कंस्ट्रक्शन में ड्राई फ्लाई ऐश का होगा ज्यादा इस्तेमाल, ये रही वजह
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इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट अपने कंस्ट्रक्शन वर्क में ड्राई फ्लाई ऐश की ईंटों का इस्तेमाल करेगा। खासकर बिल्डिंग बनाने में इनका इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाएगा।
यह फैसला शुक्रवार को यूटी सचिवालय में हुई इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की मीटिंग में ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को बढ़ावा देने के लिए लिया गया। मीटिंग में डिपार्टमेंट के उच्चाधिकारियों से लेकर एसडीओ, जेई तक स्टाफ ने हिस्सा लिया।
चंडीगढ़ में ड्राई फ्लाई ऐश से पहले ही कई बिल्डिंग बनाई जा रही हैं। बता दें कि प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने सिटी ब्यूटीफुल को ग्रीन सिटी बनाने के आदेश दिए हैं।
यूरोपियन ग्रीन सिटी ब्रिस्टल के कांसेप्ट को स्टडी कर कुछ दिन पहले ही होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल और टूरिज्म डायरेक्टर जितेंद्र यादव लौटे हैं। प्रशासक ने ही अधिकारियों को ब्रिस्टल भेजा था। ब्रिस्टल सिटी की कई अच्छी चीजों को चंडीगढ़ में अपनाने का काम शुरू किया गया है। कार पुलिंग भी उनमें से एक है।
जानिए क्या हैं इसके फायदे
इंजीनियरिंग विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ड्राई फ्लाई ऐश का प्रयोग कंस्ट्रक्शन वर्क में करने के कई फायदे हैं। इससे पर्यावरण को हो रही हानि रुकती है।
इसके अलावा इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आग रहित (फायर प्रूफ) होती है। आम बिल्डिंग में आग लगने से दीवारें दरार आने के बाद ढह जाती हैं।
जिससे बिल्डिंग कितनी भी मजबूत हो वह आग के आगे टिक नहीं पाती। वहीं ड्राई फ्लाई ऐश की ईंटों से बनी बिल्डिंग की दीवारों पर आग का असर नहीं होता। बिल्डिंग में कितनी भी आग हो यह गिरेगी नहीं।
बेशक अंदर का सामान पूरा आग की भेंट चढ़ जाए। वहीं पानी गिरने और धूप लगने से इनकी मजबूती बढ़ती जाती है। सेक्टर-19 में बनी पर्यावरण बिल्डिंग में भी ड्राई फ्लाई ऐश से बना मटीरियल ही इस्तेमाल हुआ है।
राइस मील सेलर से सबसे ज्यादा ड्राई फ्लाई ऐश निकलती है। जबकि खुले में पड़े रहने से उड़ती हुई यह ऐश कई बार लोगों की आंखों में भी गिर जाती है। इससे कई परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं।