की थी। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने सात अगस्त 2013 को पत्र भेजकर सूचित किया कि 10 जून 1985 को उनके मकान का अलाटमेंट ऑफिस प्रोसीडिंग के अनुसार हुआ है। इसके लिए कोई अलाटमेंट लेटर जारी नहीं किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार बार बार पत्र लिखकर अलाटमेंट लेटर मांगे जाने पर भी उन्हें नहीं दिया गया। जबकि इसके लिए पचास रुपये फीस भी ले ली। उधर नगर निगम ने उपभोक्ता फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती है।
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