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‘अनिश्चितकाल तक प्लॉट का इंतजार नहीं कर सकता उपभोक्ता, बिल्डर रुपये लौटाए’
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चंडीगढ़। शिकायतकर्ताओं से पर्याप्त राशि लेने के बाद भी बिल्डर ने उन्हें प्लॉट नहीं दिया। शिकायतकर्ता अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कर सकते। ऐसे में वो मुआवजा और भुगतान की गई राशि की वापसी की मांग करने के हकदार हैं। यह टिप्पणी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए की। आयोग ने यूके होम्स को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को छह लाख रुपये 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। साथ ही पचास हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च के अदा करे।
दूसरे पक्ष की ओर से उपभोक्ता आयोग में अपना पक्ष नहीं रखे जाने पर उसे एकतरफा करार दिया गया है। शिकायतकर्ता कृष्ण लाल निवासी सेक्टर-17 पंचकूला और रवि दत्त शर्मा निवासी सेक्टर-32 ए चंडीगढ़ ने सेक्टर-17 चंडीगढ़ स्थित यूके होम्स प्राइवेट लिमिटेड यूके ग्रुप और इसके निदेशकों अमरजीत सिंह, उदय राज सिंह बराड़, कश्मीर सिंह और प्रह्लाद गुलाटी के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग 2 चंडीगढ़ में शिकायत दी थी।
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनकी इच्छा थी कि उनका घर चंडीगढ़ के पास हो इसलिए उन्होंने दूसरे पक्ष से संपर्क किया जो जीरकपुर पटियाला रोड पर प्रोजेक्ट कैपिटल ग्रीन ला रहे थे। इसमें उन्होंने 200 वर्ग मीटर का प्लॉट खरीदने की इच्छा जताई। शिकायतकर्ताओं ने 20 दिसंबर 2011 को दूसरे पक्ष को तीन लाख रुपये प्रारंभिक राशि के रूप में जमा कर दिया। इसके बाद उन्होंने कुल छह लाख रुपये का भुगतान किया। इसके बाद उन्हें प्लॉट नंबर 137 अलॉट किया गया। शिकायतकर्ताओं ने उपभोक्ता आयोग को बताया कि छह लाख रुपये लेने के बाद भी बिल्डर प्रोजेक्ट को विकसित करने में विफल रहे और उन्हें प्लॉट नहीं मिला और न ही उनके पैसे लौटाए गए।
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दूसरे पक्ष की ओर से उपभोक्ता आयोग में अपना पक्ष नहीं रखे जाने पर उसे एकतरफा करार दिया गया है। शिकायतकर्ता कृष्ण लाल निवासी सेक्टर-17 पंचकूला और रवि दत्त शर्मा निवासी सेक्टर-32 ए चंडीगढ़ ने सेक्टर-17 चंडीगढ़ स्थित यूके होम्स प्राइवेट लिमिटेड यूके ग्रुप और इसके निदेशकों अमरजीत सिंह, उदय राज सिंह बराड़, कश्मीर सिंह और प्रह्लाद गुलाटी के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग 2 चंडीगढ़ में शिकायत दी थी।
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शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनकी इच्छा थी कि उनका घर चंडीगढ़ के पास हो इसलिए उन्होंने दूसरे पक्ष से संपर्क किया जो जीरकपुर पटियाला रोड पर प्रोजेक्ट कैपिटल ग्रीन ला रहे थे। इसमें उन्होंने 200 वर्ग मीटर का प्लॉट खरीदने की इच्छा जताई। शिकायतकर्ताओं ने 20 दिसंबर 2011 को दूसरे पक्ष को तीन लाख रुपये प्रारंभिक राशि के रूप में जमा कर दिया। इसके बाद उन्होंने कुल छह लाख रुपये का भुगतान किया। इसके बाद उन्हें प्लॉट नंबर 137 अलॉट किया गया। शिकायतकर्ताओं ने उपभोक्ता आयोग को बताया कि छह लाख रुपये लेने के बाद भी बिल्डर प्रोजेक्ट को विकसित करने में विफल रहे और उन्हें प्लॉट नहीं मिला और न ही उनके पैसे लौटाए गए।
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