मांग: कांग्रेस विधायक ने सीएम भगवंत मान को किया ट्वीट, कहा- पंजाब की बसों को दिल्ली हवाई अड्डे तक मिले अनुमति
पंजाब कांग्रेस के विधायक प्रताप बाजवा ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री भगवंत मान से किया आग्रह है कि पीआरटीसी और पनबस को आईजीआई एयरपोर्ट तक अपने बसें चलाने की अनुमति मिले। साथ ही मांग की है कि यह मुद्दा दिल्ली के मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाए।
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पंजाब कांग्रेस के विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की है कि पीआरटीसी और पनबस की बसों को नई दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक आने-जाने की अनुमति दिलाएं।
बाजवा ने शनिवार को ट्वीट किया कि पीआरटीसी और पनबस को अभी तक आईजीआई एयरपोर्ट तक अपने बसें चलाने की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वह इस मुद्दे को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ तुरंत उठाएं। एक अन्य ट्वीट में बाजवा ने लिखा कि पीआरटीसी और पनबस की सेवाएं शुरू होने में देरी से पंजाब सरकार के हितों को नुकसान पहुंच रहा है और प्रदेश के आम लोगों और विशेष तौर पर एनआरआई को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने ट्वीट किया कि पीआरटीसी और पनबस पर प्रतिबंध से केवल ट्रांसपोर्ट माफिया को भी लाभ हो रहा है। जानकारी के अनुसार दिल्ली सरकार ने पंजाब से आईजीआई हवाई अड्डे तक सरकारी बसों के आने-जाने पर तो रोक लगा रखी है, लेकिन पंजाब से निजी बसों को पूरी छूट दे रखी है। इसके चलते पंजाब के लोगों को दिल्ली हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए निजी बसों को भारी-भरकम किराया देना पड़ता है, जबकि सरकारी बसों में यह किराया आधा होता था।
सरकारी बसों को केवल दिल्ली बस अड्डे तक जाने की अनुमति
पंजाब की सरकारी बसों को केवल दिल्ली बस अड्डे तक ही आने-जाने की अनुमति दी गई है, जबकि पंजाब की निजी बसें सीधे हवाई अड्डे तक आ-जा सकती हैं। इस मामले को लेकर पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने भी कई बार दिल्ली सरकार के समक्ष मामला उठाया। पंजाब सरकार की तरफ से दिल्ली सरकार को इस बाबत 13 पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन केजरीवाल सरकार द्वारा इस बारे में कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया और न ही पंजाब की सरकारी बसों पर लगाया प्रतिबंध ही हटाया गया है।
पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी सरकार के कार्यकाल में ट्रांसपोर्ट मंत्री राजा वडिंग ने भी दिल्ली सरकार के समक्ष यह मांग उठाई थी। यहां तक कि उन्होंने अमृतसर में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करके भी यह मामला उठाया था, जिस पर दिल्ली सरकार अब तक चुप्पी साधे हुए है।