15 साल पुरानी महत्वाकांक्षा नहीं हुई पूरी तो दिल्ली पहुंचे सिद्धू, केंद्र से लगा रहे गुहार
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से सियासी विवाद और मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टों पर काम करना शुरू कर दिया है।
वह पूर्वी विधान सभा क्षेत्र में पड़ने वाले पांच रेलवे पुलों के निर्माण के लिए दिल्ली स्थित बड़ौदा हाउस में उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक टीपी सिंह से मिले। लोकसभा चुनाव के बाद नवजोत सिद्धू की पहली बार अपने विधान सभा के विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई और दिल्ली पहुंचे।
सिद्धू ने वर्ष 2004 में सांसद निर्वाचित होने के बाद अमृतसर स्टेशन के साथ जुड़े पांच महत्वपूर्ण रेलवे फाटकों के कारण लोगों को झेलनी पड़ रही परेशानी से मुक्ति दिलाने के लिए वहां पर आरओबी के निर्माण करवाने का आश्वासन दिया था। सिद्धू दस वर्ष तक सांसद रहे।
अपने इस वादे को पूरा करने में असमर्थ रहे। जब सिद्धू कैप्टन अमरिंदर की सरकार में मंत्री बने तब दो वर्ष बीत जाने के बाद लोक सभा चुनाव से कुछ दिन पहले तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिलकर पांच आरओबी के निर्माण का प्रस्ताव रखा था। पीयूष गोयल ने सिद्धू को इन पांच आरओबी के निर्माण का भरोसा दिया था। इसी आश्वासन को लेकर सिद्धू ने टीपी सिंह के साथ मुलाकात की है।
सिद्धू ने इस मुलाकात में टीपी सिंह को बताया की अमृतसर के जोड़ा फाटक के नीचे बनाये गए रेलवे अंडरपास की कुल चौड़ाई मात्र छह फुट हैं। जब यह अंडर पास का निर्माण किया गया था, तब इस इलाके में आबादी बहुत कम थी। लोगों के पास वाहन भी कम थे।
अब इस इलाके की आबादी काफी बढ़ गई है। यहां से गुजरने वाले तीन से चार लाख लोगों को इस फाटक के कारण कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। अंडर पास की चौड़ाई 35 फुट कर दी जाए तो यह समस्या दूर हो सकती है। चौड़ाई बढ़ाने के लिए वहां पर सभी विकल्प मौजूद हैं।
इसके साथ ही सिद्धू ने वल्ला फाटक में भी आरओबी के निर्माण का मुद्दा उठाया है। इसके साथ ही हुसैनीवाला व शिवाला गंगा राम रेलवे फाटक में भी आरओबी के निर्माण की भी मांग की हैं। सिद्धू ने टीपी सिंह के साथ बातचीत में कहा की आरओबी के निर्माण में पंजाब सरकार द्वारा अपने हिस्से की दी जाने वाली राशि नगर सुधार ट्रस्ट ने पहले ही मंजूर की हुई है। हालांकि की सिद्धू ने इन दिनों मीडिया से दूरी बना कर रखी है।