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मोहाली की दो कंपनियां सेवा में कोताही की दोषी करार, जुर्माना लगा
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली
Updated Sun, 24 Apr 2016 07:48 PM IST
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उपभोक्ता आयोग
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शेरवुड एस्टेट व आरकेएम सिटी लांडरां के खिलाफ मोहाली की जिला उपभोक्ता फोरम ने फैसला सुनाया है। फोरम ने दोनों को दो विभिन्न मामलों में सेवाओं में कोताही का दोषी करार दिया है। साथ ही कंपनियों को उपभोक्ताओं से लिया हुआ 2902000 रुपये वापस करने के आदेश दिए हैं।
वहीं, रकम पर सालाना 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा कंपनियों को दोनों उपभोक्ताओं को एक लाख (पचास हजार -पचास हजार) रुपये बतौर मुआवजे के रूप में देने होंगे। यह सारी कार्रवाई तुरंत करनी होगी। इसी संबंधी फोरम में विंरेदर सिंह निवासी सेक्टर-44 चंडीगढ़ व गुरनाम सिंह निवासी कुराली ने केस दायर किया था।
वीरेंद्र सिंह ने बताया कि सोसाइटी ने सेक्टर-11 में रेसिडेंशियल प्लॉट अलॉट करने के लिए स्कीम निकाली थी। जिसमें प्लॉटों की अलाटमेंट मेंबरशिप के माध्यम से की जानी थी। उन्होंने सोसाइटी में मेंबरशिप के लिए आवेदन कर दिया। उन्हें सोसाइटी की तरफ 164 नंबर मेंबरशिप नंबर जारीकर दिया गया।
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उन्होंने 13 अगस्त 2011 को मेंबरशिप फीस 21 हजार भर दी। इसके बाद उन्हें 200 वर्ग गज का रिहायशी प्लॉट अलॉट कर दिया गया। वहीं, उन्होंने इसके लिए सोसाइटी को 14 लाख एक हजार रुपये की फीस भर दी। कंपनी का आफिस लांडरां में था। कुछ समय बाद वह कंपनी के दफ्तर गए साथ ही प्लॉट नंबर और साइट पर चल रहे काम के बारे में पूछताछ की। लेकिन कंपनी की तरफ से उन्हें कोई भी जानकारी मुहैया नहीं करवाई गई।
अलॉटमेंट लेटर के मुताबिक कंपनी को डेढ़ साल में प्लॉट का कब्जा देना था। लेकिन चार साल बीतने के बाद भी पलॉट का कब्जा देने के बोर में कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने अपने पैसे के रिफंड के लिए कंपनी को कई बार पत्र लिखा। लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ भी नसीब नहीं हुआ। वहीं, फिर उन्हें पता चला कि कंपनी ने अपना प्रोजेक्ट आरकेएम सिटी को बेच दिया है।
इसके बाद उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ की उन्होंने सोसाइटी मेंबरों के बिना पूछे किसी अन्य कंपनी को प्रोजेक्ट कैसे बेच दिया। लेकिन उन्होंने कोई सही जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने इस संबंधी उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया। ऐसी ही कहानी कुराली निवासी गुरनाम सिंह की थी।
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वहीं, रकम पर सालाना 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा कंपनियों को दोनों उपभोक्ताओं को एक लाख (पचास हजार -पचास हजार) रुपये बतौर मुआवजे के रूप में देने होंगे। यह सारी कार्रवाई तुरंत करनी होगी। इसी संबंधी फोरम में विंरेदर सिंह निवासी सेक्टर-44 चंडीगढ़ व गुरनाम सिंह निवासी कुराली ने केस दायर किया था।
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वीरेंद्र सिंह ने बताया कि सोसाइटी ने सेक्टर-11 में रेसिडेंशियल प्लॉट अलॉट करने के लिए स्कीम निकाली थी। जिसमें प्लॉटों की अलाटमेंट मेंबरशिप के माध्यम से की जानी थी। उन्होंने सोसाइटी में मेंबरशिप के लिए आवेदन कर दिया। उन्हें सोसाइटी की तरफ 164 नंबर मेंबरशिप नंबर जारीकर दिया गया।
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उन्होंने 13 अगस्त 2011 को मेंबरशिप फीस 21 हजार भर दी। इसके बाद उन्हें 200 वर्ग गज का रिहायशी प्लॉट अलॉट कर दिया गया। वहीं, उन्होंने इसके लिए सोसाइटी को 14 लाख एक हजार रुपये की फीस भर दी। कंपनी का आफिस लांडरां में था। कुछ समय बाद वह कंपनी के दफ्तर गए साथ ही प्लॉट नंबर और साइट पर चल रहे काम के बारे में पूछताछ की। लेकिन कंपनी की तरफ से उन्हें कोई भी जानकारी मुहैया नहीं करवाई गई।
अलॉटमेंट लेटर के मुताबिक कंपनी को डेढ़ साल में प्लॉट का कब्जा देना था। लेकिन चार साल बीतने के बाद भी पलॉट का कब्जा देने के बोर में कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने अपने पैसे के रिफंड के लिए कंपनी को कई बार पत्र लिखा। लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ भी नसीब नहीं हुआ। वहीं, फिर उन्हें पता चला कि कंपनी ने अपना प्रोजेक्ट आरकेएम सिटी को बेच दिया है।
इसके बाद उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ की उन्होंने सोसाइटी मेंबरों के बिना पूछे किसी अन्य कंपनी को प्रोजेक्ट कैसे बेच दिया। लेकिन उन्होंने कोई सही जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने इस संबंधी उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया। ऐसी ही कहानी कुराली निवासी गुरनाम सिंह की थी।