Punjab Election 2022: केपी पर भारी पड़ा कांग्रेस हाईकमान का दांव, नामांकन दाखिल करने पहुंचे, मगर 15 मिनट पहले हो गया 'खेला'
पिछली बार आदमपुर से चुनाव हारने वाले मोहिंदर सिंह केपी को कांग्रेस हाईकमान ने इस कदर उलझाया कि उन्हें टिकट भी नहीं मिला और निर्दलीय भी नहीं लड़ सके। उन्हें नामांकन खत्म होने के आखिरी समय तक इंतजार करवाया गया और उम्मीदवार कोटली को बना दिया गया।
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मंगलवार को जालंधर में कांग्रेस का हाईप्रोफाइल ड्रामा हुआ और इसका गवाह बना जालंधर का नगर निगम कार्यालय। जहां आदमपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस से दो प्रत्याशी नामांकन दाखिल करने पहुंचे। तीन बजे तक आखिरी वक्त था। 15 मिनट पहले कांग्रेस ने अपना अथॉरिटी लेटर सुखविंदर कोटली को दिया। उस समय पूर्व सांसद व पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहिंदर सिंह केपी आदमपुर के चुनाव अधिकारी के पास अपने कागजात भर रहे थे, जैसे ही उनको संदेशा मिला कि अथॉरिटी लेटर सुखविंदर कोटली को दिया गया है तो केपी ने गुस्से में आकर अपनी फाइल खींच ली और कार्यालय से निकल गए।
मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ मोहिंदर सिंह केपी ने पिछले दिनों जालंधर में वर्चुअल रैली के दौरान राहुल गांधी से मुलाकात कर कहा था कि उनको आदमपुर से प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है, वहां से कोटली को टिकट दिया गया है। राहुल गांधी ने सीएम चन्नी व नवजोत सिद्धू से कहा था कि केपी साहब को टिकट दिया जाए। कारण था कि केपी ने आदमपुर हलके में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को ले जाकर करोड़ों रुपये की ग्रांट घोषित करवाई थी लेकिन कांग्रेस ने कोटली को प्रत्याशी बना दिया था।
कोटली लगातार अपना प्रचार कर रहे थे और उनके प्रचार को बल भी मिल रहा था लेकिन केपी को सोमवार शाम कांग्रेस हाईकमान का संदेश आया कि उनको आदमपुर से टिकट दिया जा रहा, वहां से प्रत्याशी बदला जा रहा है। मंगलवार को केपी की कोठी में जमावड़ा लग गया। केपी ने एडवोकेट के माध्यम से फाइल तैयार करवाई।
मंगलवार को केपी को टिकट मिल गया और वहां से कांग्रेस ने प्रत्याशी बदल दिया है, इसका पूरा शोर जालंधर में मच गया। नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था, लिहाजा तैयार होकर केपी अपने चहेतों के साथ नगर निगम पहुंचे लेकिन इससे पहले वहां पर सुखविंदर कोटली खड़े थे। कोटली भी अथॉरिटी लेटर का इंतजार कर रहे थे। घड़ी की सूईयां तेजी से आगे दौड़ती जा रही थीं और दो बजकर 45 मिनट हो गए थे।
केपी अपनी फाइलें को लेकर अधिकारी के पास पहुंचे। कागजात दाखिल करने लगे और कहा कि उनका अथॉरिटी लेटर आ रहा है। तब तक दस्तावेज जमा कर लिए जाएं। कांग्रेस प्रत्याशी सुखविंदर कोटली भी पूरी तरह से आश्वस्त थे कि अथॉरिटी लेटर उनको ही मिलेगा। पौने तीन बजे अचानक कोटली दौड़ते हुए पार्किंग पहुंचे और वहां एक गाड़ी आकर रुकी। जिसमें से वह पीले रंग का लिफाफा लेकर दौड़ते कार्यालय आए तो कांग्रेस जिंदाबाद व सुखविंदर कोटली जिंदाबाद के नारे लगने लगे। नारों का शोर केपी के कानों में पड़ा तो उन्होंने कांग्रेस के दिग्गजों को फोन मिलाया लेकिन किसी ने नहीं उठाया। आखिरकार केपी सारा मामला समझ गए और अपनी फाइल उठाकर लौट गए।
केपी मेरे पिता की तरह, उनका आशीर्वाद लेकर चलूंगा: कोटली
15 मिनट पहले अथॉरिटी लेटर पाने वाले सुखविंदर कोटली ने कहा कि केपी उनके पिता समान है, वह उनका आशीर्वाद लेकर ही चलेंगे। उधर, मोहिंदर केपी ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान के नेता मेरा फोन नहीं उठा रहे हैं। मेरे साथ धोखा व गलत किया गया है। कल रात मुझे आधिकारिक रूप से कहा गया कि टिकट आपको दिया जा रहा है।
आदमपुर में रोचक हो गया मुकाबला
आदमपुर में मुकाबला रोचक हो गया है। वहां से विधायक पवन कुमार टीनू व सुखविंदर कोटली दोनों बसपा के मिशनरी नेता रहे हैं। टीनू ने अकाली दल का दामन थाम लिया था, जबकि कोटली अब कांग्रेस में आ गए हैं। कांग्रेस से सुखविंदर कोटली को ही प्रत्याशी बनाने से विधानसभा हलका आदमपुर में विपक्षी दलों के सामने खासी चुनौती खड़ी हो गई है। अकाली दल-बसपा के लिए भी इस सीट को जीत पाना अब पूर्व की भांति आसान नहीं होगा। सुखविंदर कोटली बसपा से ही अलग हुए हैं और बसपा के कैडर में ही सेंध लगाएंगे जो सीधे तौर पर अकाली-बसपा प्रत्याशी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।