{"_id":"56ea81474f1c1b270d8b4589","slug":"consumer-forum-bajwa-builder-mohali-news-mohali","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर का सपना देख रहे उपभोक्ता को परेशान किया, बिल्डर दोषी करार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घर का सपना देख रहे उपभोक्ता को परेशान किया, बिल्डर दोषी करार
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Fri, 18 Mar 2016 10:23 AM IST
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उपभोक्ता आयोग
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हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए प्रॉपर मंजूरी लिए बिना ही एक उपभोक्ता को करीब तीन साल तक लटकाने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने बाजवा डेवलपर के खिलाफ फैसला सुनाया है। अदालत ने उन्हें सेवा में कोताही का दोषी करार दिया है। साथ ही उपभोक्ता से प्लॉट के बदले लिए गए चार लाख 84 हजार 375 रुपये लौटाने का आदेश दिया है। पूरी रकम पर 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई परेशानी के लिए 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
इस संबंध में सेक्टर-74 निवासी सुरजीत अधिकारी ने फोरम में केस दायर किया था। शिकायतकर्ता ने फोरम को बताया कि फरवरी-2012 में राजीव अवस्थी नाम के एक व्यक्ति से मुलाकात हुई थी। उस समय वह घर लेने की तैयारी में थे। राजीव उस समय पीजीआईएमईआर में काम करता था। उसने उन्हें सेक्टर-124 सन्नी एनक्लेव में प्लॉट दिखाया।
साथ ही बताया कि यह प्रोजेक्ट बाजवा डेवलपर न्यू सन्नी फ्रेंड्स एनक्लेव के नाम से विकसित कर रहा है। यहां पर ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी बनेगी। जो कि पीजीआआई व पीयू के मुलाजिमों के लिए होगी। राजीव ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए संबंधित विभाग जल्द ही सीएलयू जारी कर देगा। एक साल के भीतर प्लॉट का पजेशन दे दिया जाएगा। फिर राजीव ने उसे अमन एंड कंपनी के प्रबंधकों से मिलवाया। उन्होंने उसे बाजवा डेलपर के बीच हुआ समझौता दिखाया।
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एमओयू की कॉपी काफी भी दी। वहीं, उन्हें विश्वास दिलाया कि उन्हें लोन की व्यवस्था भी करवा देंगे। इसके बाद 50 हजार रुपये देकर 125 वर्ग गज का प्लॉट 21 फरवरी 2012 को बुक करवा दिया। प्लॉट की कीमत 19,37,500 रुपये थी। उस समय 80 प्रतिशत फाइनसेंस करने का आश्वासन दिया था। शिकायतकर्ता ने इसके बाद 4 लाख 34 हजार 375 रुपये जमा करवा दिए। 10 अप्रैल 2012 का उनका कंपनी के साथ एमओयू साइन हो गया।
एग्रीमेंट पंजाबी में था, नहीं पढ़ पाया शर्तें
शिकायतकर्ता ने बताया कि जब एग्रीमेंट हुआ था। वह पंजाबी भाषा में लिखा हुआ था। हालांकि, बाद में काफी समय तक उसने कंपनी से कोई संपर्क नहीं किया। वह कई बार कंपनी के दफ्तर गए। लेकिन, उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी। जून 2013 में अमन एंड कंपनी ने उन्हें एक दस्तावेज सौंपे। जो कि कंट्री एंड टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट थे। साथ ही बताया कि लोन की सुविधा स्टेट बैंक आफ पटियाला की सेक्टर-35 की शाखा देगी। शिकायतकर्ता जून 2013 में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में गया। इसी बीच उसके एक दोस्त ने कहा कि एग्रीमेंट में जो शर्तें लिखीं हैं। उनको एक बार पढ़ लो। उसमें प्लॉट का कब्जा देने की तिथि नहीं लिखी हुई थी।
ढाई साल बाद ड्रॉ के लिए दी सूचना
करीब ढाई साल बाद बाजवा डेवपलर ने उन्हें सूचित किया कि 19 अक्तूबर 2014 को एक ड्रॉ निकाला गया था। जिसमें उन्हें प्लॉट नंबर 222 अलॉट कर दिया गया है।
न जाने को सड़क न अन्य सुविधाएं
जब वह प्लॉट वाली जगह पर गए तो हैरान रह गए। वहां पर कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं थी। यहां तक कि आने जाने के लिए जगह तक नहीं थी। प्लॉट तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं था। इसके बाद दोबारा कंपनी से संपर्क किया तो कंपनी वालों ने कहा कि दो तीन महीने में विकास कार्य शुरू हो जाएंगे। प्लॉट का कब्जा दो तीन महीने में दे दिया जाएगा। वहीं, लोन की प्रक्रिया भी जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।
बैंक ने कहा प्रोजेक्ट के लिए नहीं लोन
इसके बाद शिकायतकर्ता बैंक में गया। बैंक ने बताया कि उक्त सोसाइटी के लिए ग्रुप लोन की सुविधा खत्म कर दी है। इससे उसे बड़ी निराशा हाथ लगी। पांच फरवरी 2015 व 11 मार्च 2015 को उन्होंने कंपनी से रिफंड के लिए आवेदन किया। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
आरटीआई के जवाब ने दिया झटका
शिकायतकर्ता के वकील ने एक आरटीआई डाली। जिसमें पता चाल कि उक्त प्रमोटर को सेक्टर-124 में न्यू फ्रेंड्स एनक्लेव कॉलोनी स्थापित करने के लिए किसी भी तरह की गमाडा या पुडा से कोई मंजूरी नहीं मिली है। गमाडा से इसके लिए कोई लाइसेंस नहीं दिया गया। इसको आधार बनाकर उन्होंने फोरम में आवेदन किया था।
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इस संबंध में सेक्टर-74 निवासी सुरजीत अधिकारी ने फोरम में केस दायर किया था। शिकायतकर्ता ने फोरम को बताया कि फरवरी-2012 में राजीव अवस्थी नाम के एक व्यक्ति से मुलाकात हुई थी। उस समय वह घर लेने की तैयारी में थे। राजीव उस समय पीजीआईएमईआर में काम करता था। उसने उन्हें सेक्टर-124 सन्नी एनक्लेव में प्लॉट दिखाया।
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साथ ही बताया कि यह प्रोजेक्ट बाजवा डेवलपर न्यू सन्नी फ्रेंड्स एनक्लेव के नाम से विकसित कर रहा है। यहां पर ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी बनेगी। जो कि पीजीआआई व पीयू के मुलाजिमों के लिए होगी। राजीव ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए संबंधित विभाग जल्द ही सीएलयू जारी कर देगा। एक साल के भीतर प्लॉट का पजेशन दे दिया जाएगा। फिर राजीव ने उसे अमन एंड कंपनी के प्रबंधकों से मिलवाया। उन्होंने उसे बाजवा डेलपर के बीच हुआ समझौता दिखाया।
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एमओयू की कॉपी काफी भी दी। वहीं, उन्हें विश्वास दिलाया कि उन्हें लोन की व्यवस्था भी करवा देंगे। इसके बाद 50 हजार रुपये देकर 125 वर्ग गज का प्लॉट 21 फरवरी 2012 को बुक करवा दिया। प्लॉट की कीमत 19,37,500 रुपये थी। उस समय 80 प्रतिशत फाइनसेंस करने का आश्वासन दिया था। शिकायतकर्ता ने इसके बाद 4 लाख 34 हजार 375 रुपये जमा करवा दिए। 10 अप्रैल 2012 का उनका कंपनी के साथ एमओयू साइन हो गया।
एग्रीमेंट पंजाबी में था, नहीं पढ़ पाया शर्तें
शिकायतकर्ता ने बताया कि जब एग्रीमेंट हुआ था। वह पंजाबी भाषा में लिखा हुआ था। हालांकि, बाद में काफी समय तक उसने कंपनी से कोई संपर्क नहीं किया। वह कई बार कंपनी के दफ्तर गए। लेकिन, उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी। जून 2013 में अमन एंड कंपनी ने उन्हें एक दस्तावेज सौंपे। जो कि कंट्री एंड टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट थे। साथ ही बताया कि लोन की सुविधा स्टेट बैंक आफ पटियाला की सेक्टर-35 की शाखा देगी। शिकायतकर्ता जून 2013 में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में गया। इसी बीच उसके एक दोस्त ने कहा कि एग्रीमेंट में जो शर्तें लिखीं हैं। उनको एक बार पढ़ लो। उसमें प्लॉट का कब्जा देने की तिथि नहीं लिखी हुई थी।
ढाई साल बाद ड्रॉ के लिए दी सूचना
करीब ढाई साल बाद बाजवा डेवपलर ने उन्हें सूचित किया कि 19 अक्तूबर 2014 को एक ड्रॉ निकाला गया था। जिसमें उन्हें प्लॉट नंबर 222 अलॉट कर दिया गया है।
न जाने को सड़क न अन्य सुविधाएं
जब वह प्लॉट वाली जगह पर गए तो हैरान रह गए। वहां पर कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं थी। यहां तक कि आने जाने के लिए जगह तक नहीं थी। प्लॉट तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं था। इसके बाद दोबारा कंपनी से संपर्क किया तो कंपनी वालों ने कहा कि दो तीन महीने में विकास कार्य शुरू हो जाएंगे। प्लॉट का कब्जा दो तीन महीने में दे दिया जाएगा। वहीं, लोन की प्रक्रिया भी जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।
बैंक ने कहा प्रोजेक्ट के लिए नहीं लोन
इसके बाद शिकायतकर्ता बैंक में गया। बैंक ने बताया कि उक्त सोसाइटी के लिए ग्रुप लोन की सुविधा खत्म कर दी है। इससे उसे बड़ी निराशा हाथ लगी। पांच फरवरी 2015 व 11 मार्च 2015 को उन्होंने कंपनी से रिफंड के लिए आवेदन किया। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
आरटीआई के जवाब ने दिया झटका
शिकायतकर्ता के वकील ने एक आरटीआई डाली। जिसमें पता चाल कि उक्त प्रमोटर को सेक्टर-124 में न्यू फ्रेंड्स एनक्लेव कॉलोनी स्थापित करने के लिए किसी भी तरह की गमाडा या पुडा से कोई मंजूरी नहीं मिली है। गमाडा से इसके लिए कोई लाइसेंस नहीं दिया गया। इसको आधार बनाकर उन्होंने फोरम में आवेदन किया था।